चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान बारिश और तेज आंधी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालांकि जिले में मौसम की खराब स्थिति करीब तीन दिनों से बनी हुई है, लेकिन शुक्रवार रात से शनिवार तक तेज हवाओं और लगातार बारिश ने नुकसान का दायरा और बढ़ा दिया। कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, विद्युत आपूर्ति व्यापक रूप से प्रभावित हुई, खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसलें धराशायी हो गईं तथा सड़क मार्गों पर आवागमन बाधित हुआ। जिले में बारिश और आंधी से जुड़े हादसों में दो युवकों की मौत और चार लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गोंडा को भारी बारिश के लिए जारी रेड अलर्ट वाले जिलों में शामिल किया गया था। राज्य प्रशासन ने भी प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव व्यवस्था सक्रिय रखने तथा क्षति का आकलन कर प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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पेड़ के नीचे दबकर दो युवकों की मौत
गोंडा जिले में तेज हवा और बारिश के बीच पेड़ गिरने की एक घटना में दो युवकों की जान चली गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार बलरामपुर जिले के रेहरा बाजार थाना क्षेत्र के सकरढ़िया बड़हरा भिठौरा निवासी इमरान और खालिद बाबागंज से सामान लेकर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान तेज हवा और बारिश के बीच पेड़ गिर गया और दोनों उसकी चपेट में आ गए।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों युवकों की मौत ने खराब मौसम के बीच ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन की ओर से लगातार लोगों से अपील की जा रही है कि तेज आंधी और वज्रपात के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले स्थानों से दूर रहें।
मकान पर पेड़ गिरने से दंपती समेत चार घायल
जिले में एक अन्य घटना में तेज बारिश और हवाओं के दौरान पेड़ मकान पर गिर गया। इस हादसे में दंपती समेत चार लोगों के घायल होने की सूचना है। घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर मकानों और बड़े पेड़ों के आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
लगातार बारिश से जमीन में नमी बढ़ने और तेज हवाओं के कारण पेड़ों के गिरने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में रास्तों, बिजली लाइनों और आबादी वाले इलाकों में गिरे पेड़ों को हटाना प्रशासन तथा संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
600 से अधिक बिजली के खंभे टूटने की सूचना
गोंडा में बारिश और तेज हवाओं का सबसे बड़ा असर विद्युत व्यवस्था पर पड़ा है। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता सुशील कुमार के अनुसार जिले में 600 से अधिक बिजली के खंभे टूट गए हैं, जबकि कई दर्जन ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। शुक्रवार रात के बाद स्थिति और गंभीर हो गई तथा कई विद्युत उपकेंद्रों से आपूर्ति बाधित रही।
धानेपुर क्षेत्र में भी विद्युत ढांचे को भारी क्षति पहुंची है। यहां 50 से अधिक खंभों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई है। कई जगह पेड़ों की डालियां विद्युत तारों पर गिर गईं, जिससे लाइनें टूट गईं और आपूर्ति बाधित हुई।
मुजेहना गांव में बिजली के तार पर पेड़ गिरने से पोल और ट्रांसफार्मर तक जमीन पर गिर गए। धानेपुर उपकेंद्र से जुड़े अलावल देवरिया, बाबागंज, लोशीसा, रुद्रगढ़ और नोसी सहित कई फीडरों पर इसका असर पड़ा।
42 विद्युत उपकेंद्रों पर पड़ा असर
बारिश और तेज हवाओं के कारण जिले की विद्युत व्यवस्था पर असर कितना व्यापक रहा, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले के 42 विद्युत उपकेंद्रों में 22 पूरी तरह और 20 आंशिक रूप से प्रभावित बताए गए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक इससे लगभग पांच लाख विद्युत उपभोक्ताओं की आपूर्ति बाधित हुई।
बेलसर, वजीरगंज, दुर्जनपुर घाट, खरगूपुर, आर्यनगर, सुभागपुर, कटरा बाजार, तरबगंज और मसकनवा सहित कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति प्रभावित रही। कई स्थानों पर हाईटेंशन लाइनों पर पेड़ गिरने से तार टूटे तो कहीं पोल क्षतिग्रस्त हुए। बारिश के कारण पेट्रोलिंग और फाल्ट तलाशने में भी कर्मचारियों को कठिनाई हुई।
धानेपुर में 33 केवी लाइन भी प्रभावित
धानेपुर क्षेत्र में बेंदुली और सुभागपुर के बीच 33 केवी लाइन का पोल गिरने की सूचना है। इससे धानेपुर उपकेंद्र की आपूर्ति प्रभावित हुई। विभागीय कर्मचारी लगातार मरम्मत कार्य में जुटे हैं, लेकिन लगातार बारिश और तेज हवा के कारण क्षतिग्रस्त विद्युत लाइनों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करने में कई दिन लगने की आशंका भी विभागीय स्तर पर जताई गई है।
तरबगंज, वजीरगंज और कटरा बाजार में भी असर
तरबगंज क्षेत्र में भी कई स्थानों पर विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हुईं। वजीरगंज क्षेत्र के कई उपकेंद्रों की आपूर्ति प्रभावित रही। वहीं कटरा बाजार में हाईटेंशन लाइन पर पेड़ गिरने से आपूर्ति बाधित होने की जानकारी है।
परसपुर क्षेत्र में भी पेड़ों के गिरने से एलटी और एचटी लाइनों को नुकसान पहुंचा और करीब डेढ़ दर्जन बिजली के पोल टूटने की सूचना सामने आई। इन घटनाओं से कई फीडरों से जुड़े गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही।
आंधी से धान और गन्ने की फसलें खेतों में बिछीं
बारिश और तेज हवाओं ने जिले के किसानों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसलें कई स्थानों पर जमीन पर गिर गईं। जयप्रभाग्राम और कटरा बाजार क्षेत्र से फसलों के नुकसान की जानकारी सामने आई है।
धान की फसल इस समय पकने की अवस्था की ओर बढ़ रही है। ऐसे में लगातार बारिश और तेज हवा से पौधों के गिरने पर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर गन्ने की फसल के गिरने से किसानों को अतिरिक्त श्रम और लागत का सामना करना पड़ सकता है।
कटरा बाजार क्षेत्र में किसानों से गिरे हुए गन्ने को जल्द बांधने की अपील की गई है, ताकि फसल को और नुकसान से बचाया जा सके।
सब्जियों पर भी मंडराया नुकसान का खतरा
लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से सब्जियों की फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। निचले इलाकों में जलभराव लंबे समय तक बना रहा तो खेतों में खड़ी सब्जियों को नुकसान हो सकता है।
कृषि क्षेत्र में वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन फसलवार सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टें धान और गन्ने को व्यापक स्तर पर प्रभावित होने की ओर संकेत करती हैं।
पेड़ गिरने से मुख्य और ग्रामीण मार्ग प्रभावित
तेज हवाओं के कारण जिले के कई हिस्सों में पेड़ और डालियां सड़क पर गिरने की जानकारी है। इससे ग्रामीण मार्गों के साथ मुख्य मार्गों पर भी आवागमन प्रभावित हुआ। बारिश के दौरान पेड़ों को हटाने में भी परेशानी हुई।
जिले के अलग-अलग हिस्सों में विद्युत तारों पर पेड़ गिरने के कारण रास्तों और बिजली व्यवस्था दोनों पर एक साथ असर पड़ा। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें रास्तों तथा विद्युत लाइनों को सामान्य करने में जुटी हैं।
जलभराव से शहर और ग्रामीण इलाकों में परेशानी
लगातार बारिश से गोंडा शहर के कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बनी। पटेलनगर ईदगाह मार्केट रोड सहित कुछ इलाकों में पानी जमा होने से राहगीरों और दुकानदारों को परेशानी हुई। निचले क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित हुआ।
ग्रामीण इलाकों में भी खेतों और रास्तों पर पानी भरने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। लगातार बारिश के कारण कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के सामने भी सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।
स्कूलों में भी अवकाश
खराब मौसम और भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनजर गोंडा प्रशासन ने विद्यालयों को बंद रखने का निर्णय लिया। पहले कक्षा एक से आठ तक के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया था और बाद में भारी बारिश की चेतावनी के बीच कक्षा 1 से 12 तक के विद्यालयों को बंद रखने की जानकारी सामने आई।
इस निर्णय का उद्देश्य बच्चों को जलभराव, बिजली के टूटे तारों, पेड़ गिरने और खराब मौसम से जुड़े अन्य जोखिमों से दूर रखना है।
प्रशासन ने जारी की सतर्कता
उत्तर प्रदेश सरकार ने लगातार बारिश और आंधी को देखते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों के जिलाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। गोंडा को भी रेड अलर्ट वाले जिलों में शामिल किया गया है। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने और राहत व्यवस्था सक्रिय रखने को कहा गया है।
सरकार के स्तर से प्रभावित परिवारों को क्षति के आकलन के बाद अनुमन्य सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य स्तर पर राहत आयुक्त ने भी अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
अचानक बाढ़ की आशंका वाले जिलों में गोंडा भी शामिल
मौसम विभाग और प्रशासन ने भारी बारिश के साथ अचानक बाढ़ की संभावना को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा है। गोंडा को उन जिलों की सूची में शामिल किया गया है जहां अचानक बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में नेपाल क्षेत्र में भारी बारिश की स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती जिलों में नदियों के जलस्तर पर निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे गोंडा सहित आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
अगले 24 घंटे भी महत्वपूर्ण
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 27 सितंबर को भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की संभावना बनी हुई थी। राज्य के कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी दी गई थी।
ऐसे में गोंडा में पहले से हुए नुकसान के बाद अगले चरण की बारिश प्रशासन और आम लोगों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है। खासकर विद्युत लाइनों, पेड़ों, कच्चे मकानों, जलभराव वाले क्षेत्रों और खेतों में खड़ी फसलों को लेकर सतर्कता जरूरी बनी हुई है।
नुकसान का समग्र परिदृश्य
उपलब्ध रिपोर्टों को मिलाकर देखें तो गोंडा में हालिया बारिश और आंधी से नुकसान कई स्तरों पर सामने आया है। दो युवकों की मौत, चार लोगों के घायल होने, 600 से अधिक बिजली खंभों के टूटने, कई दर्जन ट्रांसफार्मरों के क्षतिग्रस्त होने, बड़ी संख्या में पेड़ों के गिरने, बिजली आपूर्ति के व्यापक रूप से बाधित होने और धान-गन्ने की फसलों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि फसलों, मकानों, सड़कों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को हुए कुल आर्थिक नुकसान का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए वास्तविक क्षति का आंकड़ा राजस्व, कृषि, विद्युत और अन्य विभागों के संयुक्त सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगा।
गोंडा में बारिश का यह दौर महज जलभराव या बिजली संकट तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, आवागमन और जनसुरक्षा को एक साथ प्रभावित किया है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती क्षतिग्रस्त बिजली व्यवस्था को शीघ्र सामान्य करना, रास्तों से गिरे पेड़ों को हटाना, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और किसानों की फसलों की वास्तविक क्षति का आकलन करना है।













