16 अक्टूबर 2026 9:50 अपराह्न

सिविल जज बनने का गुरुमंत्र, जस्टिस सुभाष चन्द ने छात्रों को दिया मार्गदर्शन

देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के विधि सेमिनार में जस्टिस सुभाष चन्द और अतिथियों के साथ रिपोर्टर दुर्गा प्रसाद शुक्ला की तस्वीर

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

The specified slider id does not exist.

दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में आयोजित विधि सेमिनार में झारखंड हाईकोर्ट के निवर्तमान न्यायाधीश जस्टिस सुभाष चन्द ने विधि के विद्यार्थियों को न्यायपालिका की भूमिका, संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों और न्यायिक सेवा में सफलता हासिल करने के लिए आवश्यक तैयारियों के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए न्यायमूर्ति ने विद्यार्थियों को कानून की गहरी समझ विकसित करने, न्यायिक निर्णयों का अध्ययन करने तथा मेहनत और अनुशासन के साथ अपने भविष्य का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया।

सेमिनार के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका कानून की व्याख्या करने वाली सर्वोच्च संस्थागत व्यवस्था है। अदालतों के निर्णयों के माध्यम से कानून की व्याख्या समय-समय पर विकसित होती रहती है और नए न्यायिक दृष्टांत विधि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि कानून की पढ़ाई केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसके व्यावहारिक, संवैधानिक और सामाजिक पक्षों को समझना भी विधि के विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है।

न्यायपालिका कानून की व्याख्या और न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण संस्था

विधि सेमिनार को संबोधित करते हुए जस्टिस सुभाष चन्द ने न्यायपालिका की संवैधानिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अदालतें कानून की व्याख्या करती हैं और समय-समय पर दिए जाने वाले निर्णयों के माध्यम से विधि के सिद्धांतों को स्पष्ट किया जाता है। न्यायिक व्यवस्था में निर्णयों और नजीरों का अध्ययन करने से कानून के विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलती है कि विभिन्न परिस्थितियों में संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी नियमों को किस प्रकार लागू किया जाता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को न्यायपालिका के प्रति गंभीर दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। न्यायिक सेवा में प्रवेश की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए कानून की मूल अवधारणाओं, संविधान, न्यायिक निर्णयों और तर्कपूर्ण लेखन का ज्ञान महत्वपूर्ण है। सिविल जज बनने के इच्छुक विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ अपनी विश्लेषण क्षमता और न्यायिक सोच को विकसित करने पर भी ध्यान देना चाहिए।

जस्टिस सुभाष चन्द का यह मार्गदर्शन विधि विभाग के विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि न्यायिक सेवा में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को परीक्षा की तैयारी के साथ न्याय व्यवस्था की व्यापक समझ की आवश्यकता होती है।

मानवाधिकारों पर व्याख्यान, प्रतिष्ठा समानता और स्वतंत्रता के महत्व को किया रेखांकित

सेमिनार में जस्टिस सुभाष चन्द ने मानवाधिकारों के विषय पर भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने प्रतिष्ठा, समानता और स्वतंत्रता जैसे मूलभूत अधिकारों के महत्व को समझाया। उनके अनुसार, ये अधिकार प्रत्येक व्यक्ति के सम्मानजनक जीवन और उसके शारीरिक, मानसिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक हैं।

मानवाधिकारों की चर्चा करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों का ध्यान संविधान की उस भावना की ओर आकर्षित किया, जिसमें प्रत्येक नागरिक की गरिमा और समानता को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। कानून का उद्देश्य केवल विवादों का निपटारा करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के अधिकारों और समाज में न्यायपूर्ण व्यवस्था की रक्षा करना भी है।

उन्होंने छात्रों को यह समझने के लिए प्रेरित किया कि विधि का अध्ययन मानव जीवन और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ विषय है। नागरिकों के अधिकारों, स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका को समझना कानून के विद्यार्थियों की शैक्षिक और व्यावसायिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मानवाधिकारों से संबंधित विषयों का अध्ययन विद्यार्थियों को संविधान के मूल सिद्धांतों, नागरिक स्वतंत्रताओं और न्यायिक संरक्षण की अवधारणाओं को समझने में मदद करता है। इस प्रकार के व्याख्यान छात्रों को कानून के सामाजिक प्रभावों पर विचार करने का अवसर प्रदान करते हैं।

दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ

देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में आयोजित विधि सेमिनार का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना के साथ किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजय कुमार, प्रतिकुलपति प्रोफेसर ऋतिका मेहरा, विधि विभाग के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित तथा मुख्य अतिथि जस्टिस सुभाष चन्द उपस्थित रहे।

दीप प्रज्वलन के माध्यम से कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन और विधि विभाग से जुड़े शिक्षकों ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। सेमिनार का उद्देश्य विधि के विद्यार्थियों को न्यायिक क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तित्व से मार्गदर्शन दिलाना तथा कानून के अध्ययन को व्यावहारिक दृष्टिकोण से जोड़ना रहा।

ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अपने विषय से संबंधित विशेषज्ञों के विचार सुनने और न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर देते हैं। विधि शिक्षा के क्षेत्र में सेमिनार, व्याख्यान और संवाद आधारित कार्यक्रम छात्रों के ज्ञान को व्यापक बनाने में सहायक हो सकते हैं।

प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने जस्टिस सुभाष चन्द के न्यायिक सफर का किया उल्लेख

मुख्य अतिथि जस्टिस सुभाष चन्द का स्वागत करते हुए विधि विभाग के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने उनके न्यायिक जीवन और संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति ने स्वयं न्यायपालिका में रहते हुए अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय का सहारा लिया और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें तथा कई अन्य परिवादियों को न्याय प्राप्त हुआ।

प्रोफेसर दीक्षित ने जस्टिस सुभाष चन्द के जीवन संघर्ष और उपलब्धियों को विद्यार्थियों के सामने प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति एक सामान्य परिवार से आने वाले विधि के विद्यार्थी रहे हैं और अपनी मेहनत के बल पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति के पद तक पहुंचे।

इस संबोधन के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि विधि के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए निरंतर परिश्रम, अध्ययन और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अनुभवी न्यायाधीश के जीवन अनुभव और पेशेवर यात्रा से सीखने का अवसर विशेष महत्व रखता है।

हालांकि, किसी भी न्यायिक या व्यावसायिक पद तक पहुंचने के लिए निर्धारित योग्यताओं, चयन प्रक्रिया और संस्थागत नियमों का पालन आवश्यक होता है। विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा के साथ-साथ इन प्रक्रियाओं की वास्तविक समझ भी उपयोगी रहती है।

प्रतियोगिताओं के विजेता विधि विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर बढ़ाया उत्साह

विधि सेमिनार के दौरान जस्टिस सुभाष चन्द ने विश्वविद्यालय में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहे विधि विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इन विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था।

मुख्य अतिथि द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाने से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा। शैक्षणिक संस्थानों में प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों को अपनी प्रतिभा, तर्क क्षमता, प्रस्तुतीकरण कौशल और विषयगत ज्ञान को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। विधि के विद्यार्थियों के लिए वाद-विवाद, मूट कोर्ट, लेखन और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां कानून की व्यावहारिक समझ विकसित करने में उपयोगी हो सकती हैं।

जस्टिस सुभाष चन्द ने विद्यार्थियों को आगे चलकर सिविल जज बनने के लक्ष्य के लिए मार्गदर्शन भी दिया। न्यायिक सेवा में जाने के इच्छुक छात्रों के लिए नियमित पढ़ाई, कानूनी प्रावधानों की समझ, न्यायिक निर्णयों का अध्ययन और परीक्षा की व्यवस्थित तैयारी आवश्यक विषयों में शामिल हैं।

सिविल जज बनने की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को अपनी राज्य न्यायिक सेवा परीक्षा की पात्रता, पाठ्यक्रम और चयन प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इसके साथ ही संविधान, दीवानी कानून, दंड कानून और प्रक्रिया संबंधी विषयों का अध्ययन अपनी परीक्षा की आवश्यकताओं के अनुरूप करना महत्वपूर्ण है।

विधि विभाग के शिक्षक और छात्र-छात्राएं रहे मौजूद

सेमिनार में देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ से जुड़े शिक्षक और विधि विभाग के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. गौरव त्यागी, डॉ. वैशाली शर्मा, सुश्री आकांक्षा भट्ट, हिमांशु जखमोला, ऐश्वर्य गौरव, डॉ. विनोद जोशी, इशिका, डॉ. राजन हांडा और सुश्री स्माइल गोयल सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी शामिल हुए।

कार्यक्रम में न्यायपालिका, मानवाधिकार और विधि शिक्षा से जुड़े विषयों पर विद्यार्थियों को जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। विश्वविद्यालय में आयोजित इस प्रकार के सेमिनार छात्रों को कानूनी शिक्षा के व्यापक क्षेत्र से परिचित कराने और भविष्य के व्यावसायिक लक्ष्यों पर विचार करने में सहायक होते हैं।

विधि की शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए न्यायिक क्षेत्र में करियर बनाने के साथ-साथ अधिवक्ता, विधि शोधकर्ता, शिक्षक और अन्य कानूनी सेवाओं से संबंधित क्षेत्रों में भी अवसर मौजूद होते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से छात्र अपने विषय के विशेषज्ञों से संवाद कर सकते हैं और पेशेवर जीवन की अपेक्षाओं को समझ सकते हैं।

देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में आयोजित यह विधि सेमिनार न्यायपालिका की भूमिका, मानवाधिकारों के महत्व और विधि के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े विषयों पर केंद्रित रहा। जस्टिस सुभाष चन्द के संबोधन और विद्यार्थियों को दिए गए मार्गदर्शन ने कार्यक्रम को शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाया। समारोह में प्रशस्ति पत्र वितरण और शिक्षकों तथा छात्रों की सहभागिता ने विधि शिक्षा से संबंधित इस आयोजन को व्यापक रूप प्रदान किया।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें