संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट। रैपुरा थाना क्षेत्र के भखरवार गांव में ग्राम रोजगार सेवक के साथ कथित मारपीट, जातिसूचक अपशब्दों के इस्तेमाल और जान से मारने की धमकी का मामला सामने आया है। पीड़ित लवकुश पुत्र लोटन, निवासी भखरवार, ने आरोप लगाया है कि 17 सितंबर 2026 की रात पंचायत भवन में आयोजित दीप प्रज्वलन कार्यक्रम से लौटते समय गांव के ही एक व्यक्ति ने उसे रोक लिया और दीप जलाने के बाद सफाई को लेकर विवाद करते हुए उसके साथ मारपीट की। पीड़ित के मुताबिक मारपीट में उसके कान, मुंह और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद पहले उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी हालत और चोटों को देखते हुए जिला चिकित्सालय सोनेपुर, चित्रकूट के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में उसे भर्ती कर उपचार किए जाने की बात शिकायत में कही गई है। पीड़ित के अनुसार वह अभी भी ठीक से बोल नहीं पा रहा है, उसे चक्कर आ रहा है और बाएं कान से सुनाई नहीं दे रहा है।
दीप प्रज्वलन कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ विवाद
शिकायत में लवकुश ने बताया कि वह ग्राम पंचायत भखरवार में ग्राम रोजगार सेवक के पद पर कार्यरत है। 17 सितंबर की शाम वह पंचायत भवन में आयोजित दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में शामिल होने गया था। उसके साथ गांव के कल्लूराम साहू, ग्राम प्रधान, प्रधान का पुत्र सचिन तथा अन्य ग्रामीण भी मौजूद थे।
पीड़ित के अनुसार कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वह घर लौटने के लिए निकला ही था कि रात करीब 8:30 बजे गांव का सिब्बू सिंह पुत्र राजा सिंह उसके पास आया। आरोप है कि उसने दीप जलाए जाने के बाद वहां की सफाई को लेकर सवाल किया। इस पर लवकुश ने कथित तौर पर कहा कि अभी दीपक जल रहे हैं और अगले दिन साफ-सफाई कर दी जाएगी।
शिकायत के अनुसार इसी बात को लेकर बातचीत अचानक विवाद में बदल गई।
जातिसूचक टिप्पणी के बाद मारपीट का आरोप
लवकुश का आरोप है कि जवाब से नाराज होकर सिब्बू सिंह ने उसके साथ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया और उसके साथ हाथापाई शुरू कर दी। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसका गला दबाया, जमीन पर पटक दिया और उसके बाएं कान पर पैर से वार किया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने लगातार लात-घूंसों से मारपीट की, जिससे उसके मुंह से खून निकलने लगा। पीड़ित के अनुसार शरीर के कई हिस्सों में अंदरूनी चोटें भी आई हैं।
घटना की गंभीरता इस बात से भी जुड़ी है कि पीड़ित ने शिकायत में जातिसूचक अपमान के साथ धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बीच-बचाव करने पहुंचे ग्रामीण से मोबाइल और नकदी छीनने का आरोप
शिकायत के मुताबिक घटना के दौरान मौके पर मौजूद कल्लूराम साहू ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया। पीड़ित का आरोप है कि मारपीट कर रहे व्यक्ति ने कल्लूराम साहू के साथ भी गाली-गलौज की और उसका मोबाइल फोन तथा मोबाइल कवर में रखे करीब 2,000 रुपये लेकर वहां से चला गया।
इस आरोप की भी पुलिस जांच के बाद ही पुष्टि हो सकेगी। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो घटना में मारपीट के साथ-साथ धमकी और कथित सामान छीनने से जुड़े पहलुओं की भी जांच आवश्यक होगी।
ग्रामीण ने दूसरी गाड़ी से पहुंचाया अस्पताल
घटना के बाद घायल लवकुश की हालत देखकर गांव के अंजनी पटेल उसे दूसरी गाड़ी से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर लेकर गए। वहां प्राथमिक उपचार किया गया। शिकायत में कहा गया है कि शरीर पर गंभीर चोटों को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए जिला चिकित्सालय सोनेपुर, चित्रकूट भेज दिया।
इसके बाद सरकारी एम्बुलेंस से पीड़ित को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया।
पीड़ित के मुताबिक इलाज के बावजूद उसकी परेशानी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। वह ठीक से बोल नहीं पा रहा है, चक्कर आने की शिकायत है और बाएं कान से सुनाई नहीं देने की बात कही गई है। ऐसे में मेडिकल रिपोर्ट इस पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है।
रैपुरा थाने में शिकायत, कार्रवाई नहीं होने का आरोप
लवकुश ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि उसने घटना को लेकर रैपुरा थाने में शिकायती पत्र दिया है, लेकिन उसके अनुसार अभी तक पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ित फिलहाल जिला अस्पताल में उपचार करा रहा है।
यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। यदि शिकायत पुलिस के पास प्राप्त हो चुकी है तो घटना में लगाए गए आरोपों की जांच, मेडिकल दस्तावेजों का परीक्षण, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से संबंधित तथ्यों की पड़ताल से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
खास तौर पर इस मामले में पीड़ित ने स्वयं को अनुसूचित जाति का बताते हुए जातिसूचक अपमान का आरोप लगाया है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रकृति के अनुरूप लागू कानूनी प्रावधानों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
SC/ST कानून के तहत भी जांच का पहलू महत्वपूर्ण
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ अत्याचार से संबंधित अपराधों के लिए विशेष प्रावधान करता है। कानून में ऐसे मामलों के लिए विशेष न्यायालय और पीड़ितों तथा गवाहों के अधिकारों से संबंधित प्रावधान भी मौजूद हैं।
हालांकि किसी घटना में कौन-सी धाराएं लागू होंगी, यह केवल शिकायत के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। घटना के तथ्य, मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और पुलिस की जांच के आधार पर ही कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
पंचायत भवन से जिला अस्पताल तक पहुंचा मामला
भखरवार की यह घटना केवल दो व्यक्तियों के बीच विवाद का मामला है या इसके पीछे जातिगत अपमान और हिंसा का गंभीर पहलू है, इसका निर्धारण जांच के बाद होगा। लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोपों ने गांव के सामाजिक माहौल और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
एक ओर पीड़ित खुद को ग्राम रोजगार सेवक बताते हुए सरकारी पंचायत व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी के रूप में सामने रखता है, वहीं दूसरी ओर वह आरोप लगा रहा है कि सार्वजनिक कार्यक्रम से लौटते समय उसके साथ मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। शिकायत में ग्राम प्रधान, प्रधान के पुत्र, कल्लूराम साहू तथा अन्य ग्रामीणों के कार्यक्रम में मौजूद होने का उल्लेख किया गया है। यदि इनमें से किसी ने घटना को प्रत्यक्ष देखा है तो उनका बयान जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मेडिकल रिपोर्ट से सामने आएगी चोटों की वास्तविक स्थिति
पीड़ित के बाएं कान से सुनाई नहीं देने और चक्कर आने जैसे दावों की चिकित्सकीय जांच भी इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिला अस्पताल में भर्ती होने और इलाज का रिकॉर्ड घटना के बाद की चिकित्सकीय स्थिति को समझने में मदद कर सकता है।
मेडिकल रिपोर्ट से चोटों की प्रकृति और गंभीरता के संबंध में तथ्य सामने आ सकते हैं। इसके आधार पर पुलिस शिकायत में लगाए गए मारपीट के आरोपों की जांच आगे बढ़ा सकती है।
अब पुलिस कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल पीड़ित का इलाज जिला अस्पताल में चलने की बात सामने आई है और उसके द्वारा रैपुरा थाने में शिकायत दिए जाने का दावा किया गया है। दूसरी ओर, आरोपी पक्ष का बयान और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
मामले में पुलिस की ओर से शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई, कौन-कौन से तथ्य जांच के दायरे में लिए गए और मेडिकल रिपोर्ट में क्या सामने आता है—इन सवालों के जवाब आने के बाद तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
फिलहाल भखरवार गांव की इस घटना ने एक घायल ग्राम रोजगार सेवक की शिकायत के साथ-साथ जातिसूचक अपमान, कथित हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस इस शिकायत की जांच किस तरह आगे बढ़ाती है और पीड़ित के आरोपों की सत्यता जांच में क्या सामने आती है।













