पैसे जमा होते रहे, जच्चा-बच्चा की सांसें थमती रहीं! मौत के बाद परिजनों ने उठाए इलाज पर गंभीर सवाल

जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में इलाज पर गंभीर सवाल उठाते परिजन और रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी

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कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

बंथरा/लखनऊ। राजधानी लखनऊ के बंथरा थाना क्षेत्र स्थित जुनाबगंज में संचालित द साइन हॉस्पिटल में एक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज के नाम पर लगातार धन जमा कराने का दबाव बनाने, मरीज की गंभीर हालत के बावजूद उपचार जारी रखने और समय रहते किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर नहीं करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

परिजनों का कहना है कि प्रसव से पहले ही महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार जच्चा तथा बच्चा दोनों की मौत हो गई। परिवार ने अस्पताल की उपचार व्यवस्था और चिकित्सकीय निर्णयों पर सवाल उठाते हुए घटना के लिए अस्पताल को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, अस्पताल की ओर से मरीज की हालत पहले से गंभीर होने तथा खून और प्लेटलेट्स की कमी की बात परिजनों को बताए जाने का दावा किया गया है।

घटना के बाद मौके पर पहुंची बंथरा पुलिस ने मामले की जानकारी ली और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। पुलिस जांच और उपलब्ध चिकित्सकीय अभिलेखों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उपचार के दौरान अस्पताल की ओर से किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।

प्रसव से पहले बिगड़ी महिला की हालत, जच्चा-बच्चा दोनों की मौत

मिली जानकारी के अनुसार बंथरा क्षेत्र के जुनाबगंज स्थित द साइन हॉस्पिटल में एक गर्भवती महिला को उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। परिवार की उम्मीद थी कि चिकित्सकीय देखरेख में सुरक्षित प्रसव हो जाएगा। लेकिन उपचार के दौरान महिला की स्थिति बिगड़ती चली गई।

परिजनों का आरोप है कि महिला की हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल में उसका इलाज चलता रहा। परिवार के मुताबिक मरीज को आईसीयू में रखा गया और चिकित्सकों द्वारा उपचार किया जाता रहा, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसी दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति भी गंभीर बताई गई और अंततः जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई।

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घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने अस्पताल की उपचार प्रक्रिया और मरीज की गंभीर स्थिति के दौरान उठाए गए कदमों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

पहले जमा कराया पैसा, फिर और धन जमा करने का आरोप

मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज के दौरान पैसे की मांग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने और उपचार शुरू कराने से पहले उनसे धनराशि जमा कराई गई थी। इसके बाद भी उपचार के दौरान उनसे और पैसे जमा कराने के लिए कहा गया।

परिजनों का आरोप है कि जिस समय मरीज की हालत गंभीर थी, उस समय भी अस्पताल की ओर से आर्थिक मांग की जा रही थी। परिवार का कहना है कि उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार अस्पताल में धनराशि जमा कराई, लेकिन इसके बावजूद मरीज की हालत लगातार खराब होती चली गई।

इसी आरोप को लेकर परिजनों ने अस्पताल में धन उगाही किए जाने की बात कही है। हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

आईसीयू में रखा, लेकिन रेफर नहीं करने पर उठे सवाल

परिजनों ने सबसे गंभीर सवाल मरीज को समय रहते दूसरे अस्पताल में रेफर नहीं किए जाने को लेकर उठाया है। परिवार का कहना है कि महिला की हालत लगातार बिगड़ रही थी और उसे आईसीयू में रखकर उपचार किया जा रहा था। इसके बावजूद उसे किसी ऐसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर नहीं किया गया, जहां गंभीर प्रसूति संबंधी जटिलताओं का विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सके।

परिजनों का दावा है कि यदि समय रहते मरीज को किसी बड़े अस्पताल में भेज दिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। इसी आधार पर परिवार ने अस्पताल प्रबंधन और उपचार कर रहे चिकित्सकों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि, किसी मरीज को रेफर करने का चिकित्सकीय निर्णय उसकी वास्तविक स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं, जांच रिपोर्ट और चिकित्सक के आकलन पर निर्भर करता है। इसलिए इस मामले में यह निर्धारित करना जांच का विषय होगा कि महिला को किस समय किस स्तर की चिकित्सा आवश्यकता थी और अस्पताल द्वारा अपनाई गई उपचार प्रक्रिया निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप थी या नहीं।

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अस्पताल प्रबंधन ने बताई मरीज की गंभीर हालत

घटना की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया है। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार मरीज की देखरेख मैनेजिंग डायरेक्टर ओमबीर सिंह, डॉ. राहुल सिंह और डॉ. रिचा सिंह की निगरानी में की जा रही थी।

अस्पताल से जुड़े चिकित्सकों का कहना है कि महिला की स्थिति गंभीर थी और इस संबंध में उसके परिजनों को जानकारी दी गई थी। अस्पताल पक्ष के अनुसार मरीज के शरीर में खून की कमी थी और प्लेटलेट्स की संख्या भी काफी कम थी। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरीज की हालत गंभीर हो सकती है और उपचार के दौरान कई तरह की जटिलताएं सामने आ सकती हैं।

अस्पताल प्रबंधन के इस पक्ष के सामने आने के बाद मामला अब दो अलग-अलग दावों के बीच पहुंच गया है। एक ओर परिवार उपचार में लापरवाही और आर्थिक दबाव का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल मरीज की गंभीर चिकित्सकीय स्थिति को मौत का प्रमुख कारण बता रहा है।

पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

जच्चा-बच्चा की मौत की सूचना के बाद बंथरा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनाक्रम की जानकारी लेने के साथ संबंधित लोगों से पूछताछ की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

अब जांच में महिला की मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल में भर्ती किए जाने का समय, उपचार के दौरान किए गए परीक्षण, आईसीयू में रखे जाने की स्थिति, चिकित्सकीय परामर्श, दवाओं और अन्य उपचार संबंधी दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

इसके साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि अस्पताल में उपचार के दौरान परिजनों से कितनी धनराशि जमा कराई गई और किस मद में भुगतान लिया गया। यदि परिजनों द्वारा लगाए गए आर्थिक अनियमितता के आरोपों की शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज कराई जाती है तो संबंधित दस्तावेज भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।

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जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर

इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में गंभीर मरीजों के उपचार, पारदर्शी बिलिंग और समय पर रेफर किए जाने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी अस्पताल या चिकित्सक को सीधे तौर पर लापरवाही का दोषी ठहराने से पहले निष्पक्ष जांच और चिकित्सकीय तथ्यों का सामने आना जरूरी है।

मृतका के परिजनों के आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसी तरह अस्पताल द्वारा मरीज की गंभीर स्थिति, खून की कमी और प्लेटलेट्स कम होने की जो बात कही गई है, उसकी भी मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच के आधार पर पुष्टि आवश्यक होगी।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों, मेडिकल दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर ही यह तय हो पाएगा कि महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या थे और उपचार के दौरान अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।

परिजनों को जांच से न्याय की उम्मीद

जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिवार सदमे में है। परिजनों का कहना है कि वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज की हालत पहले से गंभीर थी और परिजनों को उसकी स्थिति के बारे में जानकारी दी गई थी। ऐसे में अब सबकी नजर पुलिस जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट पर है।

बंथरा के जुनाबगंज स्थित द साइन हॉस्पिटल में हुई जच्चा-बच्चा की मौत का यह मामला फिलहाल जांच के अधीन है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत की वास्तविक वजह क्या थी और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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Author: यायावर

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