18 अक्टूबर 2026 12:27 पूर्वाह्न

ईद मिलादुन्नबी पर निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी, हिंदू-मुस्लिम एकता और सद्भावना का दिया संदेश

बलरामपुर के ग्राम दुलहापुर बनकट में ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर निकले जुलूस-ए-मोहम्मदी में शामिल ग्रामीण, हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देते हुए।

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

GONDA। जिले के ग्राम दुलहापुर बनकट में ईद मिलादुन्नबी के पावन अवसर पर जुलूस-ए-मोहम्मदी का आयोजन श्रद्धा, उत्साह और सौहार्दपूर्ण वातावरण में किया गया। धार्मिक आस्था से जुड़े इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया तथा आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की। पूरे गांव में प्रेम, शांति और सद्भाव का वातावरण देखने को मिला।

धार्मिक आस्था और उत्साह का संगम

ईद मिलादुन्नबी इस्लाम धर्म के अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय द्वारा विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ग्राम दुलहापुर बनकट में भी इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जुलूस गांव के निर्धारित मार्गों से होकर गुजरा, जहां लोगों ने पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद करते हुए शांति, प्रेम और मानवता का संदेश दिया।

आपसी भाईचारे के साथ निकला जुलूस

जुलूस में शामिल लोगों ने अनुशासन और मर्यादा का परिचय देते हुए धार्मिक नारों के साथ अपने पैगंबर के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। ग्रामीणों ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह इंसानियत, करुणा और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला अवसर भी है। यही कारण है कि गांव के विभिन्न समुदायों के लोग इस आयोजन में शामिल होकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।

हिंदू-मुस्लिम एकता बनी आयोजन की पहचान

गांव के हिंदू समुदाय के लोगों ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता कर सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय दिया। ग्रामीणों का कहना था कि दुलहापुर बनकट में लंबे समय से सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों और सामाजिक आयोजनों में शामिल होते रहे हैं। चाहे कोई धार्मिक पर्व हो या सामाजिक कार्यक्रम, गांव के लोग मिल-जुलकर उसे सफल बनाने में सहयोग करते हैं। जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान भी यही भाईचारा और एकता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं को किया याद

ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने मानवता, समानता, न्याय, करुणा, सहिष्णुता और जरूरतमंदों की सहायता का संदेश दिया था। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान समय में इन शिक्षाओं की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि समाज को शांति और सद्भाव की सबसे अधिक आवश्यकता है।

नई पीढ़ी को मिला सकारात्मक संदेश

आयोजन के दौरान युवाओं और बच्चों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। ग्रामीणों ने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसे आयोजनों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि उनमें सामाजिक जिम्मेदारी, धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सम्मान की भावना विकसित हो सके। जुलूस में दिखाई दिया अनुशासन और सौहार्द युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश लेकर आया।

शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ कार्यक्रम

जुलूस के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। ग्रामीणों ने संयम और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पूरे आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना या विवाद की सूचना नहीं मिली। लोगों ने आपसी सहयोग और समझदारी का परिचय देते हुए कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।

सद्भाव की मिसाल बना दुलहापुर बनकट

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजन समाज में विश्वास और एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं। जब विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं और सामाजिक अवसरों पर साथ खड़े होते हैं, तब समाज में सौहार्द और भाईचारे की भावना और मजबूत होती है। दुलहापुर बनकट में आयोजित जुलूस-ए-मोहम्मदी इसी सामाजिक एकता और सद्भाव का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

मिल-जुलकर आगे बढ़ने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ईद मिलादुन्नबी का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवता के मूल्यों को सशक्त बनाने का माध्यम भी है। इस अवसर पर मोहम्मद जाकिर, शहीद रजा, सादिक, बकरीदी, कासिम, यार मोहम्मद, मकसूद, साबिर, बशीर मोहम्मद, इलियास, मंसूर अली, वली मोहम्मद, अनीश, मुबारक, मौलाना निसार, मौलाना अशफाक, शकीर, तौकीर, वकील, मोहम्मद नईम, हामिद रजा, मासूम रजा, खालिद रजा, वाहिद रजा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने गांव में प्रेम, शांति, आपसी सम्मान और भाईचारे की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया तथा समाज में एकता और सद्भाव का संदेश प्रसारित करने का आह्वान किया।

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