दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
गोंडा: बहराइच के पयागपुर से कांग्रेस के पूर्व विधायक मुकेश कुमार श्रीवास्तव के भाई अजय कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई की है। कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद विजिलेंस की अलग-अलग टीमों ने लखनऊ और गोंडा में अजय कुमार श्रीवास्तव से जुड़े तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान जांच टीम को करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों, निवेश और जमीन से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। प्रारंभिक आकलन में बरामद दस्तावेजों और सामने आई संपत्तियों का मूल्य करीब 28 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
विजिलेंस की जांच में आरोप है कि अजय कुमार श्रीवास्तव ने अपनी ज्ञात आय के मुकाबले 763.65 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की। इसी आधार पर वर्ष 2025 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विजिलेंस के अयोध्या सेक्टर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। अब सर्च वारंट के आधार पर की गई छापेमारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
763.65 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप
विजिलेंस के अनुसार, अजय कुमार श्रीवास्तव की संपत्तियों और उनकी ज्ञात आय के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। जांच में यह दावा किया गया है कि उनकी अर्जित संपत्ति ज्ञात आय की तुलना में 763.65 प्रतिशत अधिक है। इसी असमानता को आधार बनाकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में संपत्ति किन स्रोतों से अर्जित की गई और इसमें किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका रही। जांच अधिकारियों ने संपत्तियों के दस्तावेज, निवेश से संबंधित कागजात और परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड भी जुटाए हैं।
छापेमारी के दौरान सामने आए दस्तावेजों का मिलान अजय कुमार श्रीवास्तव की घोषित आय, बैंक लेन-देन और अन्य वित्तीय स्रोतों से किया जाएगा। इसके बाद ही संपत्तियों और आय के बीच वास्तविक अंतर का अंतिम आकलन किया जा सकेगा।
लखनऊ के होटल में करीब 20 करोड़ रुपये का निवेश
विजिलेंस की कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति लखनऊ के गणेशपुर-रहमानपुर क्षेत्र में स्थित मिलेनिया रिजेन्सी होटल बताई गई है। जांच टीम के अनुसार, यह छह मंजिला होटल है, जिसमें करीब 108 कमरे हैं।
प्रारंभिक जांच में होटल के निर्माण पर लगभग 15 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा होटल की साज-सज्जा पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। इस तरह होटल से संबंधित कुल संपत्ति का अनुमान लगभग 20 करोड़ रुपये लगाया गया है।
विजिलेंस अब यह भी जांच करेगी कि होटल के निर्माण और संचालन में धन का स्रोत क्या था, इसके लिए भुगतान किस माध्यम से किए गए और होटल में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किन लोगों का निवेश है। परिवार के सदस्यों के नाम से जुड़ी कंपनियों और उनके लेन-देन की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।
इंदिरानगर में मकान और निर्माणाधीन इमारत के दस्तावेज
छापेमारी के दौरान लखनऊ के इंदिरानगर क्षेत्र में भी कई संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज विजिलेंस के हाथ लगे। पटेलनगर सेक्टर-8 में तीन मंजिला मकान की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि यह मकान अजय कुमार श्रीवास्तव और उनके भाई की पत्नियों के नाम से संबंधित है।
जांच में इस मकान के निर्माण पर करीब दो करोड़ रुपये और साज-सज्जा पर लगभग 70 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इसके अतिरिक्त करीब 50 लाख रुपये के अन्य निवेश से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
इंदिरानगर के ए-331 में करीब 4,000 वर्गफीट क्षेत्रफल में बन रही तीन मंजिला इमारत भी जांच के दायरे में आई है। प्रारंभिक तौर पर इसकी कीमत लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। यह संपत्ति भी परिवार के नाम से बताई जा रही है।
विजिलेंस अब इन संपत्तियों के खरीद, निर्माण और निवेश के स्रोतों की पड़ताल करेगी। संपत्तियों की मौजूदा कीमत, निर्माण लागत और दस्तावेजों में दर्ज मूल्य के बीच अंतर की भी जांच की जा सकती है।
गोंडा के जानकीनगर स्थित मकान को किया गया सील
छापेमारी के दौरान गोंडा के जानकीनगर स्थित मकान पर भी विजिलेंस की टीम पहुंची। कार्रवाई के समय परिवार के सदस्य मौके पर मौजूद नहीं थे। ऐसे में जांच टीम ने मकान को सील कर दिया।
विजिलेंस के प्रारंभिक आकलन में इस मकान के निर्माण पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। मकान से संबंधित दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों को जांच के दायरे में लिया गया है।
इसके अलावा विजिलेंस को गोंडा के साथ-साथ बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती जिलों में कृषि भूमि से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। इन जमीनों का अनुमानित मूल्य करीब तीन करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
चार जिलों में कृषि भूमि का भी पता चला
जांच में सामने आए जमीन के दस्तावेजों में बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच की कृषि भूमि शामिल है। बलरामपुर में करीब 0.648 हेक्टेयर और 0.657 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख किया गया है। श्रावस्ती में करीब 0.121 हेक्टेयर जमीन के दस्तावेज मिले हैं।
इसके अलावा बहराइच में अलग-अलग गाटों की जमीन से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच टीम के हाथ लगे हैं। विजिलेंस इन सभी जमीनों के स्वामित्व, खरीद की तारीख, खरीद मूल्य और भुगतान के स्रोत की पड़ताल करेगी।
जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि कृषि भूमि सीधे अजय कुमार श्रीवास्तव के नाम है या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदी गई है। यदि जमीन या अन्य संपत्तियों की खरीद के लिए ऐसे धन का इस्तेमाल पाया जाता है, जिसका स्रोत घोषित आय से मेल नहीं खाता, तो जांच में उसका अलग से आकलन किया जा सकता है।
NRHM घोटाले से भी जुड़ा है परिवार का नाम
अजय कुमार श्रीवास्तव का नाम पहले भी चर्चित NRHM घोटाले की जांच से जुड़ चुका है। उनके भाई और बहराइच के पयागपुर से कांग्रेस के पूर्व विधायक मुकेश कुमार श्रीवास्तव को इस मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया था।
वहीं, अजय कुमार श्रीवास्तव उस समय CMO कार्यालय में लिपिक के पद पर कार्यरत थे और उन्हें भी NRHM घोटाले में आरोपी बनाया गया था। इसी पृष्ठभूमि में अब आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आने के बाद विजिलेंस की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, किसी भी संपत्ति या निवेश का अंतिम कानूनी स्वरूप जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल विजिलेंस द्वारा बरामद दस्तावेजों और प्रारंभिक मूल्यांकन के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
परिवार के नाम चल रही कंपनियां भी जांच के घेरे में
विजिलेंस ने संकेत दिया है कि जांच केवल सामने आई अचल संपत्तियों तक सीमित नहीं रहेगी। परिवार के सदस्यों के नाम पर चल रही कंपनियों, उनके बैंक खातों, कारोबारी लेन-देन और निवेश की भी अलग से पड़ताल की जाएगी।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि इन कंपनियों में पूंजी कहां से आई, संपत्तियों की खरीद या निर्माण में कंपनी के धन का इस्तेमाल हुआ या नहीं और परिवार के सदस्यों के बीच वित्तीय लेन-देन का स्वरूप क्या रहा।
यदि जांच में किसी संपत्ति या निवेश का संबंध कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित धन से पाया जाता है, तो उसे मामले की विवेचना में शामिल किया जा सकता है।
28 करोड़ की संपत्ति का प्रारंभिक आकलन
विजिलेंस के अनुसार, छापेमारी में मिले दस्तावेजों और सामने आई संपत्तियों के आधार पर फिलहाल करीब 28 करोड़ रुपये की अननुपातिक संपत्ति का प्रारंभिक आकलन किया गया है। इसमें लखनऊ का होटल, आवासीय भवन, निर्माणाधीन संपत्ति, कृषि भूमि और अन्य निवेश शामिल हैं।
हालांकि, यह राशि जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं है। दस्तावेजों की जांच, संपत्तियों के मूल्यांकन और आय के स्रोतों का मिलान होने के बाद वास्तविक आंकड़ा कम या अधिक हो सकता है।
इस कार्रवाई के बाद अब विजिलेंस की जांच का अगला चरण संपत्तियों के वित्तीय स्रोतों और लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने पर केंद्रित रहने की संभावना है। खास तौर पर परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद कंपनियों और निवेशों की जांच से इस मामले में और तथ्य सामने आ सकते हैं।
जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में केवल संपत्ति का बड़ा होना ही निर्णायक नहीं होता, बल्कि उसकी तुलना संबंधित व्यक्ति की वैध और ज्ञात आय से की जाती है। इसी आधार पर विजिलेंस अजय कुमार श्रीवास्तव की संपत्तियों और आय का मिलान कर रही है।
फिलहाल सामने आए दस्तावेजों के आधार पर विजिलेंस ने करीब 28 करोड़ रुपये की संपत्ति का प्रारंभिक आकलन किया है और आय के स्रोतों की जांच शुरू कर दी है। आगे की कार्रवाई दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच के परिणाम पर निर्भर करेगी।
लखनऊ और गोंडा में हुई इस संयुक्त कार्रवाई ने पूर्व विधायक के परिवार से जुड़े पुराने मामलों के साथ-साथ कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले को भी फिर चर्चा में ला दिया है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सामने आई संपत्तियों और निवेशों के लिए धन का वास्तविक स्रोत क्या था और इनका संबंध अजय कुमार श्रीवास्तव की ज्ञात आय से किस स्तर तक है।













