20 अक्टूबर 2026 4:50 अपराह्न

दो बकरी और टंकी बनवाने का लालच देकर धर्मांतरण का चल रहा था गजब का खेल

मोहनलालगंज में कथित धर्मांतरण मामले से जुड़ी प्रार्थना सभा, धार्मिक सामग्री और रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की तस्वीर वाली समाचार फीचर इमेज

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रिपोर्ट: ठाकुर बख्श सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के खिलाफ सरकार और पुलिस की सख्ती के बीच राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इलाके में हलचल पैदा कर दी है। मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के रायपुर भदेशवा गांव में रविवार को एक मकान में चल रही प्रार्थना सभा को लेकर बजरंग दल और श्री राम सनातन सेवा समिति के कार्यकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए। हिंदू संगठनों का दावा है कि यहां गरीब और जरूरतमंद ग्रामीणों को कथित तौर पर आर्थिक तथा घरेलू सुविधाओं का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

मामले की जानकारी मिलने के बाद संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तो वहां हंगामा शुरू हो गया। सूचना मिलने पर मोहनलालगंज पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को संभालते हुए वहां मौजूद लोगों को थाने ले आई। पुलिस ने पूछताछ के लिए एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसकी पहचान चंद्रिका प्रसाद के रूप में बताई गई है।

हालांकि, पूरे मामले में पुलिस का पक्ष हिंदू संगठनों के आरोपों से अलग है। पुलिस के मुताबिक मौके पर मौजूद लोगों ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि वे अपनी इच्छा से प्रार्थना सभा में शामिल हुए थे। पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी कथित पीड़ित की ओर से लिखित शिकायत नहीं मिली है। ऐसे में मामले की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण का आरोप

रविवार दोपहर रायपुर भदेशवा गांव में उस समय माहौल गरमा गया, जब बजरंग दल और श्री राम सनातन सेवा समिति से जुड़े कार्यकर्ता एक मकान में पहुंचे। संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक उन्हें सूचना मिली थी कि मकान में लंबे समय से प्रार्थना सभा के नाम पर गतिविधियां संचालित हो रही हैं और ग्रामीणों को कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित किया जा रहा है।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वहां आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उनकी जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया जाता था। इसी क्रम में कथित तौर पर दो बकरियां देने और घर में पानी की टंकी बनवाने जैसे प्रलोभनों का उल्लेख सामने आया।

इन्हीं आरोपों को लेकर मौके पर मौजूद लोगों और संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच बहस हुई और देखते ही देखते वहां हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।

डायरी में कथित प्रलोभनों का जिक्र होने का दावा

हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों का दावा है कि मकान में तलाशी के दौरान एक डायरी और कुछ धार्मिक पुस्तकें मिलीं। संगठन के अनुसार, डायरी में ग्रामीणों को कथित तौर पर विभिन्न सुविधाएं देने से संबंधित बातें दर्ज थीं।

बताया गया कि डायरी में दो बकरियां देने, घर में पानी की टंकी बनवाने सहित अन्य तरह के कथित लाभ का उल्लेख था। संगठन का आरोप है कि ऐसे प्रलोभनों के जरिए जरूरतमंद परिवारों को प्रभावित करने और उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही थी।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। डायरी में लिखी गई बातों का वास्तविक संदर्भ क्या है और उनका किसी कथित धर्मांतरण गतिविधि से कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पादरी पर हिंदू नाम से लोगों को भ्रमित करने का आरोप

संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रार्थना सभा संचालित करने वाले व्यक्ति पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर हिंदू नाम का इस्तेमाल कर ग्रामीणों के बीच अपनी पहचान बनाई और इसी के जरिए लोगों को प्रभावित करने का प्रयास किया।

मौके से पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान दौधन खेड़ा बरौली खलीलाबाद निवासी चंद्रिका प्रसाद के रूप में बताई गई है। हिंदू संगठनों ने उसे पादरी बताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, पुलिस की ओर से अभी यह पुष्टि नहीं की गई है कि संबंधित व्यक्ति ने वास्तव में कानून का उल्लंघन करते हुए किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराया या उसके लिए दबाव अथवा प्रलोभन का इस्तेमाल किया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।

थाने पहुंचकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग

घटना के बाद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मोहनलालगंज थाने पहुंचे। उन्होंने पूरे प्रकरण में मुकदमा दर्ज करने और मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की।

संगठन के पदाधिकारियों का आरोप है कि पुलिस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय यह कहकर कार्रवाई से बच रही है कि संगठन की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर सीधे मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार पुलिस का कहना है कि किसी कथित पीड़ित व्यक्ति को सामने आकर शिकायत करनी होगी।

पुलिस के इस कथित रुख को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखाई दी। संगठन ने कहा कि यदि मौके पर कथित प्रलोभन से संबंधित सामग्री मिली है तो पुलिस को उसकी जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।

2009-10 से प्रार्थना सभा संचालित होने की बात

मामले में मोहनलालगंज थाना प्रभारी ने पुलिस का पक्ष रखते हुए बताया कि जिस स्थान पर रविवार को हंगामा हुआ, वहां लंबे समय से प्रार्थना सभा आयोजित होने की जानकारी है। पुलिस के अनुसार वहां वर्ष 2009-10 से चर्च अथवा प्रार्थना स्थल संचालित होने की बात सामने आई है।

थाना प्रभारी के मुताबिक घटना के समय मौके पर चार-पांच लोग मौजूद थे और वे प्रार्थना कर रहे थे। पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से प्रारंभिक पूछताछ की। पूछताछ में लोगों ने बताया कि वे अपनी इच्छा से प्रार्थना सभा में शामिल होने आए थे।

पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी ऐसे व्यक्ति ने लिखित शिकायत नहीं दी है, जिसने यह आरोप लगाया हो कि उसे जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया अथवा किसी प्रलोभन के जरिए धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया गया।

आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस कर रही जांच

रविवार की घटना के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की वास्तविकता का पता लगाना है। एक ओर हिंदू संगठन कथित धर्मांतरण और प्रलोभन का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों ने स्वेच्छा से वहां आने की बात कही है।

ऐसे में जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि क्या किसी व्यक्ति को वास्तव में धर्म परिवर्तन के लिए आर्थिक लाभ, घरेलू सुविधा या अन्य किसी प्रकार का प्रलोभन दिया गया था। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि कथित डायरी में दर्ज बातों का संदर्भ क्या है और क्या उसका किसी अवैध गतिविधि से संबंध है।

पुलिस मौके पर मौजूद लोगों के बयान, उपलब्ध सामग्री और शिकायत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। यदि जांच में कानून का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

मोहनलालगंज में धर्मांतरण के आरोपों से फिर गरमाया माहौल

मोहनलालगंज क्षेत्र में धर्मांतरण और कथित प्रलोभन से जुड़े आरोप पहले भी चर्चा में आते रहे हैं। भदेशवा गांव की रविवार की घटना ने इस संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है।

हिंदू संगठनों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को किसी भी प्रकार के प्रलोभन के जरिए प्रभावित किए जाने की शिकायतों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। संगठन ने मांग की है कि यदि ग्रामीणों को बकरियां, पानी की टंकी या अन्य सुविधाओं का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था तो इसके पीछे काम कर रहे लोगों का पता लगाया जाए।

वहीं, पुलिस के लिए यह जरूरी है कि धार्मिक गतिविधि और अवैध धर्मांतरण के आरोप के बीच कानूनी अंतर को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच की जाए। किसी भी आरोप की पुष्टि साक्ष्यों और शिकायतों के आधार पर ही की जानी चाहिए।

पुलिस जांच के बाद खुलेगा पूरे मामले का राज

भदेशवा गांव में सामने आए इस विवाद में फिलहाल आरोपों की जांच जारी है। पुलिस ने संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। मौके पर मौजूद लोगों से भी जानकारी ली गई है। हिंदू संगठनों की ओर से कथित प्रलोभन और धर्मांतरण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन अभी इन आरोपों की पुलिस जांच पूरी नहीं हुई है।

सबसे अहम सवाल यही है कि क्या वास्तव में दो बकरी और घर में पानी की टंकी बनवाने जैसे कथित प्रलोभनों के जरिए ग्रामीणों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित किया जा रहा था, या फिर प्रार्थना सभा को लेकर लगाए गए आरोप जांच में अलग रूप लेते हैं।

फिलहाल पुलिस ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच का रास्ता अपनाया है। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में कोई आपत्तिजनक या गैरकानूनी गतिविधि सामने आती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर हिंदू संगठनों ने मामले की गहराई से जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

अब पूरे मामले में पुलिस की जांच और सामने आने वाले साक्ष्य ही यह तय करेंगे कि भदेशवा गांव में रविवार को सामने आया विवाद महज एक प्रार्थना सभा को लेकर हुआ हंगामा था या इसके पीछे वास्तव में कथित प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण का कोई संगठित प्रयास चल रहा था।

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