ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक दल जहां अपनी-अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, वहीं केंद्रीय मंत्री और अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने गठबंधन को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। बहराइच में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन से उन्होंने साफ घोषणा की कि अपना दल (एस) आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ मिलकर ही लड़ेगा।
उनके इस बयान को यूपी चुनाव से पहले एनडीए के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनकी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सीटों के बंटवारे को लेकर फैसला गठबंधन स्तर पर बाद में किया जाएगा।
बहराइच से कार्यकर्ताओं में भरा चुनावी जोश
रविवार दोपहर बहराइच में आयोजित विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में अनुप्रिया पटेल का जोरदार स्वागत किया गया। मंच से उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव की जीत बूथ स्तर की मजबूती पर निर्भर करती है, इसलिए प्रत्येक कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने का संकल्प ले।
उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को घर-घर तक पहुंचाना प्रत्येक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। यदि संगठन बूथ स्तर तक मजबूत होगा तो एनडीए एक बार फिर प्रदेश में मजबूत सरकार बनाने में सफल होगा।
एनडीए के साथ ही मैदान में उतरेगा अपना दल (एस)
गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए अनुप्रिया पटेल ने दो टूक कहा कि अपना दल (एस) एनडीए का अभिन्न सहयोगी है और आगामी विधानसभा चुनाव भी गठबंधन के साथ मिलकर ही लड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार में रहते हुए उनकी पार्टी ने हमेशा पिछड़े, दलित, गरीब और वंचित समाज की आवाज को मजबूती से उठाया है और आगे भी यही प्राथमिकता रहेगी।
हालांकि सीटों की संख्या को लेकर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि समय आने पर गठबंधन के सभी सहयोगी दल मिलकर इस पर निर्णय लेंगे।
जातीय जनगणना पर केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने जातीय जनगणना के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यह उनकी पार्टी की वर्षों पुरानी प्रमुख मांग थी। केंद्र सरकार द्वारा इस दिशा में उठाया गया कदम सामाजिक न्याय को मजबूत करने वाला निर्णय है।
उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना से विभिन्न वर्गों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति सामने आएगी, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक और अधिक प्रभावी तरीके से पहुंच सकेगा।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर क्या बोलीं?
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले पर भी अनुप्रिया पटेल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
पप्पू यादव के विरोध प्रदर्शन पर दी प्रतिक्रिया
सांसद पप्पू यादव के हालिया विरोध प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर अनुप्रिया पटेल ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना सभी का अधिकार है। लेकिन विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे किसी धर्म, समाज या समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का पालन भी उतना ही जरूरी है।
पेपर लीक पर सख्त कानून का जिक्र
प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह केवल उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि पूरे देश की गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार ने कड़े कानून बनाए हैं और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
सम्मेलन में मौजूद रहे कई प्रमुख नेता
कार्यकर्ता सम्मेलन में नानपारा के विधायक राम निवास वर्मा, जिलाध्यक्ष गिरीश पटेल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अनुप्रिया पटेल का यह बयान कई मायनों में अहम माना जा रहा है। इससे साफ संकेत मिला है कि एनडीए के सहयोगी दल चुनाव से पहले एकजुटता का संदेश देना चाहते हैं। अब राजनीतिक हलकों की नजर सीटों के बंटवारे और एनडीए की संयुक्त चुनावी रणनीति पर टिकी हुई है। आने वाले महीनों में गठबंधन की तैयारियां और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया यूपी की चुनावी राजनीति को नई दिशा दे सकती है।













