21 अक्टूबर 2026 12:33 पूर्वाह्न

फॉलोअर्स की दौड़ में रचा गया ‘तीन बहनों की एक दूल्हे से शादी’ का ड्रामा, CWC के सामने खुली पूरी सच्चाई

अमरोहा में सोशल मीडिया पर वायरल तीन बहनों और एक युवक की कथित शादी प्रकरण में CWC के समक्ष पूछताछ और रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की फीचर इमेज।

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ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

अमरोहा में सोशल मीडिया पर वायरल हुई कथित शादी की कहानी जांच के बाद निकली महज प्रैंक। बाल कल्याण समिति के सामने तीनों बहनों ने स्वीकार किया कि फॉलोअर्स और लोकप्रियता बढ़ाने के लिए पूरा घटनाक्रम रचा गया था।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बनी तीन सगी बहनों और एक युवक की कथित शादी की कहानी आखिरकार झूठी साबित हुई। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए इस मामले ने लोगों को हैरान कर दिया था। एक वीडियो में एक युवक तीनों बहनों की मांग में सिंदूर भरता दिखाई दिया था, जिसके बाद यह दावा किया गया कि तीनों ने अपनी मर्जी से उसी युवक से विवाह कर लिया है।

हालांकि, अब इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ गई है। बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश होकर तीनों बहनों ने लिखित और मौखिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने कोई विवाह नहीं किया था। उनका कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम केवल सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने और फॉलोअर्स बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया एक प्रैंक था।

चार घंटे तक चली पूछताछ, बहनों ने स्वीकार की गलती

सोमवार को तीनों बहनें अपने माता-पिता, भाई और वीडियो में दिखाई देने वाले युवक के साथ बाल कल्याण समिति कार्यालय पहुंचीं। समिति के अध्यक्ष अतुलेश भारद्वाज और अन्य सदस्यों ने करीब चार घंटे तक पूरे मामले की विस्तार से पूछताछ की।

पूछताछ के दौरान तीनों बहनों ने स्पष्ट रूप से माना कि उन्होंने किसी प्रकार का विवाह नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में उन्हें सच्चाई सामने रख देनी चाहिए थी, लेकिन सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ते विवाद, ट्रोलिंग और लोगों की प्रतिक्रियाओं के कारण वे लगातार उसी झूठ को दोहराती रहीं।

उनके अनुसार, हालात ऐसे बन गए कि सच्चाई बताने का साहस नहीं जुटा सकीं और मामला लगातार गंभीर होता चला गया।

वायरल वीडियो से शुरू हुआ पूरा विवाद

पूरा मामला हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव धौरिया से जुड़ा है। यहां रहने वाली अलका, देविका और संतोष उर्फ छवि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो बनाती हैं। उनके वीडियो शूट करने का काम श्यामपुरी गांव निवासी विकास उर्फ विक्की करता है, जो उनके साथ कैमरामैन के रूप में जुड़ा हुआ है।

करीब 17 जुलाई को एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें विकास तीनों बहनों की मांग में सिंदूर भरता दिखाई दिया। वीडियो वायरल होते ही यह दावा किया जाने लगा कि तीनों बहनों ने एक ही युवक से शादी कर ली है।

जब पुलिस ने प्रारंभिक स्तर पर पूछताछ की, तब भी तीनों बहनों ने यही कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से विवाह किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने युवक के साथ रहने की जिद भी की और अलग किए जाने पर आत्महत्या जैसी चेतावनी तक दे डाली थी। इन बयानों के कारण मामला और अधिक संवेदनशील बन गया।

नाबालिग बहन की उम्र ने बदल दी जांच की दिशा

इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब सबसे छोटी बहन संतोष उर्फ छवि की हाईस्कूल की मार्कशीट सामने आई। दस्तावेज में उसकी जन्मतिथि वर्ष 2011 दर्ज मिली, जिससे उसके नाबालिग होने की बात स्पष्ट हो गई।

नाबालिग के सामने आने के बाद बाल कल्याण समिति ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया और 24 जुलाई को संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। इसके बाद तीनों बहनें और वीडियो में दिखाई देने वाला युवक अमरोहा छोड़कर हरिद्वार चले गए।

बताया गया कि वहां रहते हुए भी वे लगातार सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करते रहे, जिससे मामले को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ती गई।

सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाने के लिए रचा गया पूरा ड्रामा

पूछताछ के दौरान सबसे बड़ी बहन अलका ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर अन्य कंटेंट क्रिएटर्स को देखकर इस तरह का प्रैंक करने की योजना बनाई थी। उनका उद्देश्य लोगों का ध्यान आकर्षित करना और अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहुंच बढ़ाना था।

उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले से ही एक ‘बिहाइंड द सीन’ वीडियो भी रिकॉर्ड कर रखा था, ताकि बाद में यह साबित किया जा सके कि पूरा घटनाक्रम केवल मनोरंजन के लिए बनाया गया था। लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद मामला इतना बढ़ गया कि वे सच्चाई सामने लाने से डर गईं।

दूसरी बहन देविका ने भी स्वीकार किया कि इस पूरे विवाद का सीधा असर उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पड़ा। उनके अनुसार, इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स करीब साढ़े चार लाख से बढ़कर पांच लाख तक पहुंच गए। वहीं, उनके यूट्यूब चैनल पर भी हजारों लोग जुड़ गए।

बाल कल्याण समिति ने क्या कहा?

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अतुलेश भारद्वाज ने बताया कि तीनों बहनों ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने कोई विवाह नहीं किया था। पूरा मामला सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और फॉलोअर्स बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया एक प्रैंक था।

उन्होंने कहा कि समिति ने सभी आवश्यक दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद उन्हें उनके परिजनों के साथ घर भेज दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि मामले के अन्य कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की जांच अभी जारी है।

सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने की बढ़ती प्रवृत्ति

यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने की होड़ किस हद तक पहुंच चुकी है। अधिक व्यूज़, लाइक्स और फॉलोअर्स हासिल करने के लिए कई लोग ऐसे वीडियो तैयार कर रहे हैं, जो समाज में भ्रम फैलाते हैं और प्रशासनिक तंत्र को भी अनावश्यक रूप से सक्रिय होने पर मजबूर कर देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कंटेंट क्रिएटर्स को जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। केवल डिजिटल लोकप्रियता हासिल करने के लिए झूठी कहानियां गढ़ना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कई बार इसके कानूनी परिणाम भी सामने आ सकते हैं।

अमरोहा का यह मामला सोशल मीडिया के दौर की एक महत्वपूर्ण सीख बनकर सामने आया है। तीन बहनों और एक युवक की कथित शादी की कहानी, जिसने पूरे प्रदेश में चर्चा बटोरी, अंततः एक सुनियोजित प्रैंक निकली। हालांकि इस ड्रामे से उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स जरूर बढ़ गए, लेकिन उन्हें बाल कल्याण समिति और प्रशासनिक जांच का भी सामना करना पड़ा।

यह घटना बताती है कि डिजिटल दुनिया में लोकप्रियता क्षणिक हो सकती है, लेकिन झूठे और भ्रामक कंटेंट के परिणाम लंबे समय तक व्यक्ति की विश्वसनीयता और कानूनी स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करना ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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