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पंजाब में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी, सरकार के आश्वासन पर नहीं माने कर्मचारी ; फॉल्ट ठीक होने में बढ़ी मुश्किल

लिखित समझौते की मांग पर अड़े बिजली कर्मचारी, 27 जुलाई तक बढ़ा आंदोलन; ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और शिकायत निवारण पर सबसे ज्यादा असर

विकास की रिपोर्ट

पंजाब। पंजाब में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल अब केवल कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच वेतन, सेवा शर्तों तथा नियमितीकरण का विवाद नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा असर बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगा है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के तकनीकी कर्मचारियों का आंदोलन पांचवें दिन भी जारी है। सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच करीब छह घंटे चली मैराथन बैठक के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। उनकी मांग है कि सरकार और प्रबंधन लिखित रूप में समझौता करें।

PSPCL की ओर से जारी आधिकारिक अपडेट में भी 21 जुलाई से 26 जुलाई तक PSEB Employees Joint Forum, Bijli Mulazam Ekta Manch और अन्य यूनियनों के धरने/हड़ताल संबंधी आदेश दर्ज हैं। वहीं ताजा घटनाक्रम में कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन को 27 जुलाई तक बढ़ाने का फैसला किया है।

छह घंटे की बैठक के बाद भी नहीं टूटा गतिरोध

पंजाब के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत हुई। सरकार की ओर से कर्मचारियों को उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन यूनियनों ने इसे पर्याप्त नहीं माना। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि पिछले करीब छह महीने से सरकार के साथ बातचीत चल रही है और उन्हें बार-बार मौखिक आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन मांगों पर ठोस लिखित कार्रवाई नहीं हुई।

इसी वजह से इस बार कर्मचारी संगठन लिखित आश्वासन से कम पर आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं। बातचीत विफल होने के बाद हड़ताल आगे बढ़ने से बिजली वितरण व्यवस्था पर दबाव और बढ़ गया है।

‘समान काम, समान वेतन’ बना बड़ा मुद्दा

तकनीकी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू करना शामिल है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि PSPCL में एक जैसा तकनीकी काम करने वाले कर्मचारियों को उनके रोजगार की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग वेतन मिलता है।

आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग भी आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूनियन नेताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से नियमित कर्मचारियों के समान काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें वेतन और सेवा सुरक्षा के मामले में समान लाभ नहीं मिल रहे हैं।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिजली वितरण व्यवस्था में लाइनमैन, असिस्टेंट लाइनमैन और अन्य फील्ड कर्मचारी सीधे उपभोक्ताओं की शिकायतों तथा बिजली फॉल्ट को दूर करने का काम करते हैं। इन कर्मचारियों की अनुपस्थिति का प्रभाव सीधे बिजली बहाली की गति पर पड़ता है।

CHB कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल, फील्ड स्टाफ की कमी और गहराई

हड़ताल के बीच Complaints Handling Bikes यानी CHB कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होने से PSPCL की मुश्किल और बढ़ गई है। ये कर्मचारी संविदा पर लाइनमैन के रूप में काम करते हैं और बिजली फॉल्ट को मौके पर पहुंचकर ठीक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

25 जुलाई की दोपहर से CHB कर्मचारियों ने भी राज्यव्यापी हड़ताल शुरू कर दी। इससे पहले नियमित लाइनमैन और अन्य फील्ड कर्मचारी 22 जुलाई से सामूहिक अवकाश आंदोलन में शामिल थे। अब दोनों स्तरों पर तकनीकी मानवबल कम होने से बिजली फॉल्ट और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे की क्षमता प्रभावित हुई है।

जालंधर क्षेत्र से सामने आई जानकारी के अनुसार उत्तर क्षेत्र में जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर और नवांशहर को मिलाकर करीब 1,905 CHB कर्मचारी आंदोलन में शामिल हुए हैं। इसके अलावा नोडल शिकायत केंद्रों और सुविधा केंद्रों पर काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है।

1912 हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का निपटारा प्रभावित

बिजली उपभोक्ताओं के लिए सबसे गंभीर चिंता शिकायतों के निपटारे को लेकर है। कई इलाकों में 1912 हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का समाधान प्रभावित हुआ है। इसका कारण केवल शिकायत दर्ज करने वाले कर्मचारियों की कमी नहीं, बल्कि शिकायत मिलने के बाद मौके पर पहुंचकर फॉल्ट ठीक करने वाले तकनीकी कर्मचारियों की कमी भी है।

यानी उपभोक्ता शिकायत दर्ज करा भी दे, तो उसके बाद मौके पर पहुंचकर बिजली लाइन, केबल, ट्रांसफार्मर या अन्य तकनीकी खराबी दूर करने के लिए पर्याप्त फील्ड स्टाफ उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में छोटी तकनीकी खराबी भी लंबे समय तक बिजली बाधित रहने का कारण बन सकती है।

PSPCL अधिकारियों के अनुसार जरूरत पड़ने पर विभाग के ठेकेदारों के माध्यम से उपलब्ध निजी तकनीकी मानवबल का इस्तेमाल संचालन बनाए रखने और उपभोक्ता शिकायतों का जवाब देने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, कर्मचारियों की बड़ी संख्या में अनुपस्थिति के कारण यह व्यवस्था पर्याप्त साबित होगी या नहीं, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ सकती है परेशानी

हड़ताल का असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसका एक बड़ा कारण धान का सीजन है। पंजाब में इस समय कृषि ट्यूबवेलों के लिए बिजली की मांग महत्वपूर्ण है। ऐसे में अगर किसी ग्रामीण फीडर में खराबी आती है और उसे समय पर ठीक करने के लिए तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते, तो किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।

जालंधर क्षेत्र से मिली जानकारी के अनुसार उपलब्ध कर्मचारियों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में किसी तरह बिजली आपूर्ति संभालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में फॉल्ट अटेंड करने के लिए तकनीकी कर्मचारियों की कमी ज्यादा गंभीर साबित हो सकती है।

लुधियाना में करीब 70 फीसदी कर्मचारी आंदोलन में

हड़ताल के असर का एक स्पष्ट उदाहरण लुधियाना के PSPCL सेंट्रल जोन में देखने को मिला है। 23 जुलाई के आधिकारिक उपस्थिति आंकड़ों के अनुसार 2,557 स्वीकृत पदों में से केवल 752 कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित थे, जबकि 1,775 कर्मचारी हड़ताल में शामिल थे। 29 कर्मचारी अवकाश पर थे।

इसका अर्थ है कि सेंट्रल जोन में करीब 70 फीसदी कर्मचारी आंदोलन में शामिल थे। इस क्षेत्र में मुख्य कार्यालय के अलावा सिटी ईस्ट, सिटी वेस्ट, सब-अर्बन लुधियाना और खन्ना सर्किल शामिल हैं।

बारिश के बाद बिजली संबंधी शिकायतों का दबाव और बढ़ गया। रिपोर्ट के मुताबिक PSPCL को बिजली फेल होने, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, केबल फॉल्ट और अन्य समस्याओं से संबंधित करीब 33,000 शिकायतें प्राप्त हुईं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने के कारण शिकायत निपटाने और बिजली बहाली में देरी हुई।

ग्रिड स्टेशनों पर सीमित कर्मचारियों का दबाव

तकनीकी कर्मचारियों की कमी के बीच PSPCL को उपलब्ध अधिकारियों और गैर-हड़ताली कर्मचारियों के सहारे व्यवस्था संभालनी पड़ रही है। कई स्थानों पर ग्रिड स्टेशनों पर सीमित संख्या में अधिकारी तैनात हैं।

रोपड़ जिले में एक सब-डिवीजन को चार से पांच वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों के सहारे चलाने की स्थिति बताई गई है। इनमें XEN, SDO और JE स्तर के अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों को पर्यवेक्षण के साथ-साथ परिचालन संबंधी जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ रही हैं।

इससे साफ है कि विवाद अब केवल कर्मचारियों की मांगों तक सीमित नहीं है। अगर आंदोलन लंबा खिंचता है तो उपलब्ध तकनीकी कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त दबाव भी बढ़ सकता है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

PSPCL कर्मचारियों और अलग-अलग तकनीकी कर्मचारी संगठनों की मांगों में कई मुद्दे शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • समान काम के लिए समान वेतन लागू करना।
  • आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण।
  • 18 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ता जारी करना।
  • 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन।
  • प्रोबेशन अवधि में पूर्ण वेतन का भुगतान।
  • 1 जनवरी 2016 से लंबित बकाया राशि जारी करना।
  • खाली पदों को तेजी से भरना।
  • पुरानी पेंशन योजना बहाल करना।
  • AAE से Assistant Engineer पद पर पदोन्नति का कोटा बढ़ाना।
  • नोडल शिकायत केंद्र और सुविधा केंद्रों पर काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को PSPCL के साथ सीधे संविदात्मक व्यवस्था में लाना।

इन मांगों में नियमितीकरण, वेतन विसंगति, डीए, पदोन्नति और पेंशन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

पंजाब सरकार के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ कर्मचारी संगठनों की मांगों पर समाधान निकालना है, वहीं दूसरी तरफ बिजली आपूर्ति को सामान्य बनाए रखना भी जरूरी है। हड़ताल अगर लंबी होती है तो फॉल्ट ठीक करने, शिकायतों के निपटारे और फील्ड में नियमित रखरखाव का काम और प्रभावित हो सकता है।

PSPCL की आधिकारिक वेबसाइट पर उपभोक्ताओं के लिए ऑनलाइन सेवाएं, शिकायत एवं सेवा संबंधी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, लेकिन बिजली वितरण जैसी फील्ड आधारित व्यवस्था में केवल ऑनलाइन शिकायत दर्ज होना पर्याप्त नहीं होता। शिकायत के बाद तकनीकी कर्मचारी का मौके पर पहुंचना और फॉल्ट को ठीक करना ही वास्तविक समाधान है।

27 जुलाई पर टिकी नजरें

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 27 जुलाई तक सरकार और बिजली कर्मचारी संगठनों के बीच लिखित समझौता हो पाएगा? बातचीत विफल होने के बाद यूनियनें आंदोलन जारी रखने पर अड़ी हैं। दूसरी तरफ सरकार के लिए हर बीतते दिन के साथ बिजली वितरण व्यवस्था को सामान्य रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

मौजूदा स्थिति में पंजाब के बिजली उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हड़ताल का मतलब राज्य की पूरी बिजली व्यवस्था का बंद होना नहीं है। बिजली उत्पादन और ग्रिड संचालन पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन फॉल्ट आने के बाद उसे ठीक करने और शिकायतों का समाधान करने की क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है। यही वजह है कि किसी इलाके में तकनीकी खराबी होने पर बिजली बहाली में सामान्य से अधिक समय लग सकता है।

इस पूरे विवाद का समाधान अब केवल आश्वासन से संभव होता नहीं दिख रहा। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सरकार उनकी मांगों पर लिखित निर्णय दे। वहीं उपभोक्ता चाहते हैं कि बिजली आपूर्ति और शिकायत निवारण जल्द सामान्य हो। ऐसे में आने वाले 24 से 48 घंटे पंजाब की बिजली व्यवस्था और कर्मचारी आंदोलन—दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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