चित्रकूट

बाघ संरक्षण का संदेश लेकर छात्रों तक पहुंचा जागरूकता अभियान, प्रतियोगिताओं के जरिए जगाई वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदारी

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस से पहले स्कूलों में बढ़ी संरक्षण की मुहिम, विजेताओं को जिला स्तर पर मिलेगा मौका

रिपोर्ट: संजय सिंह राणा

CHITRAKOOT. अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) के उपलक्ष्य में रानीपुर टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बाघों और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। इसी क्रम में गुरुवार को रैपुरा रेंज की ओर से सरदार पटेल इंटर कॉलेज, रैपुरा में छात्र-छात्राओं के बीच एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के महत्व से परिचित कराना तथा उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति अपनी रचनात्मक सोच और ज्ञान का प्रदर्शन किया। वन विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को बताया कि यदि आज बाघ और उनके प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियां भी समृद्ध जंगलों और संतुलित पर्यावरण का लाभ उठा सकेंगी।

प्रतियोगिताओं के माध्यम से दिया संरक्षण का संदेश

जागरूकता अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए कई रोचक और ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें चित्रकला प्रतियोगिता, निबंध लेखन प्रतियोगिता और वन्यजीव प्रश्नोत्तरी प्रमुख आकर्षण रहीं।

चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने रंगों के माध्यम से बाघ, जंगल, वन्यजीव और प्रकृति संरक्षण से जुड़े आकर्षक चित्र बनाए। कई प्रतिभागियों ने अपने चित्रों में यह संदेश दिया कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो वन्यजीव भी सुरक्षित रहेंगे।

निबंध लेखन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बाघ संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और मानव-वन्यजीव संबंधों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। बच्चों ने अपने लेखों में बाघों के घटते प्राकृतिक आवास, अवैध शिकार और जंगलों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

वन्यजीव प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में छात्रों ने वन्यजीवों से जुड़े अनेक प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी जानकारी और रुचि का परिचय दिया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल देखने को मिला।

जूनियर और सीनियर वर्ग के प्रतिभागियों को मिलेगा जिला स्तर पर अवसर

वन विभाग द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों के प्रतिभागियों का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा। प्रत्येक वर्ग से शीर्ष तीन विद्यार्थियों का चयन जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए किया जाएगा।

जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आगामी 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में सम्मानित अतिथियों द्वारा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों में प्रतियोगिता के प्रति उत्साह के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी।

वन विभाग ने बताया कि विद्यालय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं के शीर्ष तीन विजेताओं की घोषणा अगले दिन की जाएगी, जिसके बाद चयनित छात्र जिला स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

बच्चों को बताया बाघों का पर्यावरणीय महत्व

कार्यक्रम के दौरान वन अधिकारियों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का प्रतीक है। जहां बाघ सुरक्षित होते हैं, वहां जंगल भी स्वस्थ रहते हैं और जैव विविधता संतुलित बनी रहती है।

उन्होंने बच्चों को समझाया कि जंगलों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है। यदि लोग जंगलों और वन्यजीवों के महत्व को समझेंगे तो प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने की प्रभावी पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय स्तर पर इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय चेतना विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्र केवल पुरस्कार जीतने के लिए नहीं बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित होते हैं।

रानीपुर टाइगर रिजर्व द्वारा संचालित यह अभियान इसी उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ रहा है कि अधिक से अधिक विद्यार्थी बाघ संरक्षण के संदेश को अपने परिवार और समाज तक पहुंचाएं। इससे भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का उद्देश्य

हर वर्ष 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में बाघों की घटती संख्या के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा उनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है।

भारत विश्व के सबसे बड़े बाघ आवास वाले देशों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में बाघ संरक्षित क्षेत्रों में निवास करते हैं। ऐसे में बाघों के संरक्षण के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना भी अत्यंत आवश्यक है। विद्यालयों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माने जा रहे हैं।

समाज की भागीदारी से ही सफल होगा संरक्षण अभियान

वन विभाग का मानना है कि केवल सरकारी योजनाओं से ही वन्यजीव संरक्षण संभव नहीं है। जब तक समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी और विद्यार्थी इस अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगे, तब तक संरक्षण के प्रयासों को व्यापक सफलता नहीं मिल सकती।

रानीपुर टाइगर रिजर्व द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने के साथ-साथ उन्हें प्रकृति संरक्षण का जिम्मेदार दूत बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हो रहा है। आने वाले दिनों में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को बाघों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रेरित करने का प्रयास जारी रहेगा।

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