यादव महासम्मेलन में मातृशक्ति की गरिमामयी भागीदारी ने जीता सभी का दिल
भगवान श्रीकृष्ण-राधारानी की पूजा, भव्य कलश यात्रा और महिला प्रकोष्ठ की अनुशासित सहभागिता ने सामाजिक महासम्मेलन को बनाया यादगार।
संवाद सूत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ झेरिया यादव समाज द्वारा आयोजित यादव महापर्व, सामाजिक महासम्मेलन एवं सम्मान समारोह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। ग्राम बरौदा में आयोजित इस भव्य आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों, महानगरों, तहसीलों, केंद्रों और परिक्षेत्रों से समाज के हजारों लोग शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम में महिला प्रकोष्ठ की सक्रिय, अनुशासित और गरिमामयी भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
समारोह की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के विधिवत पूजन-अर्चन से हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच उपस्थित श्रद्धालुओं ने समाज की समृद्धि, एकता और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इसके बाद महिलाओं द्वारा निकाली गई पारंपरिक कलश यात्रा ने पूरे आयोजन को धार्मिक और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।
महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष श्रीमती कांति यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पीले पारंपरिक परिधान धारण कर सिर पर कलश रखकर भव्य शोभायात्रा निकाली। अनुशासित ढंग से निकली इस कलश यात्रा ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। यात्रा के दौरान श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकजुटता का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसकी उपस्थित लोगों ने मुक्त कंठ से सराहना की।
महासम्मेलन में रायपुर जिला ही नहीं बल्कि अन्य जिलों, महानगरों, तहसीलों और विभिन्न सामाजिक इकाइयों से आई महिला पदाधिकारियों और मातृशक्ति ने पूरे उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। महिलाओं की गरिमामयी सहभागिता ने यह संदेश दिया कि समाज के विकास और संगठन को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान महिला प्रकोष्ठ की टीम ने आयोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाली। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं। महिला पदाधिकारियों और स्वयंसेविकाओं ने अपने-अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करते हुए कार्यक्रम को शांतिपूर्ण, अनुशासित और सफल बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया।
महासम्मेलन में समाज के वरिष्ठजनों और वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी मातृशक्ति होती है। परिवार से लेकर राष्ट्र निर्माण तक महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर प्राप्त होते हैं, वहां सामाजिक समरसता, संस्कार और समृद्धि स्वतः विकसित होती है।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में समाज के संगठन, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नई पीढ़ी में संस्कारों के विकास के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने महिला प्रकोष्ठ द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
महासम्मेलन के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों का सम्मान भी किया गया। सामाजिक सेवा, शिक्षा, संगठन और जनकल्याण के क्षेत्र में सक्रिय सदस्यों को सम्मानित कर उनके कार्यों की सराहना की गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने समाज की एकता और विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प भी दोहराया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार के सामाजिक आयोजन न केवल समाज को एक मंच पर लाते हैं, बल्कि आपसी भाईचारे, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक समन्वय को भी मजबूत करते हैं। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि समाज अब विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां हर वर्ग की सहभागिता को समान महत्व दिया जा रहा है।
समापन अवसर पर रायपुर जिला महिला प्रकोष्ठ सहित आयोजन से जुड़ी सभी महिला पदाधिकारियों, स्वयंसेविकाओं और मातृशक्ति के योगदान की मुक्त कंठ से प्रशंसा की गई। आयोजकों ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों, अतिथियों और समाजजनों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का आह्वान किया।
यादव महापर्व, सामाजिक महासम्मेलन एवं सम्मान समारोह ने यह साबित किया कि जब समाज की मातृशक्ति पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ आगे आती है तो कोई भी आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक संरक्षण और संगठनात्मक मजबूती का प्रेरक अभियान बन जाता है। रायपुर के ग्राम बरौदा में आयोजित यह आयोजन इसी कारण समाज के लिए एक यादगार और प्रेरणादायी उदाहरण के रूप में लंबे समय तक स्मरण किया जाएगा।










