हिमाचल

तबाही के 24 घंटे : फिर बरपा बारिश का कहर, दरके पहाड़, बह गए घर, कई इलाकों में बढ़ा खतरा

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने फिर बढ़ाई मुश्किलें

नीतू वालिया की रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर विनाशकारी रूप लेकर सामने आया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पहाड़ों के दरकने, भूस्खलन, उफनते नालों और टूटती सड़कों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई स्थानों पर मकान देखते ही देखते बह गए, जबकि अनेक गांवों का संपर्क सड़क मार्ग से कट गया। राहत की बात यह रही कि प्रशासन की सतर्कता के चलते कई इलाकों से लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया, जिससे बड़े स्तर पर जनहानि नहीं हुई।

मौसम विभाग ने प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में प्रशासन लगातार लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है।

कांगड़ा में सबसे ज्यादा तबाही, छह मकान पानी में समाए

भारी बारिश का सबसे अधिक असर कांगड़ा जिले में देखने को मिला। शाहपुर क्षेत्र के धारकंडी, स्पैडा और गडगून गांवों में अचानक आई तेज जलधारा ने छह मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते ये मकान पानी के तेज बहाव में बह गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना के पीछे बादल फटने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि प्रशासन और स्थानीय लोगों की तत्परता से सभी प्रभावित परिवारों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था, जिसके कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।

भूस्खलन से टूटी सड़कें, राहत कार्य में आई मुश्किलें

बारिश के कारण कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। डिब्बा और मनेड नाला क्षेत्र में हुए भारी भूस्खलन के चलते सड़कें पूरी तरह टूट गईं। इससे राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

प्रशासन ने मशीनरी और कर्मचारियों को मौके पर भेजकर रास्ते बहाल करने का कार्य शुरू किया है, लेकिन लगातार बारिश के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहा है।

न्यांगल पंचायत में बदला नाले का रास्ता, कई घरों पर खतरा

जवाली विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत न्यांगल में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण नाले की धारा बदल गई है। अब बरसाती पानी सीधे आबादी की ओर बढ़ रहा है, जिससे लगभग 10 से 15 घरों के साथ-साथ आसपास की कृषि भूमि पर भी खतरा मंडरा रहा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जेसीबी मशीनें मौके पर भेजी हैं। नाले के बहाव को दूसरी दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि आबादी को सुरक्षित रखा जा सके।

पालमपुर में डंगा गिरा, लैंडस्लाइड में वैन हुई चकनाचूर

पालमपुर क्षेत्र में भी लगातार बारिश लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई है। भरमात इलाके में एक मकान के पीछे बना सुरक्षा डंगा ढह गया, जिससे मकान की नींव कमजोर हो गई है। बारिश का पानी घर के भीतर घुसने से परिवार को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं पालमपुर-बैजनाथ मार्ग पर मोल खड्ड के समीप हुए भूस्खलन की चपेट में एक पार्क की गई मारुति वैन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। सौभाग्य से घटना के समय वाहन के अंदर कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

चंबा में नाले में फंसी यात्रियों से भरी बस

बारिश का असर चंबा जिले में भी साफ दिखाई दिया। तीसा-चंबा मुख्य मार्ग पर कंदला नाला उफान पर आ गया, जिसके चलते यात्रियों से भरी एक निजी बस बीच नाले में फंस गई। बस में सवार लगभग 20 से 25 यात्रियों को काफी देर तक वाहन के भीतर ही इंतजार करना पड़ा।

इसके अलावा भटियात क्षेत्र के टिक्करगला में सड़क का बड़ा हिस्सा नाले में बह गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। प्रशासन ने लोगों से जोखिम उठाकर यात्रा न करने की अपील की है।

लाहौल-स्पीति में मानवता की मिसाल, मासूम को बचाने के लिए उठाया जोखिम

लाहौल-स्पीति जिले के जाहलमा नाले से एक प्रेरणादायक तस्वीर भी सामने आई। हाल ही में आई बाढ़ के कारण क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है। इसी बीच निमोनिया और तेज बुखार से पीड़ित ढाई वर्षीय बच्चे को बेहतर उपचार के लिए उदयपुर से कुल्लू रेफर किया गया।

बच्चे की जान बचाने के लिए 108 एम्बुलेंस सेवा के ईएमटी अनिल सुमती और पायलट शिवप्रकाश ने उफनते नाले के बीच जान जोखिम में डालकर अपना कर्तव्य निभाया। दोनों ने कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी और बच्चे को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने में सफलता हासिल की। इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं और लोग दोनों कर्मियों की सराहना कर रहे हैं।

27 जुलाई तक मौसम खराब रहने की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में बारिश का दौर अभी थमने वाला नहीं है। प्रदेश में 27 जुलाई तक मौसम खराब बने रहने की संभावना है। बुधवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 23 जुलाई से 27 जुलाई तक कई जिलों के लिए येलो अलर्ट लागू रहेगा।

भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने, अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।

हिमाचल में फिर चुनौती बना मानसून

लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हिमाचल प्रदेश में मानसून का हर दौर नई चुनौतियां लेकर आता है। कहीं लोग अपने आशियाने बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो कहीं सड़कें टूटने से गांवों का संपर्क कट गया है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

आने वाले दिनों में यदि बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में लोगों की सतर्कता, प्रशासन की सक्रियता और समय पर राहत कार्य ही किसी बड़े नुकसान को टालने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे।

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