प्रयागराज

प्रयागराज में आकाशीय बिजली का कहर : अमरूद के बाग में पेड़ के नीचे खड़े दो लोगों की मौत, छह गंभीर रूप से झुलसे

प्रयागराज में बारिश के दौरान दर्दनाक हादसा

रिपोर्ट: अंजनी कुमार त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में मानसून की बारिश के बीच आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। सोरांव थाना क्षेत्र के रघुवंशपुर उर्फ रेरुआ गांव में सोमवार देर शाम तेज बारिश और गर्जना के दौरान बिजली गिरने से दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने और घायलों के समुचित उपचार का आश्वासन दिया है।

पेड़ के नीचे रुकना पड़ा भारी

जानकारी के अनुसार, रघुवंशपुर उर्फ रेरुआ गांव तथा आसपास के क्षेत्र के कुछ लोग सोमवार शाम बकरियां चराने के लिए निकले थे। इसी दौरान मौसम अचानक खराब हो गया और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए सभी लोग पास के एक अमरूद के बाग में पहुंचे और एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए।

इसी बीच तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली उसी स्थान पर गिर गई। बिजली गिरने का प्रभाव इतना तेज था कि वहां मौजूद सभी लोग उसकी चपेट में आ गए। हादसे में दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

दो लोगों की मौके पर ही हुई मौत

इस दर्दनाक घटना में रघुवंशपुर निवासी संजीत कुमार (48 वर्ष) और बैरहना सम्हई निवासी नागेश कुमार (40 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली गिरते ही दोनों जमीन पर गिर पड़े और उनकी घटनास्थल पर ही सांसें थम गईं।

घटना के बाद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और पुलिस तथा एंबुलेंस को सूचना दी।

छह लोग गंभीर रूप से झुलसे

हादसे में सोनू, अजय कुमार, अंजय, राज कुमार, खुन्नू मिश्र सहित कुल छह लोग गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कुछ घायलों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और उन पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा प्रशासन

घटना की जानकारी मिलते ही सोरांव थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे की जानकारी जुटाई। पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

प्रशासनिक अधिकारियों ने घायलों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात की और उन्हें हरसंभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।

परिजनों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन

जिला प्रशासन ने कहा है कि प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को शासन की ओर से निर्धारित नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा घायलों के इलाज में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। प्रशासन लगातार अस्पताल से संपर्क बनाए हुए है और घायलों की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रख रहा है।

मानसून में बढ़ जाता है आकाशीय बिजली का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बारिश के समय खुले मैदान, खेत, बाग-बगीचों या ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़ा होना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। मौसम विभाग भी खराब मौसम के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और बिजली चमकने के समय खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह देता है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि गरज-चमक शुरू होते ही यदि कोई पक्का भवन उपलब्ध हो तो वहीं शरण लेनी चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो तो खुले स्थान में झुककर बैठना अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है, लेकिन किसी अकेले ऊंचे पेड़ के नीचे खड़ा होना जानलेवा हो सकता है।

ग्रामीणों में शोक का माहौल

इस हादसे के बाद रघुवंशपुर उर्फ रेरुआ और आसपास के गांवों में शोक का माहौल है। मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों मृतक मेहनतकश और मिलनसार स्वभाव के थे तथा अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए पशुपालन और अन्य कार्यों में जुटे रहते थे। अचानक हुई इस घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की है।

सावधानी ही बचाव का सबसे प्रभावी उपाय

बारिश और गरज-चमक के दौरान मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना आवश्यक है। खेतों, बागों, खुले मैदानों, बिजली के खंभों और अकेले खड़े ऊंचे पेड़ों से दूरी बनाए रखना चाहिए। यदि मौसम अचानक खराब हो जाए तो किसी मजबूत भवन में शरण लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। छोटी-सी सावधानी कई बार बड़े हादसों से बचा सकती है।

प्रयागराज के सोरांव क्षेत्र में हुई यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सतर्कता और समय पर सुरक्षा उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। प्रशासन ने जहां पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है, वहीं स्थानीय लोग भी उम्मीद कर रहे हैं कि घायलों का शीघ्र स्वास्थ्य लाभ होगा और प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button