एक दौर का अवसान : नहीं रहे क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी ठाकुर व्रतपाल सिंह ‘भुसैली सिंह’
95 वर्ष की आयु में निधन, आज सुबह चचरी बाबा घाट पर होगा अंतिम संस्कार; क्षेत्र में शोक की लहर
रिपोर्ट: चुन्नीलाल प्रधान
कर्नलगंज (गोण्डा)। विकास खंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत चतरौली के सम्मानित एवं वरिष्ठ नागरिक ठाकुर व्रतपाल सिंह, जिन्हें पूरे इलाके में स्नेहपूर्वक ‘भुसैली सिंह’ के नाम से जाना जाता था, का 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने रविवार देर शाम अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही परिजनों, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों में गहरा शोक व्याप्त हो गया। उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का तांता लगा हुआ है।
सादगी, स्पष्टवादिता और दृढ़ व्यक्तित्व के लिए थी अलग पहचान
ठाकुर व्रतपाल सिंह का नाम क्षेत्र में एक ऐसे व्यक्ति के रूप में लिया जाता था, जिन्होंने अपने पूरे जीवन में सादगी, स्पष्टवादिता और सामाजिक सरोकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी बेबाक शैली और निष्पक्ष विचारों के कारण लोग उनका विशेष सम्मान करते थे। वे अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने के लिए प्रसिद्ध थे और जो संकल्प लेते, उसे पूरा करने का हर संभव प्रयास करते थे।
ग्रामीणों का कहना है कि भुसैली सिंह का व्यक्तित्व ऐसा था कि लोग कठिन परिस्थितियों में भी उनकी सलाह लेने पहुंचते थे। वे बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करते थे, जिससे उन्हें समाज के हर वर्ग का स्नेह और सम्मान प्राप्त था।
गांव और क्षेत्र के लोगों के लिए बने रहे प्रेरणा
लंबे समय तक सामाजिक जीवन से जुड़े रहे ठाकुर व्रतपाल सिंह ने अपने अनुभवों और व्यवहार से नई पीढ़ी को भी प्रेरित किया। वे पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे के प्रबल समर्थक थे। गांव के कई बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने हमेशा लोगों को मिल-जुलकर रहने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की सीख दी।
उनकी सहजता और व्यवहार कुशलता के कारण गांव में होने वाले सामाजिक एवं पारिवारिक आयोजनों में उनकी उपस्थिति को विशेष महत्व दिया जाता था। वे विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
ठाकुर व्रतपाल सिंह अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में दो पुत्र जगदीश सिंह और शिवकुमार सिंह हैं, जो क्षेत्र में सामाजिक गतिविधियों के कारण अच्छी पहचान रखते हैं। पिता के निधन से परिवार गहरे सदमे में है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने परिवार को संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों का जो पाठ पढ़ाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
शोक समाचार मिलते ही रिश्तेदार, मित्र, सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्र के गणमान्य लोग उनके आवास पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।
अंतिम संस्कार आज सुबह चचरी बाबा घाट पर
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार ठाकुर व्रतपाल सिंह का अंतिम संस्कार सोमवार सुबह लगभग 9 बजे तक चचरी बाबा घाट पर पूरे वैदिक रीति-रिवाज और धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न कराया जाएगा। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों के शामिल होने की संभावना है।
क्षेत्र में शोक का माहौल
उनके निधन की खबर फैलते ही चतरौली सहित आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। अनेक लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। लोगों का कहना है कि भुसैली सिंह जैसे अनुभवी, स्पष्टवादी और समाजहित को प्राथमिकता देने वाले व्यक्तित्व अब बहुत कम देखने को मिलते हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि उनका जाना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी। वे अपने व्यवहार, अनुभव और समाज के प्रति समर्पण के कारण हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेंगे।
सामाजिक जीवन की अमिट छाप
करीब नौ दशक से अधिक का जीवन जीने वाले ठाकुर व्रतपाल सिंह ने अपने अनुभवों, नैतिक मूल्यों और व्यवहार से समाज में एक विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने कभी दिखावे की बजाय कर्म को महत्व दिया और अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सम्मान पद या संपत्ति से नहीं, बल्कि व्यवहार और चरित्र से मिलता है।
आज जब उनके निधन का समाचार पूरे क्षेत्र में पहुंचा तो अनेक लोगों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उनकी स्पष्ट सोच, ईमानदार व्यक्तित्व और सामाजिक प्रतिबद्धता को लंबे समय तक याद किया जाएगा।








