21 अक्टूबर 2026 8:40 पूर्वाह्न

“डरना मेरी फितरत नहीं… जांच में खेल हुआ तो फिर बोलूंगा” — अयोध्या चंदा मामले पर बृजभूषण का बड़ा ऐलान

गोंडा में सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अयोध्या चंदा मामले पर बयान देते पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, साथ में अयोध्या राम मंदिर की प्रतीकात्मक तस्वीर।

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या चंदा मामले को लेकर एक बार फिर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी तरह के दबाव में आने वाले व्यक्ति नहीं हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि जांच ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ पूरी हुई तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन यदि जांच को प्रभावित करने या किसी को बचाने का प्रयास किया गया तो वह दोबारा पूरे जोर-शोर से अपनी बात जनता के सामने रखेंगे।

बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अयोध्या चंदा मामले की जांच लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है, जिसके कारण यह मामला प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

“डरने के लिए पैदा नहीं हुआ हूं”

कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने अपने अंदाज में कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में डरने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनका स्वभाव हमेशा से स्पष्ट बोलने का रहा है और भविष्य में भी वह इसी तरह अपनी बात रखते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को अपना काम पूरी स्वतंत्रता के साथ करने दिया जाना चाहिए। यदि जांच निष्पक्ष होगी तो वह उसका स्वागत करेंगे, लेकिन यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता दिखाई देती है या किसी व्यक्ति को बचाने की कोशिश होती है तो वह चुप नहीं बैठेंगे और पूरे मामले को फिर से सार्वजनिक रूप से उठाएंगे।

उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पुराने बयान का भी किया उल्लेख

बृजभूषण शरण सिंह ने इस अवसर पर अपने पहले दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब यह मामला प्रारंभिक चरण में था, तभी उन्हें संदेह हो गया था कि इसके पीछे कुछ न कुछ गड़बड़ी हो सकती है। उनका दावा था कि पिछले चार-पांच वर्षों से वह इस विषय पर लगातार अपनी बात रखते रहे हैं और समय-समय पर लोगों को इसके प्रति सचेत भी करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना है। उनके अनुसार यदि जांच निष्पक्ष होगी तो सभी तथ्यों का स्वतः खुलासा हो जाएगा।

राम मंदिर दर्शन वाले बयान पर दी सफाई

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने राम मंदिर दर्शन नहीं करने की बात कही थी। इस बयान को लेकर पहले भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी चर्चा हुई थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका वह बयान व्यंग्य के रूप में दिया गया था। उनका कहना था कि लोगों को केवल शब्दों पर नहीं बल्कि उनके पीछे छिपे भाव को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके बयान को जिस प्रकार प्रस्तुत किया गया, उससे उसका वास्तविक आशय बदल गया।

उन्होंने संकेत दिए कि किसी भी बयान को उसके पूरे संदर्भ में समझना चाहिए, तभी सही निष्कर्ष निकल सकता है।

अखिलेश यादव के आरोपों पर साधा संयम

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर पूछे गए सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने सीधे तौर पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व सवाल उठाना और आरोप लगाना होता है। इसलिए वह विपक्षी नेताओं के राजनीतिक बयानों पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं समझते।

हालांकि उन्होंने यह अवश्य कहा कि यदि किसी मामले में एफआईआर दर्ज हुई है, जांच चल रही है, लोगों से पूछताछ हो रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है, तो इसका अर्थ है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।

उन्होंने दोहराया कि वह जांच पूरी होने तक धैर्य रखेंगे, लेकिन यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई दिखाई देती है तो वह दोबारा खुलकर अपनी बात रखेंगे।

निष्पक्ष जांच पर जताया भरोसा

पूर्व सांसद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जांच एजेंसियों की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए।

उन्होंने विश्वास जताया कि जांच पूरी होने के बाद पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी और तभी जनता भी सही तथ्यों से अवगत हो सकेगी।

उनका कहना था कि सच्चाई छिपाई नहीं जा सकती और यदि जांच पूरी ईमानदारी से होगी तो सभी सवालों के जवाब स्वतः मिल जाएंगे।

प्रदेश की राजनीति में फिर गर्माया मुद्दा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयोध्या चंदा मामला आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक अहम मुद्दा बन सकता है। प्रदेश में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बनने लगा है और ऐसे समय में इस तरह के बयान राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर सकते हैं।

बृजभूषण शरण सिंह के ताजा बयान से यह संकेत भी मिला है कि वह इस मुद्दे पर अपनी सक्रियता बनाए रखेंगे। यदि जांच के दौरान कोई नया मोड़ आता है तो यह मामला फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में आगे क्या दिशा तय होती है और राजनीतिक स्तर पर इसका कितना व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है।

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