बिलासपुर

शाला प्रवेश उत्सव: कोड़ापुरी के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में नए विद्यार्थियों का गर्मजोशी से हुआ स्वागत

गणवेश और पाठ्यपुस्तकों का वितरण, नए शैक्षणिक सत्र का उत्साहपूर्ण आगाज़

रिपोर्ट: हरीश चन्द्र गुप्ता

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत को यादगार बनाने के उद्देश्य से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, कोड़ापुरी में शाला प्रवेश उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशी विद्यार्थियों सहित कक्षा पहली से आठवीं तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का तिलक लगाकर, मिठाई एवं चॉकलेट खिलाकर आत्मीय स्वागत किया गया। साथ ही विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों और विद्यालयी गणवेश का वितरण भी किया गया, जिससे बच्चों और उनके अभिभावकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद सदस्य श्रीमती कविता महेश यादव उपस्थित रहीं। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में ग्राम पंचायत कोड़ापुरी की सरपंच श्रीमती कविता टिकेश साहू तथा उपसरपंच श्री कमल यादव ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके अतिरिक्त शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल कोड़ापुरी की प्राचार्य श्रीमती सरोज पारकर, प्रधान पाठक श्री राजेश चौबे सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं ग्राम पंचायत के पंचगण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

तिलक, मिठाई और चॉकलेट के साथ हुआ आत्मीय स्वागत

विद्यालय परिवार ने नए विद्यार्थियों का पारंपरिक भारतीय संस्कृति के अनुरूप तिलक लगाकर अभिनंदन किया। इसके बाद बच्चों को मिठाई और चॉकलेट वितरित कर उनके जीवन के इस नए शैक्षणिक सफर की मंगलकामना की गई। छोटे-छोटे बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था। विद्यालय परिसर बच्चों की खिलखिलाहट और नई उम्मीदों से गुलजार दिखाई दिया।

विद्यार्थियों को मिली निःशुल्क गणवेश और पाठ्यपुस्तकें

कार्यक्रम के दौरान शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत विद्यार्थियों को निःशुल्क विद्यालयी गणवेश एवं पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक स्थिति किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बने। समय पर अध्ययन सामग्री मिलने से छात्र-छात्राएं सत्र के प्रारंभ से ही नियमित रूप से अपनी पढ़ाई शुरू कर सकेंगे।

शिक्षा को बताया उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती कविता महेश यादव ने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से ही बच्चे आत्मनिर्भर बन सकते हैं और समाज एवं राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने और उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने की अपील की।

विशिष्ट अतिथियों ने भी विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम और लगन के साथ शिक्षा प्राप्त करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी प्रारंभ से ही अपने लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करें तो जीवन में बड़ी सफलताएं प्राप्त कर सकते हैं।

शिक्षकों ने बच्चों का बढ़ाया उत्साह

विद्यालय के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें नियमित उपस्थिति, समय का सदुपयोग और शिक्षा के प्रति समर्पण का संदेश दिया। शिक्षकों ने विश्वास जताया कि नए शैक्षणिक सत्र में विद्यालय के विद्यार्थी शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक एवं अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।

अभिभावकों ने जताई खुशी

शाला प्रवेश उत्सव में शामिल अभिभावकों ने शासन एवं विद्यालय प्रशासन की इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि बच्चों का इस प्रकार सम्मानपूर्वक स्वागत किए जाने से उनमें विद्यालय के प्रति अपनापन और पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ती है। साथ ही निःशुल्क गणवेश और पाठ्यपुस्तकों का वितरण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए काफी सहायक साबित होता है।

उत्साह और नई उम्मीदों के साथ शुरू हुआ शैक्षणिक सफर

पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का वातावरण उत्साह, उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहा। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों एवं अतिथियों का आशीर्वाद प्राप्त किया और नए जोश के साथ अध्ययन करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार एवं जनप्रतिनिधियों ने सभी छात्र-छात्राओं को नए शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल, सफल और समृद्ध भविष्य की कामना की।

विद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि शाला प्रवेश उत्सव जैसे आयोजन न केवल बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाते हैं, बल्कि विद्यालय और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।

 

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