देवरिया

“परसों ही बेटे से बात हुई थी…” : ओमान तट पर मिसाइल हमले में मारे गए देवरिया के शिवानंद चौरसिया, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

ओमान तट पर हुए मिसाइल हमले में देवरिया के रहने वाले भारतीय नाविक शिवानंद चौरसिया की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। तेल टैंकर सेटेबेलो पर इंजन फिटर के रूप में कार्यरत शिवानंद चौरसिया परिवार के मुख्य सहारा थे। हमले के बाद उनकी मौत की पुष्टि होने से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली पेकोली गांव में शोक की लहर फैल गई। इस विशेष रिपोर्ट में जानिए शिवानंद चौरसिया का पारिवारिक संघर्ष, आखिरी बातचीत, गांव का माहौल, सरकार द्वारा की गई पहल, भारतीय नाविकों की सुरक्षा से जुड़े सवाल और ओमान मिसाइल हमले से जुड़ी पूरी जानकारी। यह घटना विदेशों में कार्यरत भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा और वैश्विक संघर्ष क्षेत्रों में नौवहन जोखिमों पर गंभीर चर्चा को जन्म दे रही है।

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली पेकोली गांव में इन दिनों मातम पसरा हुआ है। गांव का बेटा शिवानंद चौरसिया, जो परिवार की आर्थिक रीढ़ था, ओमान तट के पास हुए मिसाइल हमले में अपनी जान गंवा बैठा। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की चपेट में आए तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर तैनात शिवानंद उन तीन भारतीय नाविकों में शामिल थे जिनकी मौत की पुष्टि भारत सरकार ने की है। इस घटना ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।

आठ महीने पहले बेहतर भविष्य की तलाश में निकले थे शिवानंद

35 वर्षीय शिवानंद चौरसिया उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली पेकोली गांव के निवासी थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए वे बेहतर रोजगार की तलाश में मुंबई गए और बाद में एक विदेशी शिपिंग कंपनी में इंजन फिटर के रूप में कार्य करने लगे। समुद्र में नौकरी मिलने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही थी।

गांव वालों के अनुसार शिवानंद बेहद मेहनती और जिम्मेदार स्वभाव के व्यक्ति थे। परिवार के भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। उनके निधन के बाद परिवार की आजीविका को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।

“सब ठीक है” कहकर की थी आखिरी बातचीत

शिवानंद के पिता रामजी चौरसिया ने बताया कि बेटे से उनकी आखिरी बातचीत हमले से एक दिन पहले हुई थी। उस दौरान शिवानंद ने परिवार को आश्वस्त किया था कि सब कुछ ठीक है। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह उनकी अंतिम बातचीत होगी।

पिता की आंखों में आंसू हैं और जुबान पर केवल एक ही सवाल—आखिर उनका बेटा वापस क्यों नहीं लौट पाया? परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्हें पहले केवल लापता होने की सूचना मिली थी, लेकिन बाद में मौत की पुष्टि होने से घर में कोहराम मच गया।

परिवार में कौन-कौन हैं?

शिवानंद चौरसिया अपने परिवार के बड़े बेटे थे। परिवार में उनके पिता रामजी चौरसिया, माता कलावती देवी, पत्नी सुशीला देवी, एक पुत्र राजवीर तथा एक छोटी बेटी वामिका हैं। उनका एक छोटा भाई भी है। परिवार की आय का मुख्य स्रोत शिवानंद की नौकरी ही थी।

पिता एक छोटे किसान होने के साथ-साथ पान की दुकान भी चलाते हैं। ऐसे में शिवानंद की कमाई परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी। अब उनके निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

गांव में पसरा मातम, लोगों की उमड़ी भीड़

शिवानंद की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। गांव के लोगों का कहना है कि शिवानंद संघर्षशील युवक थे और अपने परिवार को बेहतर जीवन देने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। पड़ोसियों के अनुसार वे परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और धीरे-धीरे आर्थिक हालात सुधार रहे थे।

शिवानंद के घर पर लगातार ग्रामीणों, रिश्तेदारों और सामाजिक संगठनों के लोगों का आना-जाना लगा हुआ है। हर किसी की आंखें नम हैं और परिवार को सांत्वना देने का प्रयास किया जा रहा है।

अमेरिकी हमले में कैसे गई जान?

10 जून को ओमान तट के निकट पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हुई। जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। हमले के बाद 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन भारतीय नाविक लापता हो गए थे। बाद में भारत सरकार ने पुष्टि की कि तीनों के शव बरामद कर लिए गए हैं। मृतकों में देवरिया के शिवानंद चौरसिया, हिमाचल प्रदेश के आदित्य शर्मा और आंध्र प्रदेश के पटनाला सुरेश शामिल थे।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार जहाज कथित तौर पर ईरान से तेल लेकर जा रहा था और बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद उसने अपना मार्ग नहीं बदला। इसके बाद अमेरिकी सेना ने जहाज के इंजन को निशाना बनाकर हमला किया। इसी हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई।

परिवार और ग्रामीणों ने उठाए सवाल

घटना के बाद मृतक नाविकों के परिवारों ने कई सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आखिर जहाज को ऐसे संवेदनशील और संघर्षग्रस्त समुद्री क्षेत्र में क्यों भेजा गया। क्या चालक दल को पर्याप्त सुरक्षा और जानकारी उपलब्ध कराई गई थी? इन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हो सके हैं।

गांव के लोगों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सरकार और प्रशासन ने अब तक क्या सहायता दी?

घटना की जानकारी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने परिवार से संपर्क स्थापित किया है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों ने परिवार के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त की और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी परिवार से मुलाकात की है। प्रशासन का कहना है कि मृतक का पार्थिव शरीर भारत लाने और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और संबंधित शिपिंग कंपनी के साथ समन्वय किया जा रहा है।

हालांकि समाचार लिखे जाने तक परिवार को किसी विशेष आर्थिक सहायता या मुआवजे की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी। ऐसे में ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।

पूरे देश को झकझोर गई घटना

ओमान तट पर हुए इस हमले ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। शिवानंद चौरसिया की मौत केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीय समुद्री कर्मचारियों की चुनौतियों की भी याद दिलाती है जो अपने परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए दुनिया के खतरनाक समुद्री मार्गों पर काम करते हैं।

आज सुरौली पेकोली गांव का हर व्यक्ति यही कह रहा है कि जिसने पूरे परिवार का सहारा बनकर संघर्ष किया, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा। पीछे रह गए हैं बूढ़े माता-पिता, पत्नी और दो मासूम बच्चे, जिनकी आंखें अब भी अपने शिवानंद के लौटने का इंतजार कर रही हैं।

शिवानंद की असामयिक मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है और यह घटना लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बनी रहेगी।

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