लो जी, सुशासन का ऐसा असर! पंचायत मतदाता सूची से पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम ही गायब?
अमेठी में पंचायत मतदाता सूची से पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम गायब मिलने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। लोकसभा और विधानसभा मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद पंचायत सूची में नाम न होने से जांच के आदेश दिए गए हैं। भाजपा ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है। यह मामला मतदाता सूची की पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ रहा है।
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
अमेठी। उत्तर प्रदेश में पंचायत मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के बाद एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी का नाम पंचायत मतदाता सूची में नहीं मिलने की खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई। सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि उनका नाम लोकसभा और विधानसभा की मतदाता सूची में दर्ज है, लेकिन पंचायत सूची में अनुपस्थित बताया जा रहा है।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि एक चर्चित जनप्रतिनिधि का नाम सूची से छूट सकता है, तो आम नागरिकों के रिकॉर्ड कितने सुरक्षित और सटीक होंगे?
पंचायत मतदाता सूची में सामने आई बड़ी चूक
10 जून को जारी पंचायत मतदाता सूची के अवलोकन के दौरान यह मामला सामने आया कि स्मृति ईरानी का नाम सूची में मौजूद नहीं है। जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई।
यह मामला केवल एक नाम के छूटने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया और उसके सत्यापन तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पंचायत चुनाव जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक अभ्यास में मतदाता सूची की शुद्धता सबसे अहम मानी जाती है।
लोकसभा और विधानसभा सूची में दर्ज है नाम
बताया जाता है कि 2019 में अमेठी से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद स्मृति ईरानी ने गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र के मेदान मवई गांव में अपना आवास बनाया था। वह यहां की नियमित मतदाता भी हैं और पूर्व में मतदान प्रक्रिया में हिस्सा ले चुकी हैं।
ऐसे में पंचायत मतदाता सूची से उनका नाम गायब होना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय स्तर पर लोग भी इस विसंगति को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने दिए तत्काल जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी संजय चौहान ने संबंधित अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह तकनीकी त्रुटि है, दस्तावेजी कमी है या किसी अन्य कारण से नाम सूची में शामिल नहीं हो पाया। अधिकारियों को रिकॉर्ड का मिलान कर आवश्यक कार्रवाई करने और यदि गलती पाई जाती है तो नियमानुसार तत्काल सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
भाजपा ने भी उठाया मामला
भारतीय जनता पार्टी की अमेठी जिला इकाई ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने बताया कि स्मृति ईरानी का नाम पंचायत मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर नाम को सूची में शामिल कर लिया जाएगा। भाजपा का कहना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है।
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद बनी नई सूची
निर्वाचन आयोग ने हाल ही में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया था। इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया और पात्रता के आधार पर नए मतदाताओं को जोड़ा गया, जबकि कई नाम सूची से हटाए भी गए।
आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के दौरान 2.04 करोड़ से अधिक नाम विभिन्न कारणों से हटाए गए, जबकि 84 लाख से अधिक नए मतदाताओं को जोड़ा गया। इसके बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 13.39 करोड़ से अधिक दर्ज की गई है।
मतदाता आंकड़े भी हैं महत्वपूर्ण
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य की नई मतदाता सूची में लगभग 7.30 करोड़ पुरुष मतदाता और करीब 6.09 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा 4,206 तृतीय लिंग के मतदाताओं का भी पंजीकरण किया गया है।निर्वाचन आयोग लगातार मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इस तरह की घटनाएं प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देती हैं।
तकनीकी गलती या व्यवस्था पर बड़ा सवाल?
स्मृति ईरानी का नाम पंचायत मतदाता सूची से गायब होने का मामला अब केवल प्रशासनिक त्रुटि भर नहीं रह गया है, बल्कि यह मतदाता सूची की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी चर्चा का विषय बन चुका है।
यदि जांच में इसे तकनीकी गलती माना जाता है तो समय रहते सुधार संभव है, लेकिन इस घटना ने यह जरूर संकेत दिया है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसके सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत एवं त्रुटिरहित बनाने की आवश्यकता है।
लोकतंत्र की मजबूती का आधार सही मतदाता सूची है और प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम उसमें दर्ज होना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।







