हरदोई

दर्दनाक सड़क हादसा : दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

ओवरलोड भूसा लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से युवक की मौत, हेलमेट होता तो बच सकती थी जान

रिपोर्ट: अनुराग गुप्ता

सण्डीला (हरदोई)। हरदोई जिले के सण्डीला क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक निजी आइसक्रीम फैक्ट्री में कार्यरत युवक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इस हादसे के बाद मृतक के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। युवक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिनके सिर से अब पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, अमित गुप्ता पुत्र गंगाराम हरदोई जिले के कोथवा क्षेत्र के निवासी थे। वह एक आइसक्रीम फैक्ट्री में काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। मेहनत-मजदूरी के सहारे ही उनका परिवार चलता था। रोज की तरह बुधवार की सुबह भी अमित अपनी ड्यूटी पूरी करके फैक्ट्री से घर लौट रहे थे। उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।

सल्हेरा गांव के पास हुआ भीषण हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब अमित गुप्ता सल्हेरा गांव के निकट पहुंचे, तभी सामने से आ रही भूसा लदी एक ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि अमित गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग मौके पर दौड़े और उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं दुर्घटना के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

हेलमेट नहीं पहनना पड़ा भारी

स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के समय अमित ने हेलमेट नहीं पहना था। दुर्घटना में उनके सिर में गंभीर चोट आई, जो मौत का प्रमुख कारण बनी। लोगों का मानना है कि यदि अमित हेलमेट पहने होते तो शायद उनकी जान बच सकती थी। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। कई बार गंभीर दुर्घटनाओं में भी हेलमेट पहनने से जान बच जाती है। ऐसे में सभी वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करते हुए हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करना चाहिए।

पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

अमित गुप्ता की मौत की खबर जैसे ही उनके घर पहुंची, पूरे परिवार में कोहराम मच गया। उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पति की असमय मौत का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

मृतक अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनका बेटा गोलू अभी महज दो वर्ष का है, जबकि बेटी निष्ठा की उम्र लगभग तीन वर्ष है। इतनी कम उम्र में दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाना पूरे क्षेत्र के लोगों को भावुक कर रहा है।

परिवार के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट

अमित परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे। उनकी आय से ही घर का खर्च चलता था। अब उनकी अचानक मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं को इस परिवार की मदद के लिए आगे आना चाहिए ताकि पत्नी और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

ग्रामीणों ने बताया कि अमित मेहनती और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी असमय मृत्यु से गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है। अंतिम दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की।

सड़क सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

इस हादसे के बाद क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों के संचालन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़कों पर अक्सर भूसा और अन्य सामान से लदी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां तेज रफ्तार में दौड़ती नजर आती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

शोक में डूबा पूरा क्षेत्र

अमित गुप्ता की मौत ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर दो मासूम बच्चों का भविष्य अब कैसे संवर पाएगा। इस दर्दनाक हादसे ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया और दो बच्चों को कम उम्र में ही पिता के प्यार से वंचित कर दिया।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और फरार ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक की तलाश जारी है। वहीं मृतक के परिवार को न्याय दिलाने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी तेज होती जा रही है।

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