डेढ़ लाख में होता था नाबालिग लड़कियों का सौदा! मदद और शादी का झांसा देकर राजस्थान में बेचता था गिरोह, लखनऊ पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मानव तस्करी का एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। गरीब, बेसहारा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की नाबालिग लड़कियों को मदद, दोस्ती और शादी का सपना दिखाकर राजस्थान में बेचने वाले एक संगठित गिरोह का लखनऊ पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह वर्षों से सुनियोजित तरीके से नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर उन्हें पैसों के बदले राजस्थान भेजता था, जहां उनकी शादी कराई जाती थी।
इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और राजस्थान में सक्रिय अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
गरीब और बेसहारा लड़कियां थीं गिरोह के निशाने पर
पुलिस जांच में पता चला है कि गिरोह खासतौर पर ऐसी लड़कियों को निशाना बनाता था, जिनके माता-पिता नहीं थे या जो बेहद गरीब परिवारों से संबंध रखती थीं। आरोपियों को लगता था कि ऐसे परिवारों की ओर से शिकायत दर्ज होने की संभावना कम रहती है और मामला आसानी से दबाया जा सकता है।
गिरोह के सदस्य पहले लड़कियों से दोस्ती करते थे। उन्हें घूमाने, नए कपड़े दिलाने और बेहतर जिंदगी का सपना दिखाकर विश्वास में लिया जाता था। इसके बाद उन्हें अपने साथ ले जाकर राजस्थान भेजने की तैयारी की जाती थी।
दो नाबालिग बहनों के लापता होने से खुला राज
पूरा मामला उस समय सामने आया जब मोहनलालगंज क्षेत्र के गनिहार गांव से 12 और 16 वर्ष की दो नाबालिग बहनें अचानक लापता हो गईं। लड़कियों की दादी ने पुलिस को सूचना दी और आरोप लगाया कि एक रिश्तेदार तथा उसकी सहयोगी उन्हें उनकी मां से मिलाने के बहाने अपने साथ ले गए हैं।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने गंभीरता दिखाते हुए मामला दर्ज किया और लड़कियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित कर दीं। पुलिस ने तकनीकी निगरानी, मुखबिर तंत्र और मैनुअल जांच के साथ-साथ बड़े स्तर पर सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया।
150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच से मिली सफलता
लड़कियों के मोबाइल फोन बंद होने के कारण पुलिस के सामने चुनौती और भी बड़ी थी। इसके बावजूद जांच टीमों ने करीब 150 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की। कई दिनों तक लगातार की गई निगरानी और तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। लगातार प्रयासों के बाद दोनों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इसके बाद जब उनके बयान दर्ज किए गए तो पूरे गिरोह की साजिश सामने आने लगी।
शादी के नाम पर राजस्थान भेजी जा रही थीं लड़कियां
जांच में पता चला कि दोनों नाबालिग लड़कियों को राजस्थान के कोटा जिले भेजने की तैयारी की जा रही थी। वहां पहले से मौजूद गिरोह के सदस्य पैसों के बदले उनकी शादी कराने वाले थे।
पुलिस के अनुसार यह कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि लंबे समय से चल रहा एक संगठित नेटवर्क था। लड़कियों की तस्वीरें पहले राजस्थान में मौजूद संपर्कों को भेजी जाती थीं। तस्वीरें पसंद आने के बाद पैसों का सौदा तय किया जाता था और फिर लड़कियों को वहां भेज दिया जाता था।
रायबरेली से संचालित हो रहा था नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार महिला आरोपी प्रिया पटेल उर्फ शीला ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वर्ष 2020 में एक शादी समारोह के दौरान उसकी मुलाकात राजस्थान के कोटा की रहने वाली सोनम नामक महिला से हुई थी।
सोनम ने उसे बताया था कि गरीब और सुंदर लड़कियों की राजस्थान में शादी कराकर अच्छा पैसा कमाया जा सकता है। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा और धीरे-धीरे यह अवैध कारोबार शुरू हो गया। प्रिया अपने साथी अनुराग यादव के साथ रायबरेली में रह रही थी। दोनों ने मोहम्मद अख्तर के साथ मिलकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों की पहचान करता था और उन्हें बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाता था।
दोस्ती, घूमाने और नए कपड़ों का दिया जाता था लालच
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लड़कियों को पहले विश्वास में लेने का प्रयास करते थे। उन्हें अच्छे कपड़े दिलाने, बाहर घुमाने और बेहतर जीवन का सपना दिखाया जाता था।
इसके बाद उन्हें रायबरेली लाया जाता था, जहां उनकी तस्वीरें खींचकर व्हाट्सएप के माध्यम से राजस्थान भेजी जाती थीं। तस्वीरों के आधार पर लड़कियों का चयन होता था और फिर सौदे की रकम तय की जाती थी। जब भुगतान की सहमति मिल जाती थी, तब लड़कियों को राजस्थान भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती थी।
एक लड़की के बदले मिलते थे डेढ़ लाख रुपये
पुलिस के मुताबिक आरोपी प्रिया पटेल ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि प्रत्येक लड़की की शादी तय कराने के एवज में उसे लगभग एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक मिलते थे।
यह भी पता चला है कि गिरोह इससे पहले भी दो अन्य बहनों को राजस्थान भेज चुका था। उन मामलों की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नेटवर्क कितना बड़ा है और कितनी लड़कियां इसकी शिकार बन चुकी हैं।
रिश्तेदार की मदद से रची गई साजिश
मौजूदा मामले में एक नाबालिग रिश्तेदार की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार उसी की मदद से दोनों बहनों को घर से बाहर निकाला गया था।
आरोपियों ने लड़कियों को यह कहकर अपने साथ लिया कि वे उन्हें उनकी मां से मिलवाने जा रहे हैं, जिनसे वे कई वर्षों से नहीं मिली थीं। भावनात्मक दबाव और विश्वास का फायदा उठाकर उन्हें अपने साथ ले जाया गया।
राजस्थान कनेक्शन की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस ने मामले में इस्तेमाल की गई दो गाड़ियों को भी बरामद कर लिया है। साथ ही राजस्थान में सक्रिय सोनम, भूपेंद्र चौधरी और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल मानव तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि नाबालिग लड़कियों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध है। इसलिए पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए विस्तृत जांच जारी है।
समाज के लिए गंभीर चेतावनी
यह घटना बताती है कि मानव तस्करी के गिरोह अब नए-नए तरीके अपनाकर गरीब और असहाय परिवारों को निशाना बना रहे हैं। सोशल संपर्क, दोस्ती, शादी और रोजगार जैसे बहानों का इस्तेमाल कर नाबालिगों को फंसाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए परिवारों को जागरूक होना होगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देनी होगी। साथ ही प्रशासन को भी ऐसे नेटवर्कों पर लगातार निगरानी रखनी होगी ताकि मासूम बच्चियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
लखनऊ पुलिस की इस कार्रवाई को मानव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे नेटवर्क के हर सदस्य तक पहुंचकर उसे कानून के दायरे में लाना है।








