17 अक्टूबर 2026 10:00 अपराह्न

बेटियों का दम : ‘एक दिन की डीएम’ बन साक्षी दूबे ने संभाली कमान, मिशन शक्ति से जागा नया हौसला

देवरिया कलेक्ट्रेट में मिशन शक्ति कार्यक्रम के दौरान साक्षी दूबे एक दिन की जिलाधिकारी के रूप में अधिकारियों से संवाद करती हुईं और जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के साथ सम्मान ग्रहण करते हुए

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✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया। जब बेटियों को अवसर मिलता है, तो वे केवल सपने ही नहीं देखतीं, बल्कि उन्हें जीकर दिखाती भी हैं। कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला देवरिया के कलेक्ट्रेट परिसर में, जहां मिशन शक्ति फेज-5 (द्वितीय चरण) के अंतर्गत आयोजित “एक दिन की जिलाधिकारी” कार्यक्रम ने बालिकाओं के आत्मविश्वास को नई उड़ान दी। इस अनोखी पहल के तहत चयनित छात्रा साक्षी दूबे ने एक दिन के लिए जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाली और प्रशासनिक कामकाज को बेहद करीब से समझा।

नेतृत्व का मिला वास्तविक अनुभव

यह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि बेटियों को नेतृत्व और जिम्मेदारी का वास्तविक अनुभव देने की एक गंभीर और प्रभावशाली कोशिश थी। साक्षी दूबे ने जिलाधिकारी के कार्यालय में बैठकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सीधे संवाद किया और प्रशासनिक प्रक्रिया के हर पहलू को जानने की कोशिश की। उनकी जिज्ञासा और आत्मविश्वास ने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया।

जनहित मुद्दों पर दिखी गहरी समझ

साक्षी ने जनहित से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों से सवाल किए और यह समझने का प्रयास किया कि आम लोगों की समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाता है। योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर निर्णय लेने की प्रक्रिया तक, उन्होंने हर बारीकी को समझने में गहरी रुचि दिखाई। यह अनुभव उनके लिए न सिर्फ प्रेरणादायक रहा, बल्कि उनके भविष्य के सपनों को भी एक नई दिशा देने वाला साबित हुआ।

डीएम दिव्या मित्तल ने बढ़ाया हौसला

कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब जिलाधिकारी श्रीमती दिव्या मित्तल स्वयं मौजूद रहीं और उन्होंने बालिकाओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, जरूरत सिर्फ उन्हें सही मंच और अवसर देने की है। उन्होंने छात्राओं को बड़े सपने देखने, चुनौतियों से न घबराने और लगातार मेहनत करने का संदेश दिया।

दिव्या मित्तल ने यह भी कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे पाने की लगन हो, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। उनका यह संदेश बालिकाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा बनकर उभरा।

बालिकाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह

कार्यक्रम के दौरान यह साफ नजर आया कि बालिकाओं में प्रशासनिक कार्यों को लेकर जबरदस्त उत्साह है। वे न केवल सीखना चाहती हैं, बल्कि आगे बढ़कर नेतृत्व भी करना चाहती हैं। कई छात्राओं ने अधिकारियों से सवाल पूछे और अपने करियर को लेकर भी मार्गदर्शन लिया।

प्रशासनिक जिम्मेदारियों की मिली समझ

इस पहल की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ सैद्धांतिक बातें नहीं हुईं, बल्कि छात्राओं को प्रशासनिक व्यवस्था का वास्तविक अनुभव कराया गया। इससे उन्हें यह समझने का मौका मिला कि एक जिलाधिकारी की जिम्मेदारियां कितनी व्यापक और चुनौतीपूर्ण होती हैं।

संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे बालिकाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक मजबूत कदम बताया। उनका मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल छात्राओं को प्रेरित करते हैं, बल्कि उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर और सजग भी बनाते हैं।

साक्षी का अनुभव बना प्रेरणा

साक्षी दूबे ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह दिन उनके जीवन का सबसे खास दिन रहेगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम ने उनके अंदर एक नया आत्मविश्वास जगाया है और अब वे अपने सपनों को साकार करने के लिए और भी अधिक मेहनत करेंगी। उनकी बातों में झलकता आत्मविश्वास इस पहल की सफलता की कहानी खुद बयां कर रहा था।

मिशन शक्ति के तहत आयोजित यह कार्यक्रम यह साबित करता है कि यदि बेटियों को सही दिशा और अवसर मिले, तो वे हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। यह पहल न केवल उन्हें सशक्त बनाती है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव की नींव भी रखती है।

अंत में, “एक दिन की जिलाधिकारी” कार्यक्रम सिर्फ एक दिन का अनुभव नहीं, बल्कि एक ऐसी सोच का प्रतीक है, जो बेटियों को आगे बढ़ने, नेतृत्व करने और समाज में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करती है। देवरिया की इस पहल ने यह संदेश साफ कर दिया है कि आने वाला समय बेटियों का है—और वे पूरी मजबूती के साथ इसे हासिल करने के लिए तैयार हैं।

FAQ

यह कार्यक्रम किस उद्देश्य से आयोजित किया गया था?

इसका उद्देश्य बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और प्रशासनिक समझ विकसित करना था।

“एक दिन की जिलाधिकारी” में क्या होता है?

चयनित छात्रा को एक दिन के लिए डीएम की भूमिका दी जाती है, जिससे वह प्रशासनिक कार्यों को समझ सके।

साक्षी दूबे को क्या अनुभव मिला?

उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली, निर्णय प्रक्रिया और जनहित मुद्दों की गहरी समझ मिली।

मिशन शक्ति क्या है?

यह उत्तर प्रदेश सरकार की पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाना है।

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