16 अक्टूबर 2026 5:25 अपराह्न

भगत सिंह जयंती पर इप्टा ने शहीदे आजम को किया याद, कलाकारों ने युवा पीढ़ी को दिया नई दिशा का संदेश

चाईबासा में इप्टा द्वारा भगत सिंह जयंती पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम की तस्वीर, जिसमें कलाकार और सदस्य भगत सिंह के चित्र के साथ मौजूद हैं।

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ब्यूरो रिपोर्ट

चाईबासा. चाईबासा के गांधी टोला में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की चाईबासा इकाई की ओर से शहीदे आजम भगत सिंह की जयंती श्रद्धा और वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में इप्टा के कलाकारों और सदस्यों ने भगत सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने भगत सिंह के जीवन, उनके क्रांतिकारी विचारों और देश की स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष को याद करते हुए वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल भगत सिंह की जयंती मनाना नहीं, बल्कि उनके विचारों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना और युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना भी रहा। इप्टा के कलाकारों ने अपने वक्तव्यों और गीतों के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक विरासत तथा आज के भारत के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियों को रेखांकित किया।

भगत सिंह के सपनों के भारत पर हुई चर्चा

कार्यक्रम में इप्टा चाईबासा के संस्थापक तरुण मुहम्मद ने भगत सिंह के विचारों को याद करते हुए कहा कि शहीदे आजम ने ऐसे स्वतंत्र भारत की कल्पना की थी, जहां आम नागरिक को गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से जूझना न पड़े। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के दशकों बाद भी समाज के सामने कई ऐसी चुनौतियां मौजूद हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

तरुण मुहम्मद के अनुसार, भगत सिंह की जयंती मनाने का वास्तविक अर्थ उनके विचारों को समझना और सामाजिक बदलाव के लिए अपनी भूमिका तय करना है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि देश और समाज को बेहतर बनाने के लिए नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भगत सिंह का सपना केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सामाजिक और आर्थिक समानता पर आधारित व्यवस्था की कल्पना करते थे। इसलिए उनकी जयंती नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का अवसर भी है।

क्रांतिकारी विचारों और संघर्ष को किया याद

इप्टा के सचिव संजय चौधरी ने भगत सिंह के जीवन और उनके प्रारंभिक वैचारिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगत सिंह बचपन से ही देश और समाज की परिस्थितियों को लेकर गंभीरता से सोचते थे। युवावस्था में उनके भीतर स्वतंत्रता और परिवर्तन की तीव्र आकांक्षा विकसित हुई, जिसने उन्हें क्रांतिकारी आंदोलन की ओर प्रेरित किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगत सिंह के जीवन के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में युवाओं के बीच विशेष प्रेरणा का स्रोत बना। उनके लेखन, विचारों और राजनीतिक गतिविधियों को समझे बिना उनके योगदान का समग्र मूल्यांकन संभव नहीं है।

इप्टा के कलाकारों ने इस बात पर भी जोर दिया कि भगत सिंह को केवल एक वीर शहीद के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है। उनके विचारों, पुस्तकों के प्रति रुचि, सामाजिक समानता की अवधारणा और देश की व्यवस्था को लेकर उनके प्रश्नों को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

भगत सिंह के संघर्ष और ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख

कार्यक्रम के दौरान नरेश राम ने भगत सिंह के संघर्ष और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उनकी गतिविधियों का उल्लेख किया। उन्होंने भगत सिंह के विचारों और महात्मा गांधी की अहिंसा की विचारधारा के बीच मौजूद अंतर पर चर्चा की।

उन्होंने भगत सिंह से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय विधान सभा में बम फेंकने की घटना ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की उनकी क्रांतिकारी रणनीति का हिस्सा थी। इसके बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को ब्रिटिश सरकार ने फांसी की सजा दी।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह के जीवन और बलिदान को समझने के लिए उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उनका संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर का हिस्सा था, जब देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विभिन्न धाराओं और विचारधाराओं के माध्यम से प्रतिरोध चल रहा था।

युवाओं की भूमिका पर इप्टा कलाकार ने जताई चिंता

इप्टा की कलाकार खुशबू राम ने वर्तमान समय में युवाओं के सामने मौजूद सामाजिक चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक रूप से जयंती मनाने से भगत सिंह के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि पूरी नहीं हो सकती। उनके अनुसार, युवाओं को नशे और जुए जैसी बुरी आदतों से दूर रखने तथा उन्हें शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के पास ऊर्जा और क्षमता दोनों हैं। यदि इस ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल किया जाए तो समाज में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपने भविष्य के प्रति गंभीर रहने और ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की अपील की, जो उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ परिवार और समाज को भी प्रभावित करती हैं।

खुशबू राम ने कहा कि भगत सिंह की जयंती का संदेश तभी सार्थक होगा, जब युवा उनके साहस, अध्ययनशीलता और सामाजिक सरोकारों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करेंगे।

गीत के जरिए कलाकारों ने भरा जोश

कार्यक्रम के दौरान इप्टा के अध्यक्ष कैसर परवेज तथा अन्य कलाकारों ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किया। गीत के माध्यम से कलाकारों ने स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों और सामाजिक परिवर्तन की भावना को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

गीत प्रस्तुति के दौरान कार्यक्रम स्थल का माहौल उत्साहपूर्ण हो गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के जरिए लोगों को बेहतर और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया।

इप्टा चाईबासा की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति को सामाजिक चेतना के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया। इप्टा लंबे समय से रंगमंच और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर संवाद की परंपरा से जुड़ा रहा है। इसी क्रम में भगत सिंह जयंती का आयोजन भी विचार और संस्कृति को जोड़ने वाला कार्यक्रम रहा।

कई सदस्य और कलाकार रहे मौजूद

कार्यक्रम में इप्टा चाईबासा के संस्थापक तरुण मुहम्मद, अध्यक्ष कैसर परवेज, सचिव संजय चौधरी, शीतल बागे, राजू प्रजापति, खुशबू राम, नरेश राम, शिव शंकर राम, किशोर साव सहित इप्टा के अनेक सदस्य और कलाकार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भगत सिंह के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके जीवन तथा विचारों को याद किया। वक्ताओं ने युवाओं और आम नागरिकों से सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

चाईबासा के गांधी टोला में आयोजित यह कार्यक्रम इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि भगत सिंह को याद करने का अर्थ केवल उनके बलिदान को स्मरण करना नहीं, बल्कि उनके विचारों और सामाजिक सरोकारों पर निरंतर संवाद कायम रखना भी है। इप्टा कलाकारों ने सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से इसी विचार को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

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