इरफान अली लारी की रिपोर्ट
कुशीनगर। नेपाल में पिछले तीन दिनों से हो रही रुक-रुककर बारिश और गंडक यानी नारायणी नदी में छोड़े जा रहे भारी मात्रा में पानी ने कुशीनगर के सीमावर्ती और निचले इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा दिया है। नदी का बढ़ता जलस्तर अब गांवों की बस्तियों तक पहुंच चुका है। हरिहरपुर, मरचहवा, शिवपुर, महदेवा और सालिकपुर समेत आसपास के कई गांवों में पानी दाखिल होने से जनजीवन प्रभावित हो गया है। खेत, रास्ते और निचले भूभाग जलमग्न होने के कारण ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल हो गई है।
प्रशासन के मुताबिक बाढ़ की चपेट में करीब 1400 परिवार आए हैं। इनमें से लगभग 600 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर छितौनी तटबंध के आसपास शरण दी गई है। प्रभावित लोगों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने हेल्थ कैंप लगाया है, जबकि राहत एवं बचाव अभियान के लिए पीएसी की फ्लड वाहिनी और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है।
नेपाल से छोड़ा गया भारी पानी, कुशीनगर की ओर बढ़ा दबाव
गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर का सबसे बड़ा कारण नेपाल में हो रही बारिश और वहां से नदी में छोड़ा जा रहा पानी बताया जा रहा है। जिलाधिकारी संजय चौहान के अनुसार रविवार रात करीब आठ बजे तक लगभग 5 लाख 1 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। यह पानी अब कुशीनगर जिले की सीमा की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में नदी के आसपास के निचले क्षेत्रों में जलस्तर और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
नदी में पानी का दबाव बढ़ने के साथ ही तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। कई गांवों तक पहुंचने वाले रास्ते पानी में डूब चुके हैं। इससे ग्रामीणों के लिए दैनिक जरूरतों, आवागमन और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में कठिनाई पैदा हो गई है।
प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए प्रभावित गांवों और तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील स्थानों पर अधिकारियों और राहत दलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
1400 परिवार बाढ़ से प्रभावित, 600 परिवारों ने तटबंध पर ली शरण
बाढ़ की गंभीर होती स्थिति का सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ा है, जिनके घर निचले इलाकों में हैं। प्रशासन के अनुसार करीब 1400 परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पानी बढ़ने की स्थिति को देखते हुए लगभग 600 परिवारों को पहले ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है।
इन परिवारों को छितौनी तटबंध के पास बाढ़ चौकी के आसपास ठहराया गया है। प्रशासन की ओर से उनके लिए भोजन और रहने की व्यवस्था की गई है। राहत शिविरनुमा व्यवस्था में लोगों की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रभावित परिवारों के साथ पशुधन की सुरक्षा भी प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी व्यक्ति अथवा पशु को बाढ़ के कारण नुकसान न पहुंचे और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
डीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण
रविवार को जिलाधिकारी संजय चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर जलस्तर, प्रभावित गांवों की स्थिति, राहत व्यवस्था और बचाव कार्यों की जानकारी ली। डीएम ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ की स्थिति को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से तटबंधों और संवेदनशील स्थलों की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया जाए।
निरीक्षण के दौरान डीएम ने छितौनी तटबंध और विरभार ठोकर का भी जायजा लिया। उन्होंने नदी के बढ़ते दबाव और तटबंध की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली।
कटान और रिसाव पर निगरानी के निर्देश
गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच तटबंधों की सुरक्षा प्रशासन के लिए सबसे अहम चुनौती बन गई है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जाए। कहीं कटान, रिसाव या तटबंध को किसी तरह का नुकसान दिखाई देता है तो उस पर बिना देरी किए कार्रवाई की जाए।
तटबंधों की निगरानी के साथ-साथ नदी के किनारे बसे गांवों की स्थिति पर भी नजर रखने को कहा गया है। प्रशासन का प्रयास है कि पानी बढ़ने की स्थिति में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
अधिकारियों को विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में पुलिस, राजस्व, स्वास्थ्य और राहत-बचाव दल एक साथ कार्रवाई कर सकें।
पीएसी फ्लड वाहिनी और एसडीआरएफ की तैनाती
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रशासन ने पीएसी की फ्लड वाहिनी और एसडीआरएफ की टीम को तैनात किया है। इन टीमों को जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने और आपात परिस्थितियों में बचाव अभियान चलाने के लिए तैयार रखा गया है।
राजस्व, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ कैंप लगाए जाने से बाढ़ प्रभावित लोगों को प्राथमिक चिकित्सा और स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
बाढ़ के दौरान दूषित पानी, गंदगी और जलभराव के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और चिकित्सा सुविधा प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गांवों के रास्ते डूबे, आवाजाही पर असर
नारायणी नदी का पानी बढ़ने के कारण निचले इलाकों के संपर्क मार्गों पर भी असर पड़ा है। कई जगह रास्ते पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। इससे ग्रामीणों की सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई है और गांवों से बाहर निकलने के लिए लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों से कहा गया है कि वे नदी के किनारे अथवा जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं।
जनहानि रोकना प्रशासन की प्राथमिकता
जिलाधिकारी संजय चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राहत एवं बचाव अभियान का मुख्य उद्देश्य जनहानि और पशुहानि को रोकना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को बिना देरी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री तथा जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की निगरानी इस बात पर भी है कि बाढ़ का पानी बढ़ने की स्थिति में किन गांवों को तत्काल खाली कराने की आवश्यकता पड़ सकती है।
जलस्तर पर नजर, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
नारायणी नदी में पानी के बढ़ते दबाव के बीच कुशीनगर प्रशासन लगातार हालात पर नजर रख रहा है। नेपाल में बारिश और नदी में छोड़े जा रहे पानी के कारण जलस्तर में बदलाव की संभावना बनी हुई है। इसलिए तटवर्ती गांवों में निगरानी और राहत व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है।
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। नदी तथा जलभराव वाले स्थानों के आसपास जाने से बचें और बच्चों एवं बुजुर्गों को विशेष रूप से सुरक्षित रखें।
फिलहाल कुशीनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की चुनौती दोहरी है—एक ओर बढ़ते जलस्तर के बीच तटबंधों को सुरक्षित रखना और दूसरी ओर प्रभावित परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना। नेपाल से आने वाले पानी का दबाव कम होने तक निचले इलाकों में स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखना जरूरी होगा।













