कानपुर

पानी की बाल्टी छूने पर दलित किशोर से हैवानियत! जूते में पानी पिलाया, निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। सचेंडी थाना क्षेत्र में कथित तौर पर ऊंची जाति के कुछ युवकों ने अनुसूचित जाति के एक किशोर के साथ केवल इसलिए अमानवीय व्यवहार किया, क्योंकि उसने प्यास लगने पर पानी की बाल्टी छू ली थी। आरोप है कि आरोपियों ने किशोर को जातिसूचक गालियां दीं, निर्वस्त्र किया, बेरहमी से पीटा और फिर जूते में पानी भरकर जबरन पिलाया। इस बर्बरता में किशोर का हाथ भी टूट गया।

घटना के सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश है। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर चार आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

खेत में काम करते वक्त लगी प्यास, फिर शुरू हुई दरिंदगी

जानकारी के अनुसार, यह घटना 2 मई की रात की बताई जा रही है। पीड़ित किशोर खेत में काम कर रहा था। देर रात मेहनत के दौरान उसे तेज प्यास लगी। आसपास पानी की तलाश में वह गांव में स्थित सरकारी पानी की टंकी के पास पहुंच गया। वहां एक बाल्टी और जग रखा हुआ था।

बताया जा रहा है कि किशोर ने उसी बाल्टी से पानी पीना शुरू किया। आरोप है कि तभी वहां मौजूद संजय नामक युवक ने उसे देख लिया। इसके बाद उसने अपने भाई दीपक और दो अन्य साथियों सागर और पटिया को बुला लिया। चारों ने मिलकर किशोर के साथ बर्बरता शुरू कर दी।

जातिसूचक गालियां देकर कपड़े उतरवाए

पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपियों ने पहले किशोर को जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। इसके बाद उसे जबरन निर्वस्त्र कर दिया गया। आरोपियों ने कथित तौर पर उसे “मुर्गा” बनने के लिए मजबूर किया और फिर लाठी-डंडों, लात-घूंसों से उसकी पिटाई की।

मारपीट इतनी गंभीर थी कि किशोर का हाथ फ्रैक्चर हो गया। पीड़ित दर्द से कराहता रहा, लेकिन आरोपी लगातार उसे प्रताड़ित करते रहे। घटना के दौरान आसपास मौजूद कुछ लोगों ने शोर-शराबा सुना तो मौके की ओर दौड़े।

जूते पर थूककर चटवाया, उसी में पानी भरकर पिलाया

घटना का सबसे शर्मनाक पहलू वह है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। आरोप है कि आरोपियों ने किशोर को जूते पर थूकने के लिए मजबूर किया और फिर वही थूक चटवाया। इसके बाद उसी जूते में पानी भरकर उसे जबरन पिलाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम मानवता को शर्मसार करने वाला था। कई लोग मौके पर पहुंचे और बीचबचाव की कोशिश की। ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद आरोपी वहां से फरार हो गए।

गांव में तनाव, लोगों में गुस्सा

घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जातिगत भेदभाव और सामाजिक अहंकार की वजह से इस तरह की घटनाएं समाज को बांटने का काम करती हैं। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

कुछ लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ग्रामीण मौके पर नहीं पहुंचते तो घटना और भी भयावह हो सकती थी। पीड़ित परिवार फिलहाल डरा हुआ है और न्याय की मांग कर रहा है।

पीड़ित पिता ने दर्ज कराया मुकदमा

घटना के बाद पीड़ित किशोर के पिता ने सचेंडी थाने में तहरीर देकर चारों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संजय, दीपक, सागर और पटिया के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

मामले में एससी-एसटी एक्ट के अलावा मारपीट, धमकी और उत्पीड़न से जुड़ी धाराएं भी लगाई गई हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है।

पुलिस ने क्या कहा?

सचेंडी थाना प्रभारी दीनानाथ ने बताया कि पीड़ित पक्ष की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। हालांकि अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

जातीय भेदभाव पर फिर खड़े हुए सवाल

यह घटना एक बार फिर समाज में मौजूद जातीय भेदभाव और छुआछूत जैसी मानसिकता पर सवाल खड़े कर रही है। संविधान और कानून समानता की बात करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी कई जगहों पर दलित समाज के लोगों को अपमान और हिंसा का सामना करना पड़ता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल मुकदमा दर्ज कर देना काफी नहीं है। ऐसे मामलों में त्वरित न्याय और कठोर सजा जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जाति के नाम पर इस तरह की हैवानियत करने की हिम्मत न जुटा सके।

मानवता को झकझोरने वाली घटना

कानपुर की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपी उस सोच की भी तस्वीर है, जो आज भी इंसानों को जाति के आधार पर बांटती है। प्यास बुझाने के लिए पानी पीना किसी का अपराध नहीं हो सकता, लेकिन कथित तौर पर इसी बात पर एक किशोर को जिस तरह प्रताड़ित किया गया, उसने संवेदनशील लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है।

अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा मिलेगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।

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