दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
विश्नोहरपुर। भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के नेता बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर कुश्ती विवाद को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव में कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा को पराजित करने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक और व्यक्तिगत स्तर पर साजिश रची गई। बृजभूषण सिंह का कहना है कि हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिवार के दबाव में कुछ महिला पहलवान उनके खिलाफ बयान देने के लिए तैयार हुईं।
सोमवार को विश्नोहरपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में पूर्व सांसद ने कुश्ती विवाद से जुड़े कई मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने हरियाणा की कुश्ती अकादमियों, महिला पहलवानों के आरोपों, अदालत में सामने आए तथ्यों और पहलवानों के आंदोलन के राजनीतिक स्वरूप को लेकर भी अपनी बात रखी।
चुनावी मुकाबले के बाद साजिश का लगाया आरोप
बृजभूषण सिंह ने दावा किया कि कुश्ती संघ के चुनाव में दीपेंद्र हुड्डा को हराने के बाद उनके खिलाफ माहौल बनाया गया। उनके मुताबिक, इसके पीछे राजनीतिक कारण प्रमुख थे। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के परिवार का प्रभाव इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण रहा।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उन्होंने अपने बयान में पेश नहीं की। ऐसे में उनके दावों को उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बृजभूषण सिंह ने कहा कि हरियाणा में कई कुश्ती अकादमियां और अखाड़े संचालित होते हैं, लेकिन महादेव रेसलिंग एकेडमी को लेकर उन्होंने विशेष सवाल उठाए। उनका दावा है कि यह संस्था एक परिवार से जुड़ी है और इसके स्थापित होने में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
अदालत के निष्कर्ष को लेकर भी रखा अपना पक्ष
कुश्ती विवाद के दौरान सामने आए अदालत से जुड़े निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए बृजभूषण सिंह ने कहा कि ‘एक परिवार, एक अखाड़ा’ से संबंधित अदालत का निष्कर्ष उनके पक्ष अथवा उनके दावे के आधार पर नहीं था। उनके अनुसार, यह निष्कर्ष दो पीड़ित लड़कियों द्वारा अदालत में दिए गए बयानों पर आधारित था।
पूर्व सांसद ने कहा कि अदालत के फैसले से उन्हें खुशी हुई, क्योंकि उनके अनुसार इससे उन बातों की पुष्टि हुई जिन्हें वह पहले से उठाते रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत की कार्यवाही में सामने आए तथ्यों को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के संदर्भ में समझना आवश्यक है।
आरोपों और बयानों में अंतर का दावा
बृजभूषण सिंह ने महिला पहलवानों और अन्य पहलवानों की ओर से दिए गए अलग-अलग बयानों में कथित विरोधाभास का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि निगरानी समिति के समक्ष दिए गए बयान, शपथपत्र में दर्ज बातें और अदालत में दिए गए बयानों के बीच काफी अंतर दिखाई देता है।
उनका दावा है कि इस अंतर को नजरअंदाज करके पूरे मामले को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर आरोप की सच्चाई सामने लाने के लिए सभी दस्तावेजों और बयानों की निष्पक्ष तरीके से जांच जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि हिसार और रोहतक से जुड़े कुछ पहलवानों ने बजरंग पूनिया का पता दिया था। अपने ऊपर लगाए गए आरोपों के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन घटनाओं का उल्लेख किया गया, उस समय वह कथित रूप से उन पहलवानों के साथ मौजूद नहीं थे।
‘बिना स्वतंत्र पुष्टि के दुष्कर्म का आरोपी बताया गया’
बृजभूषण सिंह ने मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्र पुष्टि के बिना ही उन्हें दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों का आरोपी बताया गया। उनका कहना है कि मीडिया में किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोपों को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होनी चाहिए।
उन्होंने अपने खिलाफ चलाए गए अभियान को एक सुनियोजित साजिश बताते हुए दावा किया कि इसमें करीब 42 लोग शामिल थे। उनके मुताबिक, कुछ उद्योगपतियों ने इस कथित अभियान के लिए आर्थिक मदद भी की।
हालांकि, इन आरोपों के संबंध में भी उन्होंने पत्रकारों के समक्ष कोई स्वतंत्र दस्तावेज या प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया। इसलिए इन दावों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना उचित है।
जूनियर पहलवानों के लिए नियमों में बदलाव का किया बचाव
पूर्व सांसद ने कुश्ती प्रतियोगिताओं और ट्रायल की प्रक्रिया को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जूनियर पहलवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ट्रायल से संबंधित नियमों में बदलाव किए गए थे।
बृजभूषण सिंह का दावा है कि कुछ चर्चित पहलवान बिना निर्धारित प्रक्रिया से गुजरते हुए सीधे बड़े मुकाबलों में प्रवेश चाहते थे। उनके मुताबिक, जब इस व्यवस्था में नियमों के आधार पर बदलाव किया गया तो इसका विरोध शुरू हो गया और धीरे-धीरे यह मुद्दा राजनीतिक विवाद में बदल गया।
उन्होंने कहा कि खेलों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए एक समान और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है। उनके अनुसार, नियम किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव या लोकप्रियता के आधार पर नहीं बल्कि सभी खिलाड़ियों के लिए समान रूप से लागू होने चाहिए।
पहलवानों के आंदोलन को लेकर कांग्रेस और आप पर निशाना
बृजभूषण सिंह ने पहलवानों के आंदोलन के राजनीतिक स्वरूप पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि शुरुआत में यह आंदोलन खेल से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था, लेकिन बाद में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के राजनीतिक प्रभाव में आ गया।
उन्होंने आंदोलन को राजनीतिक दलों का ‘खिलौना’ करार देते हुए कहा कि इससे भारतीय खेल व्यवस्था को नुकसान पहुंचा। उनका यह भी कहना था कि इस पूरे विवाद का सबसे अधिक असर महिला खिलाड़ियों पर पड़ा और खेल जगत में अनावश्यक विवाद पैदा हुआ।
पूर्व सांसद के इस बयान पर राजनीतिक दलों और आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से अलग प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। फिलहाल उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को लेकर भी किया दावा
पत्रकारों से बातचीत के दौरान बृजभूषण सिंह ने उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी अपनी राय रखी। आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस की अपनी कोई मजबूत राजनीतिक ताकत नहीं है। उनके मुताबिक, कांग्रेस गठबंधन की स्थिति में समाजवादी पार्टी के सहारे चुनाव मैदान में उतर सकती है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को कमजोर बताते हुए कहा कि पार्टी के लिए अकेले चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा। हालांकि, चुनावी समीकरण समय के साथ बदल सकते हैं और वास्तविक स्थिति चुनाव के समय राजनीतिक गठबंधनों तथा उम्मीदवारों के चयन पर निर्भर करेगी।
कुश्ती विवाद फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में
बृजभूषण सिंह के ताजा बयान के बाद भारतीय कुश्ती से जुड़ा पुराना विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस में आ गया है। उनके आरोपों में कुश्ती संघ के चुनाव, हरियाणा की कुश्ती अकादमियों, महिला पहलवानों के बयान, अदालत में सामने आए तथ्यों और पहलवानों के आंदोलन के राजनीतिक प्रभाव जैसे कई मुद्दे शामिल हैं।
पूरे प्रकरण में अलग-अलग पक्षों की ओर से समय-समय पर अलग दावे किए जाते रहे हैं। ऐसे में किसी भी आरोप या प्रत्यारोप को अंतिम तथ्य मानने के बजाय अदालत के आदेशों, आधिकारिक दस्तावेजों और स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों के आधार पर मामले को समझना महत्वपूर्ण है।
बृजभूषण सिंह ने अपने ताजा बयान में जहां अपने खिलाफ लगे आरोपों को राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया, वहीं पहलवानों के आंदोलन और उसके पीछे कथित राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में पूर्व घटनाक्रम और विभिन्न स्तरों पर दिए गए बयानों का हवाला दिया।
कुश्ती विवाद से जुड़े सभी पक्षों के दावों और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आए तथ्यों के बीच अंतर को समझना इस पूरे मामले को निष्पक्ष रूप से देखने के लिए आवश्यक है। फिलहाल बृजभूषण सिंह के ताजा बयान ने इस पुराने विवाद पर राजनीतिक चर्चा को फिर तेज कर दिया है।













