प्रशांत भूषण की रिपोर्ट
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले में कला, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय फिल्म निर्माता-निर्देशक, लेखक तथा इप्टा चाईबासा के संस्थापक तरुण मुहम्मद को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कोल्हान विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 के अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं शॉल प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान आदिवासी कला-संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनके निरंतर योगदान के लिए दिया गया।
कार्यक्रम में जिले के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तथा इप्टा से जुड़े सदस्यों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सम्मान समारोह के दौरान आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
कला और संस्कृति के क्षेत्र में तरुण मुहम्मद का योगदान
तरुण मुहम्मद लंबे समय से कला एवं संस्कृति के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को जनमानस तक पहुंचाने के कार्य से जुड़े रहे हैं। फिल्म निर्माण, निर्देशन और लेखन के साथ उन्होंने रंगमंच तथा जनसांस्कृतिक गतिविधियों को भी आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है। इप्टा चाईबासा के संस्थापक के रूप में उनका जुड़ाव विशेष रूप से जनपक्षीय सांस्कृतिक गतिविधियों से रहा है।
जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किए जाने को कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम में यह संदेश उभरकर सामने आया कि स्थानीय कला, लोकनृत्य, परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षित करने में कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आदिवासी संस्कृति और विरासत के संरक्षण का संदेश
झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से आदिवासी समाज की जीवनशैली, परंपरा, अधिकार और विकास से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी गई। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण के साथ सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान पर चर्चा का वातावरण बना।
महोत्सव के माध्यम से जनजातीय समाज को अपने संवैधानिक एवं सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से यह रेखांकित किया गया कि विकास की प्रक्रिया में आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और प्रकृति से जुड़े उनके पारंपरिक संबंधों का संरक्षण आवश्यक है।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ महोत्सव का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज के अनुरूप स्वागत से हुई। इसके बाद मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का विधिवत शुभारंभ किया।
समारोह में मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार तथा परिवहन विभाग दीपक बिरुआ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में मंझगांव विधायक निरल पूर्ति, मनोहरपुर विधायक जगत माझी, जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन तथा चाईबासा नगर परिषद अध्यक्ष नितिन प्रकाश शामिल रहे।
अतिथियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक जनप्रतिनिधित्व प्रदान किया। इस दौरान आदिवासी समाज के सांस्कृतिक गौरव, परंपरागत जीवन पद्धति और अधिकारों की चर्चा के साथ युवाओं को अपनी जड़ों तथा स्थानीय विरासत से जुड़े रहने का संदेश दिया गया।
छऊ नृत्य और नुक्कड़ नाटक ने मोहा मन
महोत्सव में आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। विभिन्न कला दलों के कलाकारों ने सांस्कृतिक नृत्य, छऊ नृत्य और नुक्कड़ नाटक की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सभागार में मौजूद दर्शकों को आकर्षित किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी जीवनशैली और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया गया। लोककलाओं और नृत्य प्रस्तुतियों में स्थानीय परंपराओं की झलक दिखाई दी। वहीं नुक्कड़ नाटक के जरिए सामाजिक जागरूकता से जुड़े संदेशों को सरल और प्रभावी तरीके से दर्शकों तक पहुंचाया गया।
इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद स्थापित करना भी रहा। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया कि लोककला और रंगमंच सामाजिक चेतना के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी लिया हिस्सा
झारखंड आदिवासी महोत्सव में कोल्हान विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की मौजूदगी रही। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेने के साथ आदिवासी इतिहास, संस्कृति और लोकपरंपराओं को करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया, क्योंकि नई पीढ़ी के माध्यम से ही स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को भविष्य तक पहुंचाया जा सकता है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी क्षेत्रीय संस्कृति और लोक परंपराओं को जानने-समझने का अवसर मिलता है।
प्रशासनिक अधिकारियों और इप्टा सदस्यों की रही मौजूदगी
समारोह में जिले के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सारंडा वन प्रमंडल पदाधिकारी अभिरुप सिन्हा, परियोजना निदेशक जयदीप तिग्गा, अपर उपायुक्त किस्टो कुमार बेसरा, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी, सदर चाईबासा अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल, नजारत उपसमाहर्ता देवेन्द्र कुमार, सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बहामन टुटी तथा गोपनीय प्रभारी कुमार हर्ष सहित अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।
इप्टा चाईबासा की ओर से अध्यक्ष कैसर परवेज, सचिव संजय चौधरी, शीतल बागे, राजू प्रजापति, पप्पू मछुआ, चमरू कारवा, सुशीला पूर्ति और शिवशंकर राम सहित अन्य सदस्य भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
सम्मान से बढ़ा सांस्कृतिक कर्मियों का उत्साह
तरुण मुहम्मद को मिला यह सम्मान पश्चिमी सिंहभूम में कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय कलाकारों और सांस्कृतिक कर्मियों के लिए उत्साहवर्धक माना जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से कला और संस्कृति के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को सार्वजनिक रूप से सम्मान दिए जाने से स्थानीय कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 ने यह संदेश दिया कि किसी क्षेत्र की पहचान केवल उसके भौगोलिक स्वरूप से नहीं, बल्कि उसकी भाषा, लोककला, नृत्य, संगीत, परंपराओं और सामुदायिक जीवन से भी बनती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से इन परंपराओं को मंच मिलने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर भी मिलता है।
समारोह में प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों और तरुण मुहम्मद के सम्मान ने चाईबासा की सांस्कृतिक गतिविधियों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया। कला और सामाजिक सरोकारों को साथ लेकर चलने वाली ऐसी पहलें आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और उसके व्यापक प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।













