चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। सरयू तट के 55 घाटों को लाखों दीपों से रोशन करने के लिए इस बार बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन में 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि किसी भी तरह की कमी से बचने के लिए 32 लाख दीयों की आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। दीप प्रज्ज्वलन के लिए 55 हजार लीटर सरसों का तेल, 65 लाख बातियां और 150 किलो कपूर भी जुटाया जाएगा। आयोजन की व्यापकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हजारों छात्र-छात्राओं और वॉलंटियरों को दीप सज्जा के काम में लगाया जाएगा।
दीपोत्सव में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की आपूर्ति अयोध्याजी तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद की निगरानी में होगी। परिषद के सीईओ जयेंद्र कुमार के मुताबिक सामग्री की खरीद के लिए टेंडर खोले जा चुके हैं और फिलहाल वित्तीय समीक्षा की जा रही है। समीक्षा पूरी होने के बाद चयनित वेंडर को आपूर्ति की जिम्मेदारी दी जाएगी। वेंडर सामग्री अवध विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराएगा, जिसके माध्यम से आयोजन से जुड़ी जरूरतों के अनुसार उसे घाटों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
30 लाख दीयों का लक्ष्य, दो लाख अतिरिक्त की व्यवस्था
इस बार दीपोत्सव में 30 लाख दीयों को प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके मुकाबले 32 लाख दीयों की व्यवस्था की जा रही है। आयोजन में लाखों दीयों की सजावट के दौरान टूट-फूट अथवा अन्य कारणों से होने वाली कमी को देखते हुए अतिरिक्त दीयों की उपलब्धता जरूरी मानी जा रही है।
अयोध्या में दीपोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह शहर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा बड़ा आयोजन बन चुका है। ऐसे में दीपों की संख्या से लेकर उन्हें घाटों तक पहुंचाने और निर्धारित समय पर प्रज्ज्वलित कराने तक हर स्तर पर पहले से तैयारी की जा रही है।
स्थानीय कुम्हारों को प्राथमिकता देने की तैयारी
लाखों मिट्टी के दीयों की जरूरत के बीच स्थानीय कुम्हारों के लिए भी बड़ा अवसर पैदा हुआ है। परिषद की योजना है कि दीये बनाने वाले कुम्हारों और वेंडरों के बीच बैठक कर बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। इससे स्थानीय कारीगरों को अधिक ऑर्डर दिलाने और उनसे प्राथमिकता के आधार पर दीयों की आपूर्ति कराने का रास्ता साफ हो सकता है।
अयोध्या और आसपास के इलाकों में कुम्हार परिवार लंबे समय से मिट्टी के दीये तैयार करते आ रहे हैं। दीपोत्सव के दौरान बढ़ती मांग उनके लिए कारोबार का महत्वपूर्ण अवसर बनती है। यदि बड़े ऑर्डर स्थानीय स्तर पर वितरित किए जाते हैं तो इसका सीधा लाभ उन परिवारों को मिल सकता है, जिनकी आजीविका पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों और दीयों से जुड़ी है।
तेल, बाती और कपूर की बड़ी खेप तैयार
दीपोत्सव में लाखों दीयों को एक साथ जलाने के लिए 55 हजार लीटर सरसों के तेल की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ 65 लाख बातियों की तैयारी होगी। प्रज्ज्वलन की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले कपूर की मात्रा भी कम नहीं है। इसके लिए 150 किलो कपूर की व्यवस्था की जा रही है।
इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री जुटाने का उद्देश्य आयोजन के दौरान किसी स्तर पर कमी की स्थिति पैदा न होने देना है। दीयों की संख्या अधिक होने के कारण तेल और बातियों की समय पर उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए खरीद और आपूर्ति की प्रक्रिया को दीपोत्सव से पहले पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
34 हजार वॉलंटियरों के हाथों में होगी दीप सज्जा
सरयू तट के 55 घाटों पर लाखों दीयों को व्यवस्थित ढंग से सजाने के लिए करीब 34 हजार छात्र-छात्राओं और वॉलंटियरों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इतने बड़े मानवबल को अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ घाटों पर लगाया जाएगा, ताकि दीप सजाने और प्रज्ज्वलित करने की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी हो सके।
वॉलंटियरों के लिए 34 हजार टी-शर्ट उपलब्ध कराने की भी तैयारी है। उन्हें मोमबत्ती समेत आवश्यक सामग्री दी जाएगी। एक जैसी पोशाक से आयोजन स्थल पर वॉलंटियरों की पहचान आसान होगी और बड़ी भीड़ के बीच व्यवस्थाओं को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
दीप सज्जा का काम केवल दीये रखने तक सीमित नहीं होगा। लाखों दीयों को घाटों पर निर्धारित पैटर्न और स्थान के अनुसार सजाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होगी। इसलिए वॉलंटियरों की भूमिका इस आयोजन में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वॉलंटियरों के भोजन की भी जिम्मेदारी
हजारों वॉलंटियरों की तैनाती के साथ उनके भोजन की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती है। इस बार करीब 34 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था की जा रही है। सरयू तट के 55 घाटों पर दीप सजाने वाले वॉलंटियरों के भोजन की जिम्मेदारी तीर्थ विकास परिषद संभालेगा।
आयोजन स्थल पर लंबे समय तक काम करने वाले छात्र-छात्राओं और अन्य वॉलंटियरों के लिए भोजन और पेयजल की उपलब्धता जरूरी होगी। इसी वजह से प्रशासनिक तैयारियों में मानवबल के प्रबंधन को भी प्रमुख स्थान दिया गया है।
55 घाटों की सफाई और सुविधाओं पर नजर
दीपोत्सव से पहले सरयू तट के 55 घाटों का निरीक्षण किया जा रहा है। घाटों पर साफ-सफाई, पेयजल और बिजली आपूर्ति को दुरुस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और वॉलंटियरों की मौजूदगी को देखते हुए घाटों की मूलभूत सुविधाओं को व्यवस्थित करना प्राथमिकता में है।
साफ-सफाई की व्यवस्था केवल आयोजन स्थल की सुंदरता से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इतने बड़े जनसमूह की मौजूदगी में यह स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी। इसी तरह बिजली आपूर्ति सुचारु रखना जरूरी है, ताकि दीप सज्जा और अन्य व्यवस्थाओं में किसी तरह की बाधा न आए।
प्रशासन से लेकर विश्वविद्यालय तक समन्वय
दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश स्तर तक लगातार बैठकें की जा रही हैं। जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, अवध विश्वविद्यालय तथा पर्यटन और संस्कृति विभाग के अधिकारी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं।
बैठकों में सामग्री की खरीद और आपूर्ति के साथ घाटों की तैयारी, वॉलंटियरों की तैनाती, भोजन, सफाई, बिजली और पेयजल जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। आयोजन जितना बड़ा है, उसके लिए विभागों के बीच समन्वय भी उतना ही जरूरी है। इसी वजह से तैयारियों की लगातार समीक्षा की जा रही है।
दीपों के साथ कुम्हारों की उम्मीद भी
अयोध्या का दीपोत्सव लाखों दीपों की रोशनी का आयोजन जरूर है, लेकिन इसके पीछे हजारों लोगों की मेहनत जुड़ी होती है। मिट्टी के दीये तैयार करने वाले कुम्हारों से लेकर उन्हें घाटों तक पहुंचाने वाले वेंडरों और सजाने वाले वॉलंटियरों तक एक लंबी श्रृंखला इस आयोजन को आकार देती है।
स्थानीय कुम्हारों को अधिक ऑर्डर देने की पहल इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि दीपोत्सव की भव्यता में पारंपरिक कारीगरों की हिस्सेदारी भी बढ़े। उनके हाथों से तैयार मिट्टी के दीये ही उस रोशनी की बुनियाद बनेंगे, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सरयू तट पर पहुंचते हैं।
आंकड़ों में इस बार का दीपोत्सव
इस वर्ष 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य है, जबकि 32 लाख दीयों की आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। दीप प्रज्ज्वलन के लिए 55 हजार लीटर सरसों का तेल, 65 लाख बातियां और 150 किलो कपूर जुटाया जाएगा। घाटों पर दीप सजाने के लिए करीब 34 हजार वॉलंटियर लगाए जाएंगे और उनके लिए 34 हजार टी-शर्ट उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरयू तट के 55 घाट दीप सज्जा के प्रमुख केंद्र होंगे तथा करीब 34 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था की जाएगी।
फिलहाल अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियां कई स्तरों पर आगे बढ़ रही हैं। सामग्री की खरीद से लेकर घाटों की सफाई और वॉलंटियरों की तैनाती तक काम को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की कोशिश है। अब सबसे बड़ी चुनौती इतने बड़े आयोजन की तमाम व्यवस्थाओं को एक साथ जमीन पर उतारने की है। प्रशासनिक तंत्र, विश्वविद्यालय, तीर्थ विकास परिषद, स्थानीय कुम्हार और हजारों वॉलंटियर मिलकर इस आयोजन को आकार देंगे। सरयू के 55 घाटों पर जब लाखों दीप एक साथ जलेंगे, तो उनके पीछे दिखाई देने वाली रोशनी के साथ इस पूरी तैयारी की व्यापकता भी नजर आएगी।













