17 अक्टूबर 2026 10:02 अपराह्न

प्राचीन बुद्ध प्रतिमा के नाम पर करोड़ों की ठगी की साजिश नाकाम, सात सदस्यीय गिरोह गिरफ्तार

रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान के साथ पुलिस द्वारा पकड़े गए सात आरोपियों, बरामद मोटरसाइकिलों और बुद्ध प्रतिमा पर आधारित फीचर इमेज।

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े इलाके में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो एक प्रतिमा को भगवान बुद्ध की प्राचीन अष्टधातु प्रतिमा बताकर नेपाल में ऊंची कीमत पर बेचने की योजना बना रहा था। पुलिस की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से यह कथित सौदा होने से पहले ही विफल हो गया। इस कार्रवाई में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनके कब्जे से एक प्रतिमा, तीन मोटरसाइकिलें, नकदी और कई मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। साथ ही इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच भी शुरू कर दी गई है।

गुप्त सूचना के आधार पर हुई बड़ी कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों को सूचना मिली थी कि भारत-नेपाल सीमा के समीप स्थित जंगल क्षेत्र में कुछ लोग एक प्रतिमा को अत्यंत दुर्लभ और प्राचीन अष्टधातु की बुद्ध प्रतिमा बताकर नेपाल के खरीदारों को बेचने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल रणनीति बनाते हुए संबंधित क्षेत्र में घेराबंदी की।

जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों में शामिल सात लोगों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से लगभग आठ इंच ऊंची और करीब 4.960 किलोग्राम वजनी बुद्ध की प्रतिमा बरामद की गई। इसके अलावा तीन मोटरसाइकिलें, नकदी तथा सात मोबाइल फोन भी जब्त किए गए, जिन्हें जांच के लिए कब्जे में लिया गया है।

प्रतिमा की वास्तविकता की भी होगी जांच

प्रारंभिक जांच में पुलिस को संदेह है कि आरोपी प्रतिमा को प्राचीन अष्टधातु की दुर्लभ मूर्ति बताकर ऊंची कीमत वसूलने की योजना बना रहे थे। हालांकि, प्रतिमा की वास्तविक प्राचीनता, धातु की गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व का अंतिम निर्धारण विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पुलिस का कहना है कि यदि आवश्यकता हुई तो प्रतिमा को पुरातत्व और संबंधित विशेषज्ञ संस्थानों के पास परीक्षण के लिए भी भेजा जाएगा, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि प्रतिमा वास्तव में कितनी पुरानी और किस धातु से निर्मित है।

सीमा पार नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में

चूंकि मामला भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा हुआ है, इसलिए पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह के तार सीमा पार सक्रिय अन्य लोगों से तो नहीं जुड़े हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं या नहीं।

बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर संपर्कों, लेन-देन और संभावित खरीदारों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच में किसी बड़े नेटवर्क का खुलासा होता है तो संबंधित एजेंसियों को भी कार्रवाई के लिए शामिल किया जा सकता है।

सात आरोपी गिरफ्तार, कई के खिलाफ पहले से मुकदमे

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया कि इनमें से कुछ आरोपी पहले भी विभिन्न आपराधिक मामलों में पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में दो व्यक्तियों के खिलाफ पहले से भी संबंधित थाने में विभिन्न आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इससे यह आशंका और मजबूत हुई है कि यह गिरोह लंबे समय से धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों में संलिप्त हो सकता है।

पुलिस जुटा रही है पुराने मामलों की जानकारी

जांच अधिकारी अब आरोपियों के आपराधिक इतिहास, उनके आर्थिक लेन-देन और आपसी संपर्कों की भी पड़ताल कर रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी दुर्लभ मूर्तियों, प्राचीन वस्तुओं या धार्मिक प्रतिमाओं के नाम पर लोगों को ठगने का प्रयास किया था। पुलिस का मानना है कि यदि गिरोह के अन्य सदस्यों या सहयोगियों की जानकारी मिलती है तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

सीमा क्षेत्रों में बढ़ी सतर्कता

इस घटना के बाद सीमा से जुड़े इलाकों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है। विशेष रूप से उन स्थानों पर नजर रखी जा रही है जहां से अवैध तस्करी, नकली पुरावशेषों का कारोबार या सीमा पार संदिग्ध गतिविधियां संचालित होने की आशंका रहती है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं के नाम पर लोगों को धोखा देने वाले गिरोहों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की अपील

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति किसी प्राचीन प्रतिमा, दुर्लभ मूर्ति या ऐतिहासिक वस्तु को अत्यधिक मूल्यवान बताकर बेचने का दावा करे तो उसकी सत्यता की जांच किए बिना किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।

यह कार्रवाई न केवल एक संभावित धोखाधड़ी को रोकने में सफल रही, बल्कि सीमा क्षेत्र में सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क की जांच का भी महत्वपूर्ण आधार बनी है। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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