रिपोर्ट: ठाकुर बख्श सिंह
देहरादून। गुरु और शिष्य का रिश्ता केवल शिक्षा देने और ग्रहण करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह संस्कार, मार्गदर्शन, अनुशासन और जीवन-दृष्टि का ऐसा रिश्ता है, जिसकी जड़ें भारतीय संस्कृति में सदियों से गहरी हैं। इसी गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान और अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के भाव के साथ देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी, देहरादून के स्कूल ऑफ लॉ में शिक्षक दिवस का आयोजन उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों के बीच किया गया। अवसर पर कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का ऐसा रंग बिखेरा कि विश्वविद्यालय परिसर कुछ देर के लिए कक्षा की गंभीरता से निकलकर गीत, संगीत, नृत्य और हास्य की रंगीन दुनिया में बदल गया।
शिक्षक दिवस के इस आयोजन में विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के सम्मान में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। किसी ने अपनी सुरीली आवाज से गीतों की मिठास घोली तो किसी ने मिमिक्री के माध्यम से माहौल को हास्य और ठहाकों से भर दिया। नृत्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में मनोरंजन के साथ-साथ अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और आत्मीयता की भावना भी स्पष्ट दिखाई दी।
गुरु के प्रति कृतज्ञता का भारतीय संस्कार
भारत में गुरु को सदैव ज्ञान और संस्कार का मार्गदर्शक माना गया है। भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान अत्यंत सम्मानजनक रहा है। यही कारण है कि शिक्षक दिवस महज एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि उन शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है, जो विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करते हैं।
भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस के रूप में समर्पित है। डॉ. राधाकृष्णन स्वयं एक महान शिक्षक, दार्शनिक और शिक्षाविद थे। उनके व्यक्तित्व में ज्ञान और विनम्रता का अद्भुत संगम दिखाई देता था।
प्रचलित ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, जब डॉ. राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके विद्यार्थियों और प्रशंसकों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा व्यक्त की। इस पर उन्होंने अपने जन्मदिन को व्यक्तिगत उत्सव के रूप में मनाने के बजाय इसे शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा जताई। यही विचार आगे चलकर भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा का आधार बना।
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस तरह शिक्षक दिवस शिक्षा और शिक्षक के महत्व को वैश्विक स्तर पर रेखांकित करने वाला अवसर बन गया है।
स्कूल ऑफ लॉ में दिखी विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा
देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित शिक्षक दिवस समारोह का सबसे आकर्षक पक्ष विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। सामान्य दिनों में कानून की धाराओं, संविधान, न्याय व्यवस्था और विधिक सिद्धांतों पर चर्चा करने वाले छात्र-छात्राएं इस दिन एक अलग ही अंदाज में दिखाई दिए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गीत, मिमिक्री और नृत्य जैसी विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। मंच पर प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था। सहपाठियों और शिक्षकों की तालियों ने कलाकार विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाया और पूरा वातावरण जीवंत हो उठा।
गीतों की मधुरता ने जहां कार्यक्रम को भावनात्मक स्पर्श दिया, वहीं मिमिक्री ने वातावरण में हास्य का रंग घोल दिया। नृत्य प्रस्तुतियों ने आयोजन में जोश भर दिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा को सामने लाना भी शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
तान्या से लेकर लक्ष्य तक, कई विद्यार्थियों ने दी प्रस्तुतियां
शिक्षक दिवस समारोह में स्कूल ऑफ लॉ के अनेक छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम में तान्या सिंह, अभिषेक कुमार, स्पर्श, पलक, सुरिंदर, लक्ष्य, डोरा, जिंदगी, हर्ष और अक्षिता सहित कई विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इन विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को केवल एक औपचारिक आयोजन बनने से बचाया और उसे एक आत्मीय सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया। विद्यार्थियों के चेहरों पर उत्साह और शिक्षकों के चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था। मंच पर उतरने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के लिए यह अवसर अपने भीतर छिपी किसी न किसी प्रतिभा को सामने लाने का था।
विशेष बात यह रही कि विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षकों के प्रति सम्मान को मनोरंजन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के साथ जोड़ा। यही वजह रही कि कार्यक्रम में औपचारिकता के बजाय आत्मीयता का भाव अधिक दिखाई दिया।
शिक्षकों ने बढ़ाया विद्यार्थियों का उत्साह
किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम की सफलता में विद्यार्थियों की प्रतिभा जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतना ही महत्वपूर्ण शिक्षकों का प्रोत्साहन भी होता है। स्कूल ऑफ लॉ के शिक्षकगण ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया और उनकी प्रतिभा की सराहना की।
इस अवसर पर हिमांशु जखमोला, आकांक्षा भट्ट, डॉ. विनोद जोशी, ऐश्वर्य गौरव, डॉ. राजन, डॉ. वैशाली और शिवांगी पाठक सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रचनात्मक और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को भी विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु त्यागी और संकायाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अनिल कुमार दीक्षित की मौजूदगी ने विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाया। दोनों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उपयोगी बताया।
कक्षा की गंभीरता से उत्सव की उमंग तक
कानून की शिक्षा स्वभावतः गंभीर विषयों से जुड़ी होती है। संविधान, न्याय, अधिकार, कर्तव्य और कानून की बारीकियों को समझने वाले विद्यार्थी सामान्यतः अकादमिक गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में शिक्षक दिवस जैसे अवसर विद्यार्थियों को अपनी दूसरी प्रतिभाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करते हैं।
देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ में भी कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। जहां आम दिनों में कक्षाओं में कानून की भाषा सुनाई देती है, वहीं शिक्षक दिवस पर गीतों की स्वर-लहरियां, नृत्य की थिरकन और मिमिक्री की हंसी ने माहौल को पूरी तरह उत्सवी बना दिया।
इस आयोजन ने यह भी साबित किया कि एक बेहतर शैक्षणिक संस्थान केवल विद्यार्थियों को डिग्री देने का स्थान नहीं होता। वह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को गढ़ने, आत्मविश्वास विकसित करने और उनकी रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा देने का मंच भी होता है।
केक काटकर हुआ शिक्षक दिवस समारोह का समापन
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मनोरंजक कार्यक्रमों के बाद शिक्षक दिवस समारोह का समापन शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मिलकर केक काटकर किया। इस दौरान शिक्षक और विद्यार्थी औपचारिक दूरी से अलग एक आत्मीय पारिवारिक वातावरण में नजर आए।
केक काटने का यह क्षण समारोह का सबसे भावनात्मक और खुशनुमा पड़ाव रहा। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के साथ मिलकर इस विशेष दिन की खुशियां साझा कीं। तालियों, मुस्कान और शुभकामनाओं के बीच कार्यक्रम का समापन हुआ।
शिक्षक दिवस का यह आयोजन अपने पीछे एक सुंदर संदेश छोड़ गया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थी के भीतर संवेदना, संस्कार, आत्मविश्वास, अनुशासन और रचनात्मकता का विकास करना भी है।
देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित यह समारोह इसी सोच की खूबसूरत अभिव्यक्ति बना। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा के रंगों से मंच सजाया, शिक्षकों ने प्रोत्साहन की तालियों से उनका मनोबल बढ़ाया और अंत में गुरु-शिष्य के आत्मीय रिश्ते ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
इस तरह शिक्षक दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि गुरु केवल ज्ञान का दीप जलाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व को दिशा देने वाला वह प्रकाश है, जिसकी रोशनी जीवन के लंबे सफर में भी साथ चलती है। देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ के विद्यार्थियों ने गीत, संगीत, नृत्य और हास्य के माध्यम से अपने शिक्षकों के प्रति इसी कृतज्ञता को अभिव्यक्त किया और शिक्षक दिवस को एक जीवंत, सांस्कृतिक और आत्मीय उत्सव में बदल दिया।
























