18 अक्टूबर 2026 3:16 पूर्वाह्न

शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला : करोड़पति चपरासी के नेटवर्क का खुलासा, 7 करीबी रिश्तेदार गिरफ्तार

पीलीभीत शिक्षा विभाग घोटाले से जुड़ी फीचर इमेज जिसमें मुख्य आरोपी चपरासी और रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी की तस्वीरें, DIOS कार्यालय की पृष्ठभूमि और 8 करोड़ फर्जीवाड़े की जानकारी दिखाई गई है

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रिपोर्ट: कमलेश कुमार चौधरी

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साधारण चपरासी द्वारा करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल कर किस तरह सिस्टम को लंबे समय तक ठगा जा सकता है।

8 करोड़ से अधिक की हेराफेरी, 8 साल तक चलता रहा खेल

पुलिस जांच में सामने आया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात चपरासी इलहाम-उर्र-रहमान शम्सी ने करीब 8.15 करोड़ रुपये का घोटाला किया। यह फर्जीवाड़ा कोई एक-दो महीने नहीं, बल्कि पूरे 8 साल तक चलता रहा। आरोपी ने अपनी पहुंच और तकनीकी जिम्मेदारियों का फायदा उठाकर सरकारी खजाने को धीरे-धीरे चूना लगाया।

‘टोकन जनरेशन’ सिस्टम बना घोटाले का हथियार

इलहाम मूल रूप से बीसलपुर इंटर कॉलेज में चपरासी था, लेकिन करीब 8 साल पहले उसने DIOS कार्यालय में अपनी तैनाती करवा ली। यहां उसे वेतन भुगतान से जुड़े ‘टोकन जनरेशन’ जैसे अहम ऑनलाइन कार्य सौंपे गए। यही जिम्मेदारी उसके लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हुई।

उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपने रिश्तेदारों को कागजों पर शिक्षक, क्लर्क और ठेकेदार दिखाया और उनके बैंक खातों में सरकारी धन ट्रांसफर करता रहा। यह पूरी प्रक्रिया इतनी सुनियोजित थी कि वर्षों तक किसी को शक तक नहीं हुआ।

रिश्तेदारों का जाल: तीन पत्नियां भी शामिल

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी की तीन पत्नियां हैं, और हैरानी की बात यह कि तीनों को एक-दूसरे के बारे में जानकारी नहीं थी।

  • अर्शी खातून: पहली पत्नी, जिसके खाते में लगभग 1.15 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।
  • अजारा खान: दूसरी पत्नी, जो अलीगढ़ में रह रही थी, हाल ही में गिरफ्तार की गई।
  • लुबना: तीसरी पत्नी, संभल निवासी, जिसे भी पुलिस ने हिरासत में लिया।

पूछताछ के दौरान अजारा खान ने बताया कि उसे इलहाम की अन्य शादियों की जानकारी नहीं थी, जिससे इस मामले का सामाजिक पहलू भी सामने आता है।

बैंक अलर्ट से खुला राज

इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश फरवरी 2026 में हुआ, जब बैंक ऑफ बड़ौदा के एक सतर्क मैनेजर ने संदिग्ध लेनदेन को नोटिस किया। ट्रेजरी से एक निजी खाते में 1.15 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे, जो नियमों के खिलाफ था।

इस सूचना के आधार पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने जांच कमेटी गठित की। जांच शुरू होते ही परत-दर-परत फर्जीवाड़े की कहानी सामने आने लगी और एक बड़ा नेटवर्क उजागर हो गया।

53 बैंक खातों का इस्तेमाल

जांच एजेंसियों ने अब तक 53 बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें यह अवैध धन ट्रांसफर किया गया। ये खाते आरोपी के करीबी रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर खोले गए थे।

5.50 करोड़ रुपये फ्रीज

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न खातों में जमा लगभग 5.50 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए हैं। इससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी धन का एक बड़ा हिस्सा वापस मिल सकता है।

7 रिश्तेदार गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में आरोपी की पत्नियों के अलावा अन्य करीबी रिश्तेदारों को भी गिरफ्तार किया है। इनमें साली फातिमा, सास नाहिद, और रिश्तेदार आफिया, परवीन और आशकारा शामिल हैं। सभी को जेल भेज दिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।

मुख्य आरोपी को अग्रिम जमानत

घोटाले का मुख्य आरोपी इलहाम-उर्र-रहमान शम्सी फिलहाल हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले चुका है। हालांकि पुलिस उसके पूरे वित्तीय नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है और जल्द ही उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

सिस्टम की खामियां आईं सामने

यह मामला केवल एक व्यक्ति की चालाकी का नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों का भी उदाहरण है। लंबे समय तक एक ही व्यक्ति को संवेदनशील तकनीकी जिम्मेदारियां देना, निगरानी की कमी और ऑडिट सिस्टम का कमजोर होना—ये सभी कारण इस घोटाले को बढ़ावा देने में सहायक बने।

आगे क्या?

प्रशासन अब इस पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या इस घोटाले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल थे। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी और डिजिटल सिस्टम में सुधार की बात भी कही जा रही है।

पीलीभीत का यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि अगर सिस्टम में पारदर्शिता और निगरानी मजबूत न हो, तो एक छोटा कर्मचारी भी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार कर सकता है। यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि तकनीक के साथ-साथ जवाबदेही और नियंत्रण तंत्र को भी मजबूत करना बेहद जरूरी है।


 

❓ महत्वपूर्ण सवाल-जवाब

शिक्षा विभाग का यह घोटाला क्या है?

पीलीभीत में DIOS ऑफिस के एक चपरासी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए करीब 8.15 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से निकालकर अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किए।

इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया?

पुलिस ने आरोपी की तीन पत्नियों, सास, साली समेत कुल 7 करीबी रिश्तेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?

बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर ने एक संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी डीएम को दी, जिसके बाद जांच में पूरा घोटाला सामने आया।

कितने बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया?

जांच में अब तक 53 बैंक खातों की पहचान हुई है, जिनमें फर्जी तरीके से पैसा ट्रांसफर किया गया।

कितनी रकम फ्रीज की गई है?

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लगभग 5.50 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में फ्रीज कर दिए हैं।

मुख्य आरोपी की क्या स्थिति है?

मुख्य आरोपी इलहाम-उर्र-रहमान शम्सी ने फिलहाल हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले रखी है, जबकि पुलिस उसकी जांच में जुटी है।

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