कामां

गैस भरते ही बना आग का गोला! निर्माणाधीन बस स्टैंड के पास सिलेंडर ब्लास्ट में मासूम की मौत, पूरा परिवार झुलसा

कोल्ड ड्रिंक गोदाम में अवैध तरीके से एलपीजी ट्रांसफर के दौरान हादसा, छह गंभीर घायलों का जयपुर एसएमएस अस्पताल में इलाज जारी

हिमांशु मोदी की रिपोर्ट

राजस्थान के डीग जिले के कामवन क्षेत्र में मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। निर्माणाधीन बस स्टैंड के पास स्थित एक कोल्ड ड्रिंक गोदाम में उस समय भीषण आग लग गई, जब ईको गाड़ियों में एलपीजी गैस भरी जा रही थी। गैस ट्रांसफर के दौरान अचानक सिलेंडर में जोरदार ब्लास्ट हुआ और देखते ही देखते पूरा परिसर आग के गोले में तब्दील हो गया। हादसे में एक ही परिवार के सात लोग आग की चपेट में आ गए, जिनमें 11 वर्षीय मासूम बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि छह लोग गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

धमाके के बाद पूरे इलाके में मची चीख-पुकार

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंगलवार शाम करीब पांच बजे निर्माणाधीन बस स्टैंड के समीप स्थित कोल्ड ड्रिंक गोदाम में ईको गाड़ियों की गैस किट में एलपीजी भरी जा रही थी। इसी दौरान अचानक सिलेंडर में तेज धमाका हुआ। धमाके की आवाज इतनी भयानक थी कि आसपास के लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए। देखते ही देखते आग ने गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ ही मिनटों में आग की लपटें ऊपर बने मकान तक पहुंच गईं।

हादसे के समय मकान में परिवार के सदस्य मौजूद थे। आग तेजी से फैलने लगी और परिवार के लोग बाहर निकलने का मौका तक नहीं पा सके। स्थानीय लोगों ने चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। इसके बाद पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई।

कोल्ड ड्रिंक एजेंसी संचालक का परिवार आया चपेट में

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कोल्ड ड्रिंक एजेंसी संचालक मनमोहन अपने वाहनों में एलपीजी गैस भर रहा था। बताया जा रहा है कि दोनों ईको गाड़ियां गैस किट से संचालित थीं। मनमोहन गांवों में कोल्ड ड्रिंक सप्लाई का काम करता था और उसी के लिए इन वाहनों का उपयोग किया जाता था।

हादसे में मनमोहन पुत्र दाताराम, उनकी पत्नी सरिता, चचेरे भाई भगवान सिंह पुत्र लक्ष्मीचंद, उनकी पत्नी नीरज, बेटा लक्ष्य और बेटी साक्षी गंभीर रूप से झुलस गए। सभी को पहले कामवन अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद भरतपुर के आरबीएम अस्पताल रेफर कर दिया गया। बाद में हालत गंभीर होने पर छह लोगों को जयपुर एसएमएस अस्पताल भेजा गया।

11 वर्षीय बच्ची ने तोड़ा दम

इस दर्दनाक हादसे में परिवार की 11 वर्षीय बच्ची अक्षर जिंदगी की जंग हार गई। आरबीएम अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र के अनुसार बच्ची करीब 50 प्रतिशत तक झुलस चुकी थी। उसके हाथ, पैर और चेहरा गंभीर रूप से आग की चपेट में आ गए थे। मासूम की मौत के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है।

ऊपर बने मकान तक पहुंच गई थीं आग की लपटें

स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्लास्ट इतना तेज था कि गोदाम की दीवारें तक हिल गईं। नीचे गोदाम में लगी आग कुछ ही पलों में ऊपर बने मकान तक पहुंच गई। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घर में मौजूद लोग खुद को बचाने के लिए चीखते रहे, लेकिन लपटों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया।

मौके पर मौजूद लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। बाद में दमकल विभाग की टीम ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता तो हादसा और भी बड़ा रूप ले सकता था।

अवैध गैस रिफिलिंग पर उठे सवाल

हादसे के बाद इलाके में अवैध तरीके से एलपीजी गैस भरने के कारोबार पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घरेलू सिलेंडरों से वाहनों में गैस भरने का काम लंबे समय से किया जा रहा था, लेकिन प्रशासन की ओर से कभी सख्त कार्रवाई नहीं हुई।

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर से वाहनों में गैस ट्रांसफर करना बेहद खतरनाक होता है। मामूली लापरवाही भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है। ऐसे मामलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सीधे लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती है।

जिला कलेक्टर ने रात में पहुंचकर लिया जायजा

घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने तत्काल संज्ञान लिया और देर रात घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को घायलों के बेहतर उपचार के निर्देश दिए।

जिला कलेक्टर ने जयपुर जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित कर सभी गंभीर घायलों को तत्काल एसएमएस अस्पताल रेफर कराया, ताकि उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिल सके। इस दौरान प्रशासन, पुलिस और दमकल विभाग की टीम लगातार मौके पर मौजूद रही।

प्रशासन और पुलिस ने शुरू की जांच

हादसे के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में गैस ट्रांसफर के दौरान सिलेंडर ब्लास्ट की बात सामने आई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गैस भरने का काम वैध था या नहीं और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर रिहायशी इलाके में इस तरह गैस रिफिलिंग का काम कैसे चल रहा था। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

इलाके में पसरा मातम, लोगों में दहशत

इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे कामवन क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल है। हादसे की भयावह तस्वीरें और धमाके की आवाज लोगों के जहन में अब भी ताजा हैं। स्थानीय लोग प्रशासन से ऐसे अवैध और खतरनाक कामों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सुरक्षा नियमों की अनदेखी कब तक लोगों की जान लेती रहेगी। मासूम बच्ची की मौत और पूरे परिवार के झुलसने की यह घटना प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल छोड़ गई है।

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