चित्रकूट

पंचायत भवन के मुख्य मार्ग पर घटिया सामग्री से कराया जा रहा खड़ंजा निर्माण, जांच की उठी मांग

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट के सदर ब्लॉक कर्वी अंतर्गत ग्राम पंचायत कालूपुर (पाही) में क्षेत्र पंचायत द्वारा कराए जा रहे इंटर लॉकिंग खड़ंजा निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं और गुणवत्ता विहीन सामग्री के उपयोग का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से तत्काल जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि अश्विनी राजपूत के घर से रामलाल राजपूत के घर तक बनाए जा रहे इंटर लॉकिंग खड़ंजे में मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। निर्माण स्थल पर थर्ड क्वालिटी की ईंटें, कमजोर सामग्री और क्रेशर डस्ट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

पंचायत भवन के मुख्य मार्ग पर हो रहा निर्माण

बताया जा रहा है कि जिस मार्ग पर इंटर लॉकिंग खड़ंजा बनाया जा रहा है, वही रास्ता ग्राम पंचायत भवन तक पहुंचने का मुख्य मार्ग भी है। इतना ही नहीं, इसी मार्ग पर जल जीवन मिशन “हर घर नल योजना” का स्टोरेज भी स्थित है, जहां भारी वाहनों का लगातार आवागमन बना रहता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि इसी प्रकार घटिया सामग्री से निर्माण कराया गया तो कुछ ही समय में सड़क ध्वस्त हो जाएगी और सरकारी धन का दुरुपयोग साबित होगा। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक महत्व के इस रास्ते पर मजबूत और टिकाऊ निर्माण होना चाहिए था, लेकिन यहां गुणवत्ता की जगह केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।

साइड वॉल में तीसरे दर्जे की ईंटों का इस्तेमाल

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इंटर लॉकिंग खड़ंजे की साइड वॉल में तीन नंबर की ईंटों का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही ईंटें इतनी कमजोर हैं कि हाथ से दबाने पर टूट जा रही हैं। वहीं बेस तैयार करने में भी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की नींव मजबूत न होने के कारण भारी वाहन गुजरते ही इंटर लॉकिंग धंस सकती है। इससे आने वाले समय में राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा और दोबारा निर्माण पर सरकारी धन खर्च करना पड़ेगा।

ठेकेदार की मनमानी या अधिकारियों की मिलीभगत?

गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में ठेकेदार पूरी तरह मनमानी कर रहा है। स्थानीय स्तर पर निगरानी न होने से निर्माण एजेंसी अपनी सुविधानुसार कार्य कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी या तो अनदेखी कर रहे हैं या फिर मिलीभगत के कारण कार्रवाई नहीं हो रही।

लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की तकनीकी जांच करा ली जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की वजह से गांवों में विकास कार्यों की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।

ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग

ग्राम पंचायत कालूपुर (पाही) के निवासियों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

लोगों ने यह भी मांग की कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर भेजी जाए और उपयोग की जा रही सामग्री की जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

सरकारी योजनाओं की साख पर उठ रहे सवाल

गांवों में सड़क और इंटर लॉकिंग निर्माण कार्यों के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सके। लेकिन यदि निर्माण कार्यों में इसी तरह अनियमितताएं बरती जाएंगी तो योजनाओं का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इंटर लॉकिंग सड़क निर्माण में मजबूत बेस, अच्छी गुणवत्ता की ईंटें और मानक सामग्री का उपयोग बेहद जरूरी होता है। यदि निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी होती है तो सड़क जल्दी टूटने लगती है और जनता को उसका लाभ नहीं मिल पाता।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

अब पूरे मामले में लोगों की नजर जिला प्रशासन पर टिकी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराएगा और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

ग्राम पंचायत कालूपुर (पाही) में चल रहे इस निर्माण कार्य को लेकर गांव में चर्चा का माहौल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि अभी भी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में अन्य विकास कार्यों में भी इसी प्रकार की लापरवाही देखने को मिल सकती है।

सरकारी धन से कराए जा रहे विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों की शिकायतों पर कितनी गंभीरता दिखाई जाती है।

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