खास बात

भारत की “मिर्च” लगी चाइना को तीखी तो लगा दिया रोक, दोस्त जापान को अब भारतीय आम से क्यों नफरत?

किसानों और निर्यातकों के सामने बढ़ा संकट

भारत के कृषि निर्यात को बड़ा झटका लगा है। चीन ने भारतीय मिर्च की एक खेप को कीटनाशक अवशेष अधिक मिलने पर रोक दिया है, जबकि जापान ने फ्यूमिगेशन प्रक्रिया में खामियां मिलने के कारण भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन दोनों घटनाओं ने भारतीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, निर्यात मानकों और किसानों की आय को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। आखिर चीन और जापान ने यह कदम क्यों उठाया और इसका भारतीय कृषि निर्यात पर क्या असर पड़ेगा, आइए विस्तार से जानते हैं।

अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट

भारत के कृषि निर्यात को एक साथ दो बड़े झटके लगे हैं। एक ओर चीन ने भारतीय मिर्च की खेप को अपनी सीमा पर रोक दिया है, तो दूसरी ओर वर्षों से भारत का मित्र रहा जापान भी भारतीय आमों के आयात पर सख्ती दिखाते हुए प्रतिबंध लगा चुका है। दोनों देशों ने अलग-अलग कारण बताए हैं, लेकिन इन घटनाओं ने भारतीय कृषि निर्यात की गुणवत्ता, कीटनाशक प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह घटनाक्रम केवल दो देशों तक सीमित नहीं है। यूरोप समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भारतीय कृषि उत्पादों की जांच पहले से अधिक कड़ी हो चुकी है। यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो भारत के कृषि निर्यात और करोड़ों किसानों की आय पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

चीन को भारतीय मिर्च क्यों लगी ‘तीखी’?

हाल ही में चीन के सीमा शुल्क विभाग ने भारत से भेजी गई मिर्च की एक खेप को प्रवेश देने से इनकार कर दिया। जांच में पाया गया कि मिर्च में मेथामिडोफॉस (Methamidophos) नामक कीटनाशक की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक थी। मेथामिडोफॉस एक अत्यधिक विषैला ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशक है, जो मानव के तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर डाल सकता है। यही वजह है कि कई देशों में इसके उपयोग पर प्रतिबंध या कड़ी निगरानी रखी जाती है।

चीन का कहना है कि खाद्य सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए जिन कृषि उत्पादों में कीटनाशकों के अवशेष अंतरराष्ट्रीय मानकों से अधिक पाए जाते हैं, उन्हें आयात की अनुमति नहीं दी जा सकती।

यह पहली बार नहीं हुआ

भारतीय कृषि उत्पादों को लेकर चीन की यह पहली आपत्ति नहीं है। इससे पहले भी चीन भारत से भेजे गए गैर-बासमती चावल की करीब 70 खेपों को गुणवत्ता संबंधी कारणों से लौटा चुका है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि भारतीय कृषि निर्यात प्रणाली को और मजबूत बनाने की जरूरत है।

दोस्त जापान को भारतीय आम से आखिर शिकायत क्या है?

भारतीय आमों की मिठास दुनिया भर में मशहूर है। अल्फांसो, दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर जैसी किस्मों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग रहती है। इसके बावजूद जापान ने भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगा दिया।

जापान की निरीक्षण टीम ने भारत में फ्यूमिगेशन (कीट नियंत्रण उपचार) और प्लांट क्वारंटीन व्यवस्था का निरीक्षण किया। जांच के दौरान प्रक्रिया में कई तकनीकी कमियां सामने आईं। जापानी अधिकारियों का कहना है कि भारतीय आम उनके निर्धारित फाइटोसैनिटरी मानकों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे।

जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां खाद्य सुरक्षा के नियम बेहद कठोर हैं। इसलिए छोटी तकनीकी खामी भी आयात रोकने का कारण बन जाती है।

किसानों और निर्यातकों की बढ़ी चिंता

भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। जापान जैसे प्रीमियम बाजार में भारतीय आम ऊंचे दाम पर बिकते हैं। ऐसे में प्रतिबंध का सीधा असर किसानों, बागवानों और निर्यातकों की आय पर पड़ सकता है।

उधर, चीन द्वारा मिर्च की खेप रोके जाने से आंध्र प्रदेश के मिर्च उत्पादकों और निर्यातकों में भी चिंता बढ़ गई है। उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

किसानों ने सरकार से क्या मांग की?

आंध्र प्रदेश के निर्यातकों ने सरकार को पत्र लिखकर कई सुझाव दिए हैं। इनमें प्रत्येक खेप की वैज्ञानिक जांच, प्रतिबंधित कीटनाशकों पर सख्ती, किसानों को आधुनिक खेती का प्रशिक्षण, सुरक्षित रसायनों के उपयोग की जानकारी और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करने की मांग प्रमुख है।

उनका कहना है कि यदि खेत से लेकर निर्यात तक पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से नहीं अपनाई गई तो भविष्य में और भी देश भारतीय उत्पादों पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।

यूरोप में भी बढ़ रही मुश्किलें

भारतीय मसालों और कृषि उत्पादों को लेकर केवल चीन और जापान ही सख्त नहीं हुए हैं। यूरोपीय देशों ने भी जांच प्रक्रिया काफी कड़ी कर दी है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स के अनुसार, यूरोपीय आयातकों द्वारा भारतीय मसालों की खेप अस्वीकार किए जाने की दर पहले लगभग 5 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर करीब 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह भारतीय मसाला उद्योग के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

दुनिया के कृषि बाजार में भारत की स्थिति

भारत कृषि उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है, लेकिन वैश्विक कृषि निर्यात में उसकी हिस्सेदारी अभी केवल 2.2 से 2.4 प्रतिशत के बीच है। भारत हर वर्ष लगभग 50 अरब डॉलर मूल्य के कृषि उत्पादों का निर्यात करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता नियंत्रण, ट्रेसबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय मानकों का सख्ती से पालन किया जाए तो भारत अपनी हिस्सेदारी कई गुना बढ़ा सकता है।

आगे क्या करना होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिके रहने के लिए गुणवत्ता सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।

इसके लिए जरूरी है कि—

  • प्रतिबंधित कीटनाशकों पर पूरी तरह रोक लगे।
  • किसानों को सुरक्षित खेती का नियमित प्रशिक्षण दिया जाए।
  • प्रत्येक निर्यात खेप की आधुनिक प्रयोगशालाओं में जांच हो।
  • खेत से बाजार तक ट्रेसबिलिटी सिस्टम लागू किया जाए।
  • अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।

चीन द्वारा भारतीय मिर्च और जापान द्वारा भारतीय आमों पर लगाई गई रोक केवल दो देशों का फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत के कृषि निर्यात के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि गुणवत्ता नियंत्रण, वैज्ञानिक खेती और निर्यात मानकों में समय रहते सुधार नहीं किया गया तो भारतीय कृषि उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। वहीं, यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान, निर्यातक और किसान मिलकर सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं तो भारत न केवल इस संकट से उबर सकता है, बल्कि विश्व कृषि व्यापार में अपनी मजबूत और विश्वसनीय पहचान भी स्थापित कर सकता है।

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