भरत तिवारी एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग तेज, आज़ाद अधिकार सेना ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय नीति बनाने की भी उठी मांग
सीतापुर में आज़ाद अधिकार सेना ने भरत तिवारी एनकाउंटर प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत, दुष्प्रचार और भड़काऊ सामग्री को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी एवं संविधानसम्मत नीति बनाने की भी मांग की। यह मुद्दा न्यायिक पारदर्शिता, मानवाधिकार संरक्षण और सामाजिक सद्भाव से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है।
रिपोर्ट: रीतेश कुमार गुप्ता
सीतापुर। बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर प्रकरण को लेकर देशभर में विभिन्न सामाजिक एवं नागरिक संगठनों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठाई जा रही है। इसी क्रम में आज़ाद अधिकार सेना ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार और न्यायिक पारदर्शिता से जुड़ा विषय बताते हुए इसकी स्वतंत्र जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि किसी भी विवादित मुठभेड़ मामले में सच्चाई सामने आना लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए आवश्यक है।
इसी मुद्दे को लेकर आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर के आह्वान पर सीतापुर में जिला इकाई ने राष्ट्रपति के नाम एक संयुक्त ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में भरत तिवारी प्रकरण की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ सोशल मीडिया पर बढ़ती घृणास्पद और भड़काऊ सामग्री को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी राष्ट्रीय नीति बनाए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में सौंपा गया ज्ञापन
आज़ाद अधिकार सेना के जिला अध्यक्ष नवल किशोर मिश्रा के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति महोदया को संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। इस दौरान संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को न्याय मिलने का अधिकार है और किसी भी विवादित घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
ज्ञापन में कहा गया कि बिहार के भोजपुर जनपद के ग्राम बिलौटी निवासी भरत तिवारी के एनकाउंटर से जुड़े कई सवाल अभी भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में मामले की पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें और यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई हो तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
सीबीआई जांच से सामने आ सकेगी सच्चाई
संगठन का मानना है कि मामले की स्वतंत्र जांच किसी निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी द्वारा कराए जाने से जनता का विश्वास मजबूत होगा। ज्ञापन में कहा गया कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावमुक्त होनी चाहिए।
आज़ाद अधिकार सेना ने यह भी मांग की कि जांच के दौरान सभी उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और परिस्थितिजन्य तथ्यों का गहन परीक्षण किया जाए। संगठन का कहना है कि कानून के समक्ष सभी समान हैं और न्यायिक प्रक्रिया पर आम नागरिकों का भरोसा बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत को लेकर जताई चिंता
ज्ञापन का दूसरा महत्वपूर्ण विषय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बढ़ती घृणास्पद अभिव्यक्तियां, भड़काऊ संदेश, दुष्प्रचार और सामाजिक वैमनस्य का प्रसार रहा। संगठन ने कहा कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया सूचना आदान-प्रदान का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है, लेकिन इसका दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है।
आज़ाद अधिकार सेना ने मांग की कि केंद्र सरकार एक स्पष्ट, पारदर्शी और संविधानसम्मत राष्ट्रीय नीति तैयार करे, जिसके माध्यम से सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। संगठन ने कहा कि धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर समाज में विभाजन पैदा करने वाले लोगों के खिलाफ समान और निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए।
घृणास्पद सामग्री हटाने के लिए बने समयबद्ध व्यवस्था
ज्ञापन में सोशल मीडिया कंपनियों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। संगठन ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित घृणास्पद और हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री को हटाने के लिए समयबद्ध तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
इसके अलावा शिकायतों के त्वरित निस्तारण, साइबर निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने और तकनीकी संसाधनों के विस्तार की मांग भी की गई। संगठन का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर फैलने वाली गलत और भ्रामक सूचनाएं सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं, इसलिए इनके विरुद्ध प्रभावी कदम उठाना समय की मांग है।
संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
आज़ाद अधिकार सेना ने अपने ज्ञापन में नागरिकों के बीच संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। संगठन ने कहा कि केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को सकारात्मक और जिम्मेदार ऑनलाइन आचरण के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है।
ज्ञापन में कहा गया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन इसके साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। इसलिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे और साथ ही समाज में नफरत तथा हिंसा फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए न्याय और सामाजिक सद्भाव जरूरी
संगठन ने कहा कि न्याय, सामाजिक सद्भाव, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और नागरिक अधिकारों का संरक्षण किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की बुनियाद होते हैं। इसलिए भरत तिवारी प्रकरण की निष्पक्ष जांच और सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वालों के खिलाफ प्रभावी नीति निर्माण जैसे विषयों पर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान चन्द्रभान सक्सेना, प्रदीप कुमार माथुर, राजकुमार श्रीवास्तव, आदित्य सिंह, रजत शुक्ला, राजकुमार सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में निष्पक्ष जांच, न्यायिक पारदर्शिता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की मांग दोहराई।








