सरोजिनी नगर तहसील में सरकारी जमीनों पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन पर उठाए सवाल
सैकड़ों बीघा सरकारी भूमि, तालाब और चकरोड भूमाफियाओं के कब्जे में होने का दावा
लखनऊ के सरोजिनी नगर तहसील क्षेत्र में सरकारी भूमि, ग्राम समाज की जमीन, तालाबों और सार्वजनिक संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जों का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने राजस्व विभाग, स्थानीय प्रशासन और भूमाफियाओं की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। नीवा, खटौला, कासिमखेड़ा, बीबीपुर, बन्थरा और औरावा सहित कई गांवों में सरकारी जमीनों पर अवैध प्लाटिंग और निर्माण कार्य होने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं के आरोपों ने भी मामले को और गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि मामले की उच्चस्तरीय जांच होती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरोजिनी नगर तहसील क्षेत्र में सरकारी भूमि, तालाबों और ग्राम समाज की संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों, स्थानीय स्तर के प्रभावशाली लोगों तथा भूमाफियाओं की मिलीभगत से ग्राम समाज की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि पर कब्जा कराया जा रहा है। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार तहसील क्षेत्र के कई गांवों में ऊसर, बंजर, नवीन परती, चकरोड, चरागाह, जंगल और सरकारी तालाब जैसी सार्वजनिक संपत्तियों पर लगातार अतिक्रमण किया जा रहा है। इन जमीनों को कथित रूप से प्लॉटिंग कर निजी लोगों को बेचा जा रहा है, जिससे सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
कई ग्राम पंचायतों में सरकारी जमीनों पर प्लॉटिंग का आरोप
स्थानीय लोगों का दावा है कि सरोजिनी नगर तहसील के अंतर्गत आने वाले नीवा, खटौला, कासिमखेड़ा, खसरवारा, बीबीपुर, बन्थरा नगर पंचायत, औरावा, रामचौरा, अधपुरदेव, गैहरू और दरोगाखेड़ा समेत अनेक गांवों में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमाफिया और प्रॉपर्टी डीलर सरकारी भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बेच रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले लोगों के संरक्षण में यह पूरा खेल संचालित हो रहा है।
औरावा गांव में गाटा संख्या 375, 376, 377 और 445 पर निर्माण का मामला
ग्रामीणों द्वारा उठाए गए आरोपों के अनुसार औरावा गांव में गाटा संख्या 375, 376, 377 एवं 445 की सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण कार्य जारी है। बताया जा रहा है कि यहां भूखंड विकसित कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार इस संबंध में शिकायतें भी की हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब मीडिया कर्मियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई तो कुछ समय के लिए निर्माण कार्य रोक दिया गया था, लेकिन बाद में दोबारा काम शुरू हो गया। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की।
प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं के भी आरोप
मामले में कुछ ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2024-25 की लाभार्थी सूची में अनियमितताएं हुईं और पात्रता के मानकों की अनदेखी कर कुछ अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया गया।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका आरोप है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से बढ़ रहा असंतोष
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार राजस्व विभाग, तहसील प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों को शिकायतें भेजीं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी भूमि पर हो रहे कब्जों को रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण के कारण सार्वजनिक उपयोग की भूमि तेजी से कम होती जा रही है। इससे भविष्य में गांवों के विकास कार्यों और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है।
तहसीलदार के आदेश के बाद भी नहीं हटाया गया कब्जा
जानकारी के अनुसार सरोजिनी नगर तहसील प्रशासन द्वारा 21 जनवरी 2026 को एक मामले में सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया था। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम भी गठित की गई थी। बावजूद इसके, संबंधित भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
ग्रामीणों का कहना है कि आदेश जारी होने के कई महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कुछ लोगों का दावा है कि जब इस संबंध में जानकारी मांगी गई तो बताया गया कि पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सकता है।
निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि, तालाबों और ग्राम समाज की संपत्तियों पर हुए कथित कब्जों की राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तो सरकारी संपत्तियों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई संभव हो सकेगी। साथ ही अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई भूमि का उपयोग जनहित और विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी लोगों की नजर
सरोजिनी नगर तहसील क्षेत्र में सरकारी भूमि और तालाबों पर कब्जे के आरोपों ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक जांच और कार्रवाई करेगा।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्रीय नागरिकों की निगाहें प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी भूमि और सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर उठ रहे सवाल और भी गहरे हो सकते हैं।







