46 साल पुराने शिवलिंग विवाद का शांतिपूर्ण समाधान, हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना चित्रकूट
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले की मऊ तहसील स्थित सोनारी गली में वर्षों पुराना शिवलिंग विवाद आखिरकार आपसी सहमति और सामाजिक सौहार्द के साथ समाप्त हो गया। करीब 46 वर्षों से खुले में रखे शिवलिंग को लेकर चला आ रहा विवाद सोमवार को प्रशासन की मौजूदगी में हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच शांतिपूर्ण समझौते के बाद सुलझ गया। अब यहां भव्य मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
मलमास के पवित्र महीने में हुआ यह समझौता न केवल धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण बना, बल्कि कौमी एकता और भाईचारे की ऐसी मिसाल भी पेश कर गया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे का सम्मान करते हुए विवाद को खत्म किया और सौहार्दपूर्ण माहौल में समाधान निकालकर समाज को सकारात्मक संदेश दिया।
46 वर्षों से खुले में रखा था शिवलिंग
मऊ तहसील मुख्यालय की सोनारी गली में एक स्थान पर पिछले लगभग 46 वर्षों से शिवलिंग खुले में स्थापित था। स्थानीय लोगों के अनुसार लंबे समय से यहां मंदिर निर्माण की चर्चा होती रही थी, लेकिन जमीन संबंधी परिस्थितियों और आपसी विवाद के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।
स्थानीय मुस्लिम पक्ष के हसनैन और मन्ने खां ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1980 में यह जमीन खरीदी थी। जिस हिस्से में शिवलिंग रखा हुआ था, वह हिस्सा भी उनकी खरीदी गई भूमि में शामिल था। उन्होंने कई बार लोगों से शिवलिंग को अन्यत्र स्थापित करने का अनुरोध किया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
वहीं हिंदू पक्ष के अमरीश सोनी, छोटू और शुभम सहित अन्य लोगों का कहना था कि मोहल्ले में पहले से मंदिर निर्माण की योजना थी। बाद में जमीन बिकने और स्वामित्व को लेकर स्थिति जटिल हो गई, जिससे मंदिर निर्माण का कार्य अधूरा रह गया।
मकान निर्माण शुरू होने पर बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि शनिवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से जमीन पर मकान निर्माण का कार्य शुरू कराया गया था। सोमवार को नींव और दीवार निर्माण की सूचना मिलते ही हिंदू पक्ष के लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई।
धीरे-धीरे मामला संवेदनशील होता गया और स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी श्रीप्रकाश यादव तत्काल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए नायब तहसीलदार पारुल सिंह, लेखपाल और कानूनगो को भी मौके पर भेजा।
अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत कराया और जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई। प्रशासन लगातार इस प्रयास में जुटा रहा कि विवाद किसी बड़े तनाव का कारण न बने और आपसी समझदारी से समाधान निकल आए।
प्रशासन की मौजूदगी में बनी सहमति
करीब दो घंटे तक चली बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई। मुस्लिम पक्ष ने सौहार्द का परिचय देते हुए मंदिर निर्माण के लिए भूमि छोड़ने पर सहमति जताई।
समझौते के तहत तय किया गया कि शिवलिंग के लिए चार फीट लंबाई और चार फीट चौड़ाई की जगह छोड़ी जाएगी। इसी स्थान पर हिंदू पक्ष मंदिर का निर्माण कराएगा। प्रशासन की मौजूदगी में मौके पर नापजोख और सीमांकन भी कराया गया ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद दोबारा उत्पन्न न हो।
इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने निर्धारित स्थान छोड़कर आगे अपने भवन निर्माण का कार्य दोबारा शुरू कर दिया। समझौते के बाद दोनों समुदायों के लोगों ने राहत की सांस ली और एक-दूसरे को बधाई देकर भाईचारे का संदेश दिया।
मलमास में समझौते को माना जा रहा शुभ संकेत
स्थानीय लोगों का कहना है कि मलमास के पवित्र माह में इस प्रकार का शांतिपूर्ण समाधान धार्मिक दृष्टि से भी शुभ माना जा रहा है। लोगों ने इसे भगवान शिव की कृपा और सामाजिक सौहार्द की जीत बताया।
क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि आज के दौर में जब छोटी-छोटी बातों पर तनाव और विवाद बढ़ जाते हैं, तब चित्रकूट की यह घटना पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। यहां दोनों समुदायों ने धैर्य और समझदारी दिखाकर यह साबित किया कि बातचीत और सम्मान के जरिए हर समस्या का समाधान संभव है।
प्रशासन की भूमिका की हो रही सराहना
इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका की भी व्यापक सराहना हो रही है। अधिकारियों ने बिना किसी पक्षपात के दोनों समुदायों की बात सुनी और शांतिपूर्ण माहौल में समाधान निकालने का प्रयास किया।
थाना प्रभारी श्रीप्रकाश यादव ने बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखना थी। दोनों पक्षों ने समझदारी दिखाई और सहमति से समाधान निकाला, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
नायब तहसीलदार पारुल सिंह ने भी जमीन के दस्तावेजों की जांच के बाद निष्पक्ष तरीके से सीमांकन कराया। प्रशासनिक सतर्कता और सामाजिक सहयोग के कारण मामला शांतिपूर्वक सुलझ गया।
भाईचारे का संदेश दे गया चित्रकूट
चित्रकूट की यह घटना सामाजिक समरसता का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। जहां एक ओर हिंदू पक्ष को मंदिर निर्माण का मार्ग मिला, वहीं मुस्लिम पक्ष ने भी भाईचारे और सहिष्णुता का परिचय दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समझौता आने वाली पीढ़ियों को भी यह सीख देगा कि धार्मिक और सामाजिक विवादों का समाधान टकराव नहीं बल्कि संवाद और आपसी सम्मान से निकाला जा सकता है।
दोनों समुदायों के लोगों ने इस मौके पर एक-दूसरे को बधाई देकर यह साबित कर दिया कि इंसानियत और सौहार्द किसी भी विवाद से बड़ा होता है। अब क्षेत्र में मंदिर निर्माण को लेकर उत्साह का माहौल है और लोग इसे सामाजिक एकता की ऐतिहासिक घटना मान रहे हैं।







