गोंडा

हनुमानगढ़ी विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, नमाज के दावे को बताया पूरी तरह निराधार

हनुमानगढ़ी के निर्माण को लेकर भी किया ऐतिहासिक दावा, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी नमाज संबंधी दावों को बताया असत्य

दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट


अयोध्या/गोंडा। हनुमानगढ़ी को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही राजनीतिक और धार्मिक बहस के बीच भाजपा के पूर्व सांसद एवं पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने हनुमानगढ़ी में कभी नमाज पढ़े जाने के दावों को पूरी तरह निराधार और असत्य बताया है। साथ ही उन्होंने हनुमानगढ़ी के निर्माण के संबंध में एक ऐसा ऐतिहासिक दावा भी किया, जिसने इस पूरे विवाद को नया आयाम दे दिया है।

गोंडा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बातें वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और लोगों को भ्रमित करने का प्रयास करती हैं। उनका कहना था कि हनुमानगढ़ी के निर्माण में एक मुस्लिम व्यक्ति का योगदान रहा था, जिसका उल्लेख आज भी वहां लगे शिलालेख में दर्ज है।

हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़ने के दावे को बताया पूरी तरह गलत

मीडिया से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि हनुमानगढ़ी की पवित्रता पर सवाल उठाने वाले दावे तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा कि उनके ज्ञान और अनुभव के अनुसार वहां कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह की बातें कर रहे हैं, उन्हें पहले हनुमानगढ़ी के इतिहास और वहां उपलब्ध अभिलेखों का अध्ययन करना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि बाराबंकी के एक मुस्लिम व्यक्ति ने हनुमानगढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इसका उल्लेख वहां मौजूद पत्थर के शिलालेख पर आज भी देखा जा सकता है। उनका कहना था कि इतिहास को राजनीतिक नजरिए से नहीं बल्कि तथ्यों के आधार पर समझने की आवश्यकता है।

हनुमानगढ़ी के इतिहास का किया उल्लेख

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयान में कहा कि हनुमानगढ़ी केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद शिलालेख इस बात का प्रमाण है कि निर्माण कार्य में एक मुस्लिम दानदाता का भी योगदान रहा था।

हालांकि उन्होंने उस व्यक्ति का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं बताया, लेकिन यह अवश्य कहा कि इस संबंध में उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाणों को देखने के बाद किसी भी प्रकार के भ्रम की गुंजाइश नहीं रहती।

राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा रहा है बृजभूषण का नाम

बृजभूषण शरण सिंह लंबे समय से अयोध्या और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में गिने जाते रहे हैं। गोंडा जिले के निवासी बृजभूषण का बचपन अयोध्या में बीता और उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

वर्ष 1992 में बाबरी ढांचा विध्वंस मामले में उनका नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल हुआ था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया था। बाद के वर्षों में वे कई बार सांसद चुने गए और उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली नेताओं में उनकी पहचान बनी रही।

हाल के वर्षों में महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं मिला, लेकिन उनके परिवार की राजनीतिक मौजूदगी बनी रही। वर्तमान में उनका एक पुत्र लोकसभा सांसद और दूसरा उत्तर प्रदेश विधानसभा का सदस्य है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी दावों का किया खंडन

हनुमानगढ़ी विवाद पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नमाज पढ़े जाने के दावों को पूरी तरह असत्य बताया।

अयोध्या पहुंचने पर उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़े जाने की बातें वास्तविकता से मेल नहीं खातीं। उनके अनुसार ऐसे दावों से मंदिर की गरिमा और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है।

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि इन चर्चाओं के पीछे लोगों का ध्यान अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से हटाने की कोशिश दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान बिना प्रमाण के नहीं दिए जाने चाहिए।

राम मंदिर से जुड़े मुद्दे का भी किया उल्लेख

शंकराचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया में राम मंदिर परिसर से जुड़े हालिया घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में सार्वजनिक विमर्श का केंद्र बदलता नजर आया।

उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के बारे में किसी भी प्रकार का बयान तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही होना चाहिए ताकि समाज में अनावश्यक विवाद पैदा न हो।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद तेज हुई थी चर्चा

हनुमानगढ़ी का यह विवाद उस समय सुर्खियों में आया जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीकापुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती सरकार के समय हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई गई थी।

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में धार्मिक स्थलों की मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा था कि यदि किसी मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ कराना संभव नहीं है, तो फिर हनुमानगढ़ी जैसे पवित्र स्थल पर नमाज पढ़वाना भी उचित नहीं माना जा सकता।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ धार्मिक संगठनों में भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई। इसके बाद विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

विवाद के बीच इतिहास और तथ्यों पर जोर

बृजभूषण शरण सिंह और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, दोनों ने अपने-अपने वक्तव्यों में एक समान बात कही कि हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने के दावे ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाते।

बृजभूषण ने जहां शिलालेख का हवाला देते हुए हनुमानगढ़ी के निर्माण में मुस्लिम योगदान की बात कही, वहीं शंकराचार्य ने भी ऐसे दावों को असत्य बताते हुए धार्मिक स्थलों के संबंध में प्रमाण आधारित चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी बहस

हनुमानगढ़ी को लेकर दिए गए विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान चर्चा का केंद्र बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह तथा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रियाओं ने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है।

अब इस पूरे मामले में ऐतिहासिक तथ्यों, उपलब्ध अभिलेखों और प्रमाणों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह विषय राजनीतिक विमर्श के साथ-साथ इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में भी चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

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