देवरिया

बिना परमिट दौड़ रहे स्कूल वाहनों पर प्रशासन का शिकंजा, 10 वाहनों का चालान और दो बसें सीज

बच्चों की सुरक्षा को लेकर देवरिया प्रशासन सख्त, नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर होगी बड़ी कार्रवाई

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के देवरिया में बिना वैध परमिट संचालित हो रहे स्कूल वाहनों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए परिवहन विभाग ने जिलेभर में विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया, जिसके तहत कई स्कूल वाहनों पर कार्रवाई की गई। इस अभियान ने उन विद्यालय प्रबंधनों में हड़कंप मचा दिया है, जो लंबे समय से नियमों की अनदेखी कर बच्चों की जान जोखिम में डालकर वाहन संचालन कर रहे थे।

परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश पर चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत 13 मई को परिवहन विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न मार्गों और विद्यालयों के आसपास सघन जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान पाया गया कि कई स्कूल वाहन बिना वैध परमिट अथवा समाप्त हो चुके परमिट के आधार पर संचालित किए जा रहे थे। इसके बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 10 विद्यालय वाहनों का चालान किया, जबकि दो बसों को निरुद्ध कर संबंधित थानों में खड़ा कराया गया।

नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर होगी मान्यता निरस्तीकरण की कार्रवाई

प्रशासन ने केवल वाहनों पर कार्रवाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि उन विद्यालयों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिनके वाहन नियमों का उल्लंघन करते पाए गए। अधिकारियों के अनुसार संबंधित विद्यालयों की मान्यता निरस्त करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

प्रशासन का मानना है कि यदि विद्यालय प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं और परिवहन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कदम उठाना जरूरी है। यही वजह है कि इस बार कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर दंडात्मक रूप लेती दिखाई दे रही है।

कलेक्ट्रेट सभागार में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

विद्यालय वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रवर्तन अभियान की समीक्षा के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों को पहले नोटिस जारी किया जा चुका है और इसके बावजूद उन्होंने अपने वाहनों का परमिट नहीं बनवाया है, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई

जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक में यह भी कहा कि विद्यालय वाहन संचालन के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का अनिवार्य रूप से पालन कराया जाए। उन्होंने परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से संयुक्त जांच अभियान चलाएं और यह सुनिश्चित करें कि स्कूल बसों में फिटनेस, फायर सेफ्टी, फर्स्ट एड बॉक्स, जीपीएस, सीसीटीवी कैमरा, स्पीड गवर्नर तथा प्रशिक्षित चालक जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद हों।

उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि कई निजी विद्यालय वाहन संचालन के नियमों की अनदेखी करते हैं। कई बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है, जबकि कुछ वाहन तकनीकी रूप से भी सुरक्षित नहीं होते। ऐसे वाहनों के कारण दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है।

अभिभावकों में भी बढ़ी चिंता

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अभिभावकों के बीच भी विद्यालय वाहनों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई अभिभावकों का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूल वाहनों की खराब स्थिति और नियमों की अनदेखी को लेकर चिंतित थे, लेकिन अब प्रशासन की सक्रियता से उम्मीद जगी है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

कुछ अभिभावकों ने यह भी मांग की कि स्कूल बसों की नियमित जांच सार्वजनिक रूप से होनी चाहिए, ताकि अभिभावकों को भी जानकारी मिल सके कि उनके बच्चों को ले जाने वाले वाहन कितने सुरक्षित हैं।

परिवहन विभाग ने दी सख्त चेतावनी

परिवहन विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। बिना परमिट, बिना फिटनेस अथवा नियम विरुद्ध संचालित पाए जाने वाले किसी भी स्कूल वाहन को बख्शा नहीं जाएगा। विभाग ने विद्यालय प्रबंधनों से अपील की है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज समय से पूर्ण कराएं और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें।

अधिकारियों का कहना है कि स्कूल वाहन केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि बच्चों की जिंदगी से जुड़ा विषय है। इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही गंभीर अपराध की श्रेणी में मानी जाएगी।

प्रशासनिक सख्ती से मचा हड़कंप

देवरिया में शुरू हुए इस अभियान के बाद निजी विद्यालय संचालकों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। कई विद्यालय अब जल्दबाजी में अपने वाहनों के दस्तावेज दुरुस्त कराने में जुट गए हैं। परिवहन विभाग की टीम आने वाले दिनों में और व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।

प्रशासन का मानना है कि यदि लगातार सख्ती बरती गई तो विद्यालय वाहन संचालन व्यवस्था में सुधार आएगा और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। फिलहाल जिले में चल रही इस कार्रवाई को बच्चों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है।

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