आफत का मौसम : आंधी-बारिश के बाद अब लू का हमला, मौसम बना मौत का दूसरा नाम
26 जिलों में तबाही के बाद राहत कार्य तेज, IMD ने कई जिलों में लू और तेज आंधी-बारिश की नई चेतावनी जारी की
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में 13 मई को आए भीषण आंधी-तूफान, मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली ने जनजीवन को झकझोर कर रख दिया। पिछले 24 घंटों के भीतर प्रदेश के 26 जिलों में मौसम की इस भयावह मार से 111 लोगों की मौत हो गई, जबकि 72 लोग घायल हुए हैं। प्राकृतिक आपदा की इस मार से न सिर्फ इंसानी जानें गईं, बल्कि 170 पशुओं की मौत और सैकड़ों मकानों के क्षतिग्रस्त होने की खबरों ने ग्रामीण इलाकों में हालात और चिंताजनक बना दिए हैं।
सबसे ज्यादा तबाही प्रयागराज में देखने को मिली, जहां 21 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा मिर्जापुर में 19, भदोही में 16 और फतेहपुर में 11 लोगों की मौत दर्ज की गई। कई जिलों में पेड़ गिरने, बिजली के खंभे टूटने, कच्चे मकान ढहने और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं ने लोगों को दहशत में डाल दिया है।
मुख्यमंत्री योगी ने दिए तत्काल राहत के निर्देश
भीषण तबाही की खबरों के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को तत्काल राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रभावित परिवारों का सत्यापन कर 24 घंटे के भीतर सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि पीड़ित परिवारों तक वास्तविक मदद पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि अधिकारी स्वयं प्रभावित गांवों और इलाकों का दौरा करें तथा पीड़ितों से सीधे संवाद कर उनकी जरूरतों को समझें। सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी अधिकारी द्वारा राहत कार्यों में कोताही बरती गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राहत आयुक्त की समीक्षा बैठक, कंट्रोल रूम से निगरानी
राज्य में बिगड़े हालात को देखते हुए राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रभावित जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे हर प्रभावित परिवार तक पहुंचें और तत्काल सहायता उपलब्ध कराएं।
राहत आयुक्त कार्यालय के कंट्रोल रूम से लगातार हालात पर निगरानी रखी जा रही है। राज्य स्तरीय आपदा हेल्पलाइन 1070 को भी सक्रिय कर दिया गया है, जहां लोगों की शिकायतों और मदद संबंधी कॉल का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है।
करोड़ों लोगों तक भेजे गए रेड और ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद सरकार ने “सचेत पोर्टल” के माध्यम से प्रदेशभर में करीब 34 करोड़ 64 लाख रेड और ऑरेंज अलर्ट संदेश भेजे। इन संदेशों के जरिए लोगों को तेज आंधी, बिजली गिरने और खराब मौसम से सतर्क रहने की अपील की गई।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि समय रहते अलर्ट जारी होने से कई क्षेत्रों में लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली, जिससे संभावित नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सका।
प्रभारी मंत्रियों को जिलों का दौरा करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को भी राहत कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। मंत्रियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें, पीड़ित परिवारों से मिलें और राहत वितरण की प्रक्रिया का निरीक्षण करें।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रभावित परिवार तक मदद पहुंचने में देरी न हो। जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे राहत राशि वितरण की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूरा करें।
कई जिलों में अब हीटवेव का खतरा
एक ओर प्रदेश के कई इलाके तूफान और बारिश से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मौसम विभाग ने दक्षिणी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के कई जिलों में भीषण गर्मी और लू की चेतावनी जारी कर दी है।
मौसम विभाग के अनुसार 15 मई को बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, फतेहपुर, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर समेत कई जिलों में तेज गर्म हवाएं चल सकती हैं। दोपहर के समय तापमान तेजी से बढ़ने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलना खतरनाक साबित हो सकता है।
पश्चिमी और पूर्वी यूपी में फिर खराब मौसम की चेतावनी
जहां बुंदेलखंड और दक्षिणी यूपी में गर्मी बढ़ने की संभावना है, वहीं पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मौसम अभी भी अस्थिर बना हुआ है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि शुक्रवार सुबह तक कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके साथ मेघगर्जन और आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचें।
16 मई से और बढ़ेगा तापमान
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग India Meteorological Department के अनुसार 16 मई से प्रदेश में गर्मी और ज्यादा विकराल रूप ले सकती है। अनुमान है कि प्रयागराज, सोनभद्र, वाराणसी, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली, आगरा, इटावा और जालौन समेत करीब 27 जिलों में हीटवेव का प्रभाव बढ़ जाएगा।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई जिलों का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण बिजली और पानी की मांग भी तेजी से बढ़ने की आशंका है।
नोएडा और NCR में भी बढ़ेगी तपिश
Noida और एनसीआर क्षेत्र में भी गर्मी का असर तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार को नोएडा में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 242 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। बढ़ती गर्मी और खराब वायु गुणवत्ता लोगों की सेहत पर असर डाल सकती है।
किसानों और आम लोगों के लिए हेल्थ एडवाइजरी जारी
IMD ने गर्मी और लू को देखते हुए आम लोगों और किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, ओआरएस, नींबू पानी, लस्सी और छाछ जैसे तरल पदार्थों का सेवन करने को कहा गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में काम करते समय सिर ढककर रखें और समय-समय पर आराम करते रहें।
गांवों में सबसे ज्यादा तबाही, लोग अब भी दहशत में
ग्रामीण इलाकों में इस आपदा का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। कई गांवों में कच्चे मकान गिर गए, पशु मारे गए और खेतों में खड़ी फसलें भी बर्बाद हो गईं। बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ी।
कई जिलों में लोग अब भी भय के माहौल में जी रहे हैं, क्योंकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक मौसम पूरी तरह सामान्य न होने की संभावना जताई है।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन के सामने इस समय दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ तूफान और बारिश से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचानी है, तो दूसरी तरफ आने वाली भीषण गर्मी और हीटवेव से लोगों को बचाने की तैयारी करनी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अचानक आंधी, ओलावृष्टि, बिजली गिरने और फिर तुरंत हीटवेव जैसी स्थितियां अब सामान्य होती जा रही हैं। ऐसे में प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों को भी सतर्क और तैयार रहने की जरूरत है।






