लंबित मानदेय पर फूटा संविदाकर्मियों का गुस्सा, लार सीएचसी पर काली पट्टी बांधकर विरोध
21 मई से ‘नो पे-नो वर्क’ की चेतावनी, दो माह से वेतन न मिलने पर स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडराया संकट
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया जिले के लार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। पिछले दो महीनों से मानदेय न मिलने से नाराज कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध जताने के बावजूद कर्मचारियों ने मरीजों की सेवा जारी रखी, लेकिन साथ ही यह साफ कर दिया कि यदि 20 मई 2026 तक उनका लंबित भुगतान नहीं किया गया तो 21 मई से वे कार्य बहिष्कार करने को मजबूर होंगे।
संविदाकर्मियों का कहना है कि मार्च और अप्रैल 2026 का मानदेय अब तक उनके खातों में नहीं पहुंचा है। लगातार दो माह तक वेतन न मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई बार उच्च अधिकारियों और संबंधित विभागों को समस्या से अवगत कराने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
अस्पताल गेट पर जताया विरोध
मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में एनएचएम संविदाकर्मी सीएचसी लार परिसर में एकत्र हुए। सभी कर्मचारियों ने अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से धैर्य बनाए हुए हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की उदासीनता ने उन्हें आंदोलन के लिए विवश कर दिया है।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं करना चाहते, इसलिए फिलहाल ड्यूटी करते हुए विरोध जता रहे हैं। हालांकि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
दो माह से वेतन न मिलने से बढ़ी परेशानी
संविदा कर्मचारियों ने बताया कि लगातार दो माह तक वेतन न मिलने से उनके घरों की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। कई कर्मचारियों के सामने बच्चों की स्कूल फीस जमा करने का संकट खड़ा हो गया है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में बिना वेतन के परिवार चलाना बेहद कठिन हो गया है। कई कर्मचारियों को उधार लेकर घर चलाना पड़ रहा है, जबकि कुछ लोग बैंक की किश्तें और अन्य वित्तीय दायित्व समय पर नहीं चुका पा रहे हैं।
एक संविदाकर्मी ने बताया कि नियमित कर्मचारियों की तरह उन्हें सुविधाएं नहीं मिलतीं, लेकिन कार्य का दबाव बराबर रहता है। इसके बावजूद समय पर मानदेय न मिलना उनके मनोबल को तोड़ रहा है।
‘नो पे-नो वर्क’ आंदोलन की चेतावनी
उत्तर प्रदेश राज्य स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ (रजि.) के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 20 मई तक मार्च और अप्रैल माह का भुगतान नहीं किया गया तो 21 मई से पूरे प्रदेश में ‘नो पे-नो वर्क’ आंदोलन शुरू किया जाएगा।
कर्मचारियों ने कहा कि यह आंदोलन प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उनका कहना है कि यदि संविदाकर्मी कार्य बहिष्कार पर जाते हैं तो अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
एनएचएम के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। अस्पतालों में ओपीडी संचालन, टीकाकरण, प्रसूति सेवाएं, लैब जांच, आपातकालीन सेवाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में इन कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है।
यदि संविदाकर्मी सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार करते हैं तो इसका सीधा असर मरीजों की सुविधाओं पर पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने की आशंका बढ़ जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि एनएचएम कर्मचारियों के भरोसे कई योजनाएं संचालित हो रही हैं। ऐसे में यदि भुगतान में लगातार देरी होती रही तो इससे पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
कर्मचारियों ने शासन से की तत्काल भुगतान की मांग
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि संविदाकर्मियों को समय पर मानदेय मिलना उनका अधिकार है। कर्मचारियों ने मांग की कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि वे लंबे समय से कम संसाधनों में काम कर रहे हैं और कोविड काल सहित कई कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। ऐसे में समय पर भुगतान न होना उनके साथ अन्याय है।
प्रदर्शन में ये कर्मचारी रहे मौजूद
सीएचसी लार में हुए इस विरोध प्रदर्शन में डॉ. जगदीश प्रसाद, डॉ. आनंद प्रकाश, डॉ. रजनीश पांडे, डॉ. विपिन कुमार, डॉ. मंजू तिवारी, डॉ. अजमेरी खातून, अखिलेश कुमार, मोहम्मद अजमल, अनीता सिंह पटेल, फूल कुमारी, रंजन कुमार, अंकित निगम, अलका भारती, गीता देवी, संतोष चक्रधारी, राघवेंद्र प्रताप सिंह, मोतीलाल, अंजलि, विजय लक्ष्मी, पूनम, प्रिया यादव, अमित दुबे, अभिषेक श्रीवास्तव और कैशर नवाज सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।








