जौनपुर

तहसील में फिर सक्रिय हुए दलाल! संपूर्ण समाधान दिवस में अधिवक्ता ने उठाए गंभीर सवाल

सरकारी योजनाओं तक पहुंच में बिचौलियों की भूमिका पर फूटा लोगों का गुस्सा

राम कीर्ति यादव और संदीप कुमार की रिपोर्ट

जौनपुर की तहसीलों में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान दलालों की बढ़ती सक्रियता को लेकर सवाल उठे। जनपद की सभी तहसीलों में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एक ओर जहां अधिकारियों ने आम जनता की समस्याएं सुनीं, वहीं दूसरी ओर तहसीलों में फिर से सक्रिय हुए दलालों और बिचौलियों का मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया। बदलापुर तहसील में आयोजित समाधान दिवस के दौरान अधिवक्ता द्वारा लगाए गए आरोपों ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में दलालों की बढ़ती सक्रियता के कारण आम नागरिकों को न केवल परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ भी सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा।

शनिवार को जिले के विभिन्न तहसील मुख्यालयों पर आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में बड़ी संख्या में फरियादी पहुंचे। सदर तहसील में जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन ने जनता की शिकायतें सुनीं, जबकि मछलीशहर में एडीएम परमानंद झा और बदलापुर तहसील सभागार में सीआरओ अजय अम्बष्ट की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों ने लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए।

बदलापुर तहसील में पहुंचे 83 फरियादी

बदलापुर तहसील सभागार में आयोजित समाधान दिवस में कुल 83 लोगों ने अपनी समस्याओं से संबंधित प्रार्थना पत्र अधिकारियों को सौंपे। इनमें राजस्व विवाद, जमीन की पैमाइश, पेंशन, आवास, राशन कार्ड, लेखपाल स्तर की शिकायतें तथा पुलिस से जुड़े मामले प्रमुख रूप से शामिल रहे। अधिकारियों ने मौके पर ही आठ मामलों का निस्तारण करते हुए शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को जांच एवं कार्रवाई के लिए भेज दिया।

हालांकि इस दौरान सबसे अधिक चर्चा उस शिकायत की रही, जिसमें तहसील परिसर में दलालों की बढ़ती सक्रियता का मुद्दा उठाया गया। अधिवक्ता मनोज तिवारी ने अधिकारियों को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा कि तहसील के लगभग हर पटल पर दलालों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इससे आम लोगों को सीधी प्रक्रिया के बजाय बिचौलियों के माध्यम से काम कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

“हर पटल पर दलालों का बोलबाला”

अधिवक्ता मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले प्रशासन द्वारा दलालों पर सख्ती की गई थी, जिसके बाद उनकी गतिविधियों में कमी आई थी। लेकिन अब एक बार फिर यह लोग सक्रिय हो गए हैं और सरकारी कार्यालयों में आम जनता से पहले उनकी पहुंच दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि कई जरूरतमंद लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए तहसील पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में दलाल लोगों को भ्रमित कर उनसे पैसे वसूलते हैं। इससे गरीब और अशिक्षित लोगों का आर्थिक शोषण हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तहसील परिसर को पूरी तरह दलाल मुक्त बनाया जाए और अधिकारियों तथा कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।

समाधान दिवस का उद्देश्य हो रहा प्रभावित

संपूर्ण समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी निस्तारण करना होता है। शासन स्तर से भी लगातार निर्देश दिए जाते रहे हैं कि फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और मौके पर समाधान किया जाए। लेकिन यदि तहसीलों में दलाल सक्रिय रहेंगे तो इस व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार साधारण कार्यों के लिए भी लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। ऐसे में दलाल खुद को “सहयोगी” बताकर लोगों से संपर्क करते हैं और बदले में पैसे लेकर फाइलें आगे बढ़वाने का दावा करते हैं। इससे सरकारी व्यवस्था की छवि खराब होती है और आम जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है।

अधिकारियों ने जांच का दिया भरोसा

समाधान दिवस में उठे इस मुद्दे को अधिकारियों ने गंभीरता से लिया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि तहसील परिसर में यदि कोई अवैध रूप से दलाली करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराई जाएगी।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि शासन की मंशा है कि हर व्यक्ति को बिना किसी दबाव और बिना किसी अतिरिक्त खर्च के सरकारी सेवाएं उपलब्ध हों। यदि किसी व्यक्ति से अवैध वसूली की जाती है या उसे अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है तो वह सीधे प्रशासन को शिकायत दे सकता है।

जनता को पारदर्शी व्यवस्था की उम्मीद

तहसीलों में दलालों का मुद्दा कोई नया नहीं है, लेकिन समय-समय पर इसको लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। समाधान दिवस जैसे मंचों पर जब इस प्रकार के आरोप उठते हैं तो यह प्रशासन के लिए चेतावनी भी माने जाते हैं। आम लोगों की अपेक्षा है कि सरकारी कार्यालयों में व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बने ताकि लोगों को अपने ही काम के लिए किसी बिचौलिए का सहारा न लेना पड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और शिकायतों की निगरानी को मजबूत कर ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वहीं अधिकारियों की नियमित निगरानी और आकस्मिक निरीक्षण भी दलाल तंत्र पर अंकुश लगाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

प्रशासनिक सख्ती की मांग तेज

समाधान दिवस में उठे मुद्दे के बाद अब स्थानीय स्तर पर तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दलालों पर सख्ती नहीं हुई तो सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचना और कठिन हो जाएगा।

फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तहसील परिसर में सक्रिय बताए जा रहे बिचौलियों के खिलाफ वास्तव में कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।

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