21 अक्टूबर 2026 6:17 पूर्वाह्न

एडजेब्रा डिजिटल विज्ञापन तकनीक: पुणे से उभरी भारतीय एडटेक कंपनी की क्रमिक विकास यात्रा

एडजेब्रा डिजिटल विज्ञापन तकनीक और इनुक्सू कंपनी की विकास यात्रा पर विशेष फीचर, कंपनी के तीन प्रमुख व्यक्तियों तथा लेखक अनिल अनूप की तस्वीर के साथ।

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युवा उद्यमी | जनगणदूत

आलेख एवं प्रस्तुति — अनिल अनूप


विज्ञापन की दुनिया में तकनीक का नया चेहरा

कभी विज्ञापन का अर्थ अखबार के पन्नों पर छपने वाला संदेश, रेडियो पर सुनाई देने वाला प्रचार या टेलीविजन पर प्रसारित होने वाला कोई आकर्षक दृश्य हुआ करता था। विज्ञापनदाता अनुमान लगाते थे कि उनका संदेश कितने लोगों तक पहुंचेगा, उनमें से कितने लोग उसे याद रखेंगे और कितने ग्राहक बनेंगे। इंटरनेट ने इस पूरी व्यवस्था को बदल दिया। अब विज्ञापन केवल संदेश प्रसारित करने का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, सॉफ्टवेयर, एल्गोरिदम, उपभोक्ता व्यवहार और वास्तविक समय में लिए जाने वाले निर्णयों का एक विशाल तकनीकी तंत्र बन चुका है।

इसी बदलाव के बीच महाराष्ट्र के पुणे से उभरी इनुक्सू डिजिटल मीडिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और उसका विज्ञापन मंच एडजेब्रा (Adgebra) भारतीय डिजिटल विज्ञापन उद्योग की एक उल्लेखनीय उद्यमशील कहानी प्रस्तुत करते हैं। कंपनी के आधिकारिक विकास इतिहास के अनुसार, इसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। समय के साथ इसने ईमेल विज्ञापन, एफिलिएट मार्केटिंग, रिच मीडिया, मोबाइल विज्ञापन, भारतीय भाषाओं में नेटिव विज्ञापन और वीडियो से आगे बढ़कर ओम्नीचैनल तथा मल्टी-फॉर्मेट एडटेक प्लेटफॉर्म का स्वरूप ग्रहण किया।

इस कहानी का महत्व केवल एक कंपनी के विस्तार में नहीं, बल्कि उस तकनीकी बदलाव में भी है जिसने विज्ञापनदाताओं, डिजिटल प्रकाशकों और उपभोक्ताओं के बीच संबंधों को नया रूप दिया है। भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ता केवल अंग्रेजी पढ़ने वाले शहरी उपभोक्ता नहीं हैं। देश की बड़ी आबादी हिंदी, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, गुजराती, पंजाबी और अन्य भारतीय भाषाओं में सामग्री पढ़ती है। यदि विज्ञापन तकनीक इस भाषायी विविधता को समझने में सक्षम हो, तो छोटे शहरों, कस्बों और क्षेत्रीय डिजिटल प्रकाशकों के लिए भी नए कारोबारी अवसर खुल सकते हैं।

लेकिन एडजेब्रा डिजिटल विज्ञापन तकनीक को सही ढंग से समझने के लिए पहले यह जानना आवश्यक है कि एडटेक क्या है, इसका विकास कैसे हुआ और कंपनी के संस्थापकों तथा कारोबारी नेतृत्व के बारे में उपलब्ध तथ्यों में क्या अंतर है।

डिजिटल विज्ञापन तकनीक आखिर है क्या?

डिजिटल विज्ञापन तकनीक को अंग्रेजी में Advertising Technology या संक्षेप में AdTech कहा जाता है। यह सॉफ्टवेयर, डेटा प्रबंधन, विज्ञापन वितरण प्रणालियों और विश्लेषणात्मक उपकरणों का ऐसा समूह है, जिसकी सहायता से विज्ञापनदाता अपने संभावित ग्राहकों तक डिजिटल माध्यमों से पहुंचते हैं और प्रकाशक अपनी वेबसाइटों, ऐप्स तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध विज्ञापन स्थान से आय अर्जित करते हैं।

उदाहरण के लिए, कोई वित्तीय सेवा कंपनी अपना विज्ञापन उन लोगों तक पहुंचाना चाहती है, जो निवेश संबंधी सामग्री पढ़ते हैं। दूसरी ओर, कोई समाचार वेबसाइट अपने पाठकों के लिए प्रासंगिक विज्ञापन दिखाकर कमाई करना चाहती है। एडटेक प्लेटफॉर्म इन दोनों पक्षों के बीच तकनीकी पुल का काम करता है।

ऑडियंस टार्गेटिंग: इसके माध्यम से विज्ञापन अभियान को निर्धारित दर्शक समूह, भाषा, डिवाइस, संदर्भ या उपलब्ध और अनुमत डेटा के आधार पर व्यवस्थित किया जाता है।

रियल-टाइम ऑप्टिमाइजेशन: अभियान चलने के दौरान उसके प्रदर्शन का विश्लेषण करके विज्ञापन वितरण में बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि निर्धारित कारोबारी लक्ष्य हासिल करने की संभावना बढ़े।

नेटिव एडवरटाइजिंग: इसमें विज्ञापन का रूप और प्रस्तुति उस वेबसाइट या ऐप की सामग्री के अनुकूल रखी जाती है, जिस पर वह दिखाई देता है। विज्ञापन की पहचान स्पष्ट रहनी चाहिए, ताकि पाठक उसे संपादकीय सामग्री समझने की भूल न करे।

रिच मीडिया और वीडियो विज्ञापन: इन प्रारूपों में साधारण स्थिर चित्र के बजाय इंटरैक्टिव तत्वों, एनिमेशन, वीडियो और अन्य दृश्य तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

डेटा एनालिटिक्स: इसके माध्यम से विज्ञापनदाता यह समझ सकते हैं कि कितने लोगों ने विज्ञापन देखा, कितने लोगों ने उस पर क्लिक किया और कितने लोगों ने अपेक्षित कार्रवाई की।

एडजेब्रा स्वयं को ओम्नीचैनल और मल्टी-फॉर्मेट एडटेक प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत करता है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य अलग-अलग डिजिटल संपर्क बिंदुओं पर ब्रांडों और उपभोक्ताओं को जोड़ना तथा विज्ञापन अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाना है।

आधिकारिक स्रोत: Adgebra की वेबसाइट

भारत में डिजिटल विज्ञापन तकनीक का विकास कब और कहां हुआ?

इस प्रश्न का उत्तर किसी एक तारीख, एक शहर या एक आविष्कारक के नाम तक सीमित नहीं किया जा सकता। डिजिटल विज्ञापन तकनीक का विकास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुआ। इंटरनेट के विस्तार, वेबसाइटों पर विज्ञापन स्थान की उपलब्धता, सर्च इंजन मार्केटिंग, ऑडियंस डेटा और स्वचालित विज्ञापन खरीद-बिक्री की प्रणालियों ने मिलकर आधुनिक एडटेक उद्योग का निर्माण किया।

भारत में डिजिटल विज्ञापन का विकास इंटरनेट की पहुंच, ऑनलाइन समाचार माध्यमों, ई-कॉमर्स, स्मार्टफोन और मोबाइल इंटरनेट के विस्तार के साथ हुआ। भारतीय कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी अवधारणाओं को स्थानीय बाजार की जरूरतों के अनुसार अपनाया। विशेष रूप से भारतीय भाषाओं में विज्ञापन, मोबाइल उपयोगकर्ताओं तक पहुंच और क्षेत्रीय डिजिटल प्रकाशकों की कमाई जैसे विषयों ने स्थानीय नवाचार के लिए अवसर पैदा किए।

इनुक्सू की शुरुआत पुणे में 2013 में हुई। इसका महत्व इस तथ्य में है कि कंपनी ने भारतीय बाजार में विज्ञापन तकनीक के एक विशिष्ट हिस्से पर ध्यान केंद्रित किया—ऐसी प्रणालियां विकसित करना, जो विज्ञापनदाताओं को अलग-अलग भाषायी और डिजिटल दर्शक समूहों तक पहुंचने में मदद कर सकें।

इसलिए यह कहना उचित होगा कि एडजेब्रा भारत में डिजिटल विज्ञापन तकनीक का अकेला जन्मदाता नहीं है। इसकी उपलब्धि को भारतीय एडटेक उद्योग में स्थानीय भाषाओं, नए विज्ञापन प्रारूपों और डिजिटल प्रकाशकों के मुद्रीकरण की दिशा में योगदान के रूप में समझना अधिक सटीक होगा।

तीन युवाओं की कहानी और संस्थापकों को लेकर जरूरी तथ्य

इनुक्सू और एडजेब्रा के शुरुआती सफर के बारे में चर्चा करते समय एक महत्वपूर्ण तथ्यात्मक अंतर सामने आता है। शशिकांत अनपत, त्रुशांत उगलमुगले और सुमित दबे को तीन संस्थापक युवाओं के रूप में प्रस्तुत करने से पहले उपलब्ध कंपनी स्रोतों से नामों की पुष्टि करना आवश्यक है। कंपनी के संस्थापक दल के रूप में रोहित बागड़, त्रुशांत उगलमुगले और शशिकांत अनपत के नाम मिलते हैं।

रोहित बागड़, संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, त्रुशांत उगलमुगले, सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी तथा शशिकांत अनपत, सह-संस्थापक और उत्पाद एवं विज्ञापन इन्वेंटरी से जुड़े नेतृत्वकारी पद पर है। सुमीत दुबे का नाम सार्वजनिक कंपनी प्रोफाइल में मुख्य व्यवसाय अधिकारी के रूप में मिलता है। इसलिए उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर उन्हें मूल संस्थापक दल का सदस्य कहना उचित नहीं होगा।

यह अंतर स्पष्ट करना जरूरी है, क्योंकि किसी उद्यम की कहानी में संस्थापकों की पहचान केवल परिचय का विषय नहीं होती। इससे कंपनी की वास्तविक स्थापना, जिम्मेदारियों के बंटवारे और तकनीकी तथा कारोबारी नेतृत्व को समझने में मदद मिलती है।

इनुक्सू की स्थापना के पीछे व्यापक उद्देश्य डिजिटल विज्ञापन को भारतीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना था। कंपनी ने ऐसी विज्ञापन प्रणालियों पर काम किया, जिनमें प्रकाशकों को अपनी डिजिटल सामग्री से आय कमाने और विज्ञापनदाताओं को अपने लक्षित दर्शकों तक पहुंचने के नए विकल्प मिल सकें।

यही वह बिंदु है जहां एक तकनीकी उद्यम का विचार कारोबारी मॉडल में बदलता है। किसी कंपनी के लिए केवल विज्ञापन दिखाने वाला सॉफ्टवेयर बनाना पर्याप्त नहीं है। उसे विज्ञापनदाताओं की जरूरतों, प्रकाशकों के हितों, उपयोगकर्ता अनुभव, भुगतान व्यवस्था और अभियान के परिणामों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

स्रोत: एडजेब्रा का आधिकारिक संस्थापक परिचय

2013 से 2017: शुरुआती प्रयोगों से एडजेब्रा मंच तक

कंपनी की आधिकारिक विकास यात्रा के अनुसार, मई 2013 में इनुक्सू की शुरुआत ईमेल विज्ञापन और एफिलिएट मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने के उद्देश्य से हुई। उस समय डिजिटल प्रकाशकों के सामने अपनी सामग्री से नियमित आय अर्जित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती थी।

ईमेल विज्ञापन और एफिलिएट मार्केटिंग के जरिए कंपनी ने डिजिटल वितरण तथा विज्ञापन मुद्रीकरण की संभावनाओं पर काम किया। इसके बाद 2014 में Splash नाम से रिच मीडिया प्रारूप पेश किया गया। इस विचार का लक्ष्य लेखों के भीतर मौजूद तस्वीरों को अधिक प्रभावशाली विज्ञापन अवसरों में बदलना था।

2015 में Spark के जरिए मोबाइल वेब विज्ञापन पर ध्यान केंद्रित किया गया। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ विज्ञापन का पारंपरिक डेस्कटॉप-केंद्रित स्वरूप पर्याप्त नहीं रह गया था। छोटे पर्दे पर विज्ञापन की दृश्यता, आकार और उपयोगकर्ता अनुभव को ध्यान में रखते हुए नए प्रारूपों की जरूरत थी।

वर्ष 2016 में कंपनी की विकास यात्रा का एक और महत्वपूर्ण चरण सामने आया। आधिकारिक इतिहास में इस वर्ष बहुभाषी नेटिव विज्ञापन प्रारूप की शुरुआत का उल्लेख है। इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री पढ़ने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए विज्ञापन को अधिक प्रासंगिक बनाना था।

इसके बाद 2017 में इन विभिन्न विज्ञापन नवाचारों को एडजेब्रा नाम के एक साझा मंच के अंतर्गत समेटा गया। इससे कंपनी की पहचान केवल अलग-अलग विज्ञापन प्रारूप बनाने वाली संस्था के बजाय एक एकीकृत एडटेक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित होने लगी।

स्रोत: एडजेब्रा का आधिकारिक विकास इतिहास

2018 और 2019: विस्तार, डेटा विश्लेषण और सेल्फ-सर्व प्लेटफॉर्म

किसी तकनीकी मंच की सफलता केवल उसके नए उत्पादों से तय नहीं होती। यह भी महत्वपूर्ण है कि कितने उपयोगकर्ताओं, प्रकाशकों और विज्ञापनदाताओं तक उसकी पहुंच बनती है तथा वे उसकी सेवाओं को लगातार इस्तेमाल करते हैं।

एडजेब्रा के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, 2018 में कंपनी ने प्रति माह लगभग 10 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने का महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया। इसी अवधि में कंपनी ने एफिलिएट मार्केटिंग से अपना ध्यान हटाकर एडटेक पर अधिक केंद्रित किया और विज्ञापन अभियानों का विश्लेषण करने के लिए एनालिटिक्स डैशबोर्ड विकसित किया।

2019 में सेल्फ-सर्व प्लेटफॉर्म की शुरुआत ने विज्ञापनदाताओं को अधिक प्रत्यक्ष नियंत्रण देने की दिशा में कदम बढ़ाया। ऐसे मॉडल में ग्राहक अपने विज्ञापन अभियान की योजना, बजट और अन्य निर्धारित विकल्पों को स्वयं प्रबंधित कर सकता है।

इस प्रकार की सुविधा छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों के लिए उपयोगी हो सकती है, क्योंकि उन्हें प्रत्येक अभियान के लिए पूरी तरह पारंपरिक एजेंसी-आधारित व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। साथ ही, अभियान के प्रदर्शन से संबंधित जानकारी उपलब्ध होने पर विज्ञापनदाता अपने निवेश का बेहतर मूल्यांकन कर सकते हैं।

कंपनी के आधिकारिक इतिहास में 2019 में महाराष्ट्र सरकार के साथ सूचीबद्धता या एम्पैनलमेंट का भी उल्लेख है। यह कंपनी के कारोबारी विकास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, हालांकि इससे अपने आप किसी विशिष्ट अभियान की प्रभावशीलता या समग्र वित्तीय स्थिति सिद्ध नहीं होती।

2020: क्षेत्रीय भाषाओं की ताकत और डिजिटल बाजार

भारत के डिजिटल बाजार की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी भाषायी विविधता है। एक ही उत्पाद के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की भाषा, पसंद और खरीदारी के तरीके अलग हो सकते हैं।

यदि किसी विज्ञापनदाता का संदेश केवल अंग्रेजी में उपलब्ध हो, तो वह उन उपयोगकर्ताओं से प्रभावी संवाद करने का अवसर खो सकता है, जो अपनी मातृभाषा या पसंदीदा भारतीय भाषा में सामग्री पढ़ते हैं। क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञापन इस अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं।

एडजेब्रा के आधिकारिक विकास विवरण में 2020 के दौरान क्षेत्रीय भाषा विज्ञापन में अपनी स्थिति मजबूत करने और ShareChat तथा Dailyhunt जैसे डिजिटल मंचों के साथ एकीकरण का उल्लेख है। इन साझेदारियों ने कंपनी की संभावित पहुंच और प्रकाशक नेटवर्क के विस्तार में भूमिका निभाई।

हालांकि, किसी मंच की व्यापक पहुंच का अर्थ यह नहीं है कि हर विज्ञापन प्रत्येक उपयोगकर्ता को दिखाया जाता है। वास्तविक विज्ञापन वितरण अभियान की शर्तों, उपलब्ध विज्ञापन स्थान, उपयोगकर्ता की पात्रता और अन्य तकनीकी व व्यावसायिक कारकों पर निर्भर करता है।

क्षेत्रीय भाषा विज्ञापन की असली उपयोगिता तभी सामने आती है, जब भाषा के साथ सामग्री का संदर्भ, विज्ञापन की प्रासंगिकता और उपयोगकर्ता का अनुभव भी ध्यान में रखा जाए।

2021 से 2022: क्लाउड तकनीक और बड़े स्तर पर संचालन

जब डिजिटल विज्ञापन मंच पर लाखों उपयोगकर्ताओं और बड़ी संख्या में विज्ञापन अवसरों का प्रबंधन करना होता है, तो तकनीकी ढांचे की क्षमता निर्णायक बन जाती है।

क्लाउड कंप्यूटिंग ऐसे सॉफ्टवेयर और डिजिटल सेवाओं को आवश्यक कंप्यूटिंग क्षमता, भंडारण और संचालन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है। इससे मांग में उतार-चढ़ाव के अनुसार संसाधनों का प्रबंधन आसान हो सकता है।

एडजेब्रा के आधिकारिक विकास इतिहास के अनुसार, 2021-22 की अवधि में कंपनी ने अपने सिस्टम को गूगल क्लाउड पर स्थानांतरित किया। कंपनी के विवरण में iZooto के साथ साझेदारी और IRCTC की विज्ञापन इन्वेंटरी से संबंधित काम का भी उल्लेख मिलता है।

यह बदलाव केवल तकनीकी बुनियादी ढांचे का विषय नहीं था। विज्ञापन उद्योग में गति और विश्वसनीयता महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी वेबसाइट पर विज्ञापन समय पर नहीं आता, रिपोर्टिंग में देरी होती है या अभियान का प्रदर्शन सही ढंग से मापा नहीं जा पाता, तो विज्ञापनदाता और प्रकाशक दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

क्लाउड आधारित ढांचा इन चुनौतियों के प्रबंधन में मदद कर सकता है, हालांकि किसी भी प्रणाली की वास्तविक विश्वसनीयता का मूल्यांकन उसके उपलब्ध प्रदर्शन, सुरक्षा व्यवस्था और परिचालन परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए।

2023: वीडियो विज्ञापन की ओर विस्तार

डिजिटल सामग्री का उपभोग तेजी से दृश्य और वीडियो प्रारूपों की ओर बढ़ा है। समाचार वेबसाइटों, मोबाइल ऐप्स और अन्य डिजिटल मंचों पर वीडियो सामग्री ने विज्ञापन के लिए नए अवसर बनाए हैं।

एडजेब्रा के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, 2023 में कंपनी ने InRead Video प्रारूप पेश किया। इस प्रकार के विज्ञापन लेख या डिजिटल सामग्री के बीच वीडियो विज्ञापन प्रस्तुत करने के लिए तैयार किए जाते हैं। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर इस प्रारूप के शुरुआती छह महीनों में 50 से अधिक प्रीमियम प्रकाशकों को जोड़ने का उल्लेख किया है।

कंपनी इसी वर्ष लगभग 50 करोड़ मासिक उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने का दावा भी करती है। यह संख्या कंपनी द्वारा प्रस्तुत पहुंच का पैमाना है; इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित सक्रिय उपयोगकर्ताओं, विज्ञापन देखने वाले विशिष्ट लोगों या भुगतान करने वाले ग्राहकों की संख्या के समान नहीं मानना चाहिए।

वीडियो विज्ञापन के विस्तार से प्रकाशकों को नए मुद्रीकरण विकल्प मिल सकते हैं। दूसरी ओर, विज्ञापनदाताओं को उत्पाद या सेवा के बारे में अधिक दृश्यात्मक और गतिशील संदेश प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। इस मॉडल की सफलता के लिए वीडियो की गुणवत्ता, लोडिंग गति, विज्ञापन की स्पष्ट पहचान और उपयोगकर्ता अनुभव महत्वपूर्ण हैं।

2024: अंतरराष्ट्रीय बाजार और डिजिटल आउट-ऑफ-होम विज्ञापन

एडजेब्रा की विकास यात्रा में 2024 को अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है। कंपनी के आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस अवधि में मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में विस्तार के साथ डिजिटल आउट-ऑफ-होम यानी DOOH विज्ञापन क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया गया।

DOOH विज्ञापन उन डिजिटल स्क्रीन और डिस्प्ले से जुड़ा है, जो सार्वजनिक या व्यावसायिक स्थानों पर लगाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, मॉल, व्यावसायिक इमारतों, परिवहन केंद्रों और अन्य स्थानों पर लगे डिजिटल डिस्प्ले विज्ञापन दिखा सकते हैं।

इंटरनेट पर दिखने वाले विज्ञापनों और सार्वजनिक डिजिटल स्क्रीन के विज्ञापनों को एक साझा योजना के अंतर्गत लाना ओम्नीचैनल विज्ञापन की अवधारणा से जुड़ा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग माध्यमों पर ब्रांड के संदेश को अधिक संगठित ढंग से प्रस्तुत करना है।

कंपनी ने Smartags और ONTV के साथ तकनीकी साझेदारियों का उल्लेख करते हुए इस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं के विस्तार की जानकारी दी है। इस प्रकार के सहयोग का कारोबारी महत्व इस बात में है कि विज्ञापनदाता केवल वेबसाइट या मोबाइल ऐप तक सीमित न रहकर दूसरे डिजिटल संपर्क बिंदुओं पर भी अपने अभियान की योजना बना सकते हैं।

2025: ओम्नीचैनल और मल्टी-फॉर्मेट विज्ञापन की नई पहचान

वर्ष 2025 में एडजेब्रा ने अपनी पहचान को और व्यापक बनाया। कंपनी के आधिकारिक विकास इतिहास में IRCTC के साथ Cuboid विज्ञापन प्रारूप और कनेक्टेड टीवी यानी CTV तथा DOOH के एकीकरण का उल्लेख मिलता है।

कनेक्टेड टीवी ऐसे टेलीविजन या उपकरणों को कहा जाता है, जिनके माध्यम से इंटरनेट आधारित वीडियो और अन्य डिजिटल सेवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। DOOH और CTV जैसे माध्यमों को डिजिटल विज्ञापन की व्यापक योजना में शामिल करने से विज्ञापनदाता अपने संदेश को मोबाइल, डेस्कटॉप, वीडियो और सार्वजनिक डिजिटल स्क्रीन जैसे विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थित कर सकते हैं।

इसी वर्ष कंपनी ने अपनी ब्रांड पहचान और बाजार में अपनी स्थिति को ओम्नीचैनल, मल्टी-फॉर्मेट एडटेक प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत किया। इसका संकेत है कि कंपनी केवल किसी एक विज्ञापन प्रारूप की आपूर्तिकर्ता बनने के बजाय अनेक माध्यमों और प्रारूपों को एक साथ जोड़ने पर जोर दे रही है।

कंपनी की यह यात्रा बताती है कि डिजिटल विज्ञापन उद्योग में तकनीकी नवाचार लगातार जारी रहता है। जो मंच एक समय रिच मीडिया या मोबाइल विज्ञापन पर केंद्रित था, वह समय के साथ वीडियो, कनेक्टेड टीवी, डिजिटल आउट-ऑफ-होम और डेटा आधारित अभियान प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विस्तार कर सकता है।

एडजेब्रा की तकनीक विज्ञापनदाता और प्रकाशक के लिए कैसे काम आती है?

एडजेब्रा के कारोबारी मॉडल को समझने के लिए दोनों पक्षों पर ध्यान देना जरूरी है।

विज्ञापनदाता के लिए इसका मूल्य इस बात में है कि वह अपने अभियान के लक्ष्य के अनुरूप डिजिटल दर्शकों तक पहुंचने, अलग-अलग विज्ञापन प्रारूप चुनने और उपलब्ध प्रदर्शन आंकड़ों का विश्लेषण करने के विकल्प प्राप्त कर सकता है।

उदाहरण के लिए, कोई शिक्षा कंपनी हिंदी भाषी विद्यार्थियों और अभिभावकों तक पहुंचना चाहती है। वह अपने अभियान के लिए उपयुक्त डिजिटल प्रकाशकों, भाषा, विज्ञापन प्रारूप और निर्धारित बजट के आधार पर योजना बना सकती है। अभियान के परिणामों का विश्लेषण करके वह यह भी देख सकती है कि किस प्रकार की प्रस्तुति बेहतर परिणाम दे रही है।

प्रकाशक के लिए लाभ का पहलू अलग है। किसी समाचार वेबसाइट पर बड़ी संख्या में पाठक आते हैं, लेकिन केवल पाठकों की संख्या अपने आप आय की गारंटी नहीं होती। विज्ञापन स्थान का उचित उपयोग, विज्ञापनदाताओं की मांग और तकनीकी एकीकरण प्रकाशक की कमाई को प्रभावित कर सकते हैं।

एडटेक प्लेटफॉर्म प्रकाशकों को विज्ञापन अवसर उपलब्ध कराने और विज्ञापन वितरण का प्रबंधन करने में मदद कर सकता है। हालांकि, किसी विशेष प्रकाशक की वास्तविक आय उसकी ट्रैफिक गुणवत्ता, विज्ञापन दर, भुगतान शर्तों, अभियान की उपलब्धता और प्लेटफॉर्म के साथ हुए समझौते पर निर्भर करती है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की भूमिका

आधुनिक डिजिटल विज्ञापन उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI और मशीन लर्निंग यानी ML महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र हैं। इनका उपयोग उपलब्ध डेटा में पैटर्न पहचानने, अभियान के प्रदर्शन का विश्लेषण करने और विज्ञापन वितरण को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, किसी विज्ञापन अभियान में यह पता लगाना उपयोगी हो सकता है कि कौन-सा प्रारूप बेहतर प्रतिक्रिया प्राप्त कर रहा है, किन प्रकाशकों पर विज्ञापन अधिक प्रभावी है या किन समयावधियों में दर्शकों की भागीदारी बढ़ती है।

हालांकि, AI का उल्लेख अपने आप किसी कंपनी की तकनीकी श्रेष्ठता का प्रमाण नहीं है। वास्तविक मूल्यांकन के लिए यह देखना आवश्यक है कि तकनीक किन समस्याओं को हल करती है, परिणाम कितने विश्वसनीय हैं और डेटा का उपयोग किन सुरक्षा तथा गोपनीयता मानकों के अंतर्गत किया जाता है।

डिजिटल विज्ञापन में गोपनीयता, सहमति, डेटा सुरक्षा और विज्ञापन की पारदर्शिता भविष्य की महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। इसलिए तकनीकी विकास को उपभोक्ता के अधिकारों और विश्वास के साथ संतुलित करना भी आवश्यक है।

आज एडजेब्रा किस स्तर पर है?

कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और सार्वजनिक प्रोफाइल के अनुसार, एडजेब्रा अब केवल एक प्रारंभिक स्टार्टअप नहीं, बल्कि अनेक डिजिटल विज्ञापन प्रारूपों और माध्यमों पर काम करने वाला विस्तारित एडटेक मंच है।

कंपनी अपनी सार्वजनिक प्रस्तुति में 500 मिलियन से अधिक मासिक उपयोगकर्ताओं तक पहुंच और 3,000 से अधिक प्रकाशक साझेदारों जैसे आंकड़ों का उल्लेख करती है। कंपनी के विवरण में दस से अधिक भाषाओं के समर्थन का भी दावा किया गया है। इन आंकड़ों को कंपनी द्वारा प्रस्तुत व्यावसायिक दावों के रूप में पढ़ना चाहिए।

मासिक पहुंच, विज्ञापन अवसरों की संख्या, विशिष्ट सक्रिय उपयोगकर्ताओं, राजस्व और लाभप्रदता अलग-अलग मापदंड हैं। इन सभी को एक ही अर्थ में नहीं लिया जा सकता। कंपनी का सटीक वार्षिक राजस्व, शुद्ध लाभ, बाजार हिस्सेदारी और मौजूदा मूल्यांकन जैसे वित्तीय आंकड़े उपलब्ध आधिकारिक सामग्री से स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं होते। इसलिए बिना प्रमाण के कंपनी को भारत की सबसे बड़ी या सबसे अधिक लाभ कमाने वाली कंपनी कहना उचित नहीं होगा।

कंपनी के वर्तमान आकार का एक और संकेत उसकी तकनीकी सेवाओं की विविधता है। नेटिव विज्ञापन, रिच मीडिया, वीडियो, मोबाइल, डेस्कटॉप, CTV और DOOH जैसे क्षेत्रों में काम करना बताता है कि इसका लक्ष्य विज्ञापनदाता और प्रकाशक दोनों के लिए एक व्यापक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

स्रोत: इनुक्सू की सार्वजनिक कंपनी प्रोफाइल और आधिकारिक विकास इतिहास।

युवा उद्यमियों के लिए क्या है इस कहानी का संदेश?

इनुक्सू और एडजेब्रा की विकास यात्रा युवा उद्यमियों को कई व्यावहारिक सबक देती है।

पहला, उद्यम की शुरुआत हमेशा किसी बिल्कुल नई तकनीक का आविष्कार करने से नहीं होती। कभी-कभी मौजूदा तकनीक को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर ढंग से लागू करना भी बड़ा अवसर बन सकता है। भारतीय भाषाओं में विज्ञापन इसी प्रकार की जरूरत का उदाहरण है।

दूसरा, किसी एक उत्पाद की सफलता के बाद विस्तार करने के लिए बाजार की बदलती आवश्यकताओं को समझना पड़ता है। ईमेल विज्ञापन और रिच मीडिया से मोबाइल, वीडियो तथा ओम्नीचैनल प्लेटफॉर्म तक का सफर इसी निरंतर बदलाव को दर्शाता है।

तीसरा, तकनीकी व्यवसाय में उत्पाद के साथ कारोबारी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। प्रकाशकों को समय पर भुगतान, विज्ञापनदाताओं को पारदर्शी रिपोर्टिंग और ग्राहकों को अभियान पर उचित नियंत्रण उपलब्ध कराना व्यवसाय की स्थिरता में योगदान देता है।

चौथा, केवल पहुंच के आंकड़ों से सफलता का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता। वास्तविक उद्यमशील सफलता में ग्राहक संतुष्टि, दोबारा कारोबार, वित्तीय अनुशासन, तकनीकी विश्वसनीयता और दीर्घकालीन लाभप्रदता भी शामिल हैं।

पांचवां, भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय डिजिटल बाजारों में अभी भी अनेक संभावनाएं हैं। छोटे शहरों की समाचार वेबसाइटों, क्षेत्रीय प्रकाशकों, स्थानीय कारोबारों और भाषायी सामग्री निर्माताओं के लिए ऐसे तकनीकी मंच नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

भारतीय जरूरतों से निकली तकनीकी उद्यमशीलता की कहानी

पुणे में 2013 में शुरू हुई इनुक्सू डिजिटल मीडिया टेक्नोलॉजीज और उसके एडजेब्रा मंच की कहानी भारतीय डिजिटल बाजार के विकास के साथ आगे बढ़ती दिखाई देती है। शुरुआती विज्ञापन प्रयोगों से रिच मीडिया, मोबाइल, क्षेत्रीय भाषा विज्ञापन, वीडियो और ओम्नीचैनल तकनीक तक का सफर यह बताता है कि डिजिटल उद्यमशीलता में निरंतर नवाचार कितना महत्वपूर्ण है।

इस कहानी में रोहित बागड़, त्रुशांत उगलमुगले और शशिकांत अनपत की संस्थापक भूमिका को उपलब्ध सार्वजनिक प्रमाणों के अनुरूप समझना जरूरी है। सुमीत दुबे की कारोबारी भूमिका को भी उनके दर्ज पद के संदर्भ में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि बिना पुष्ट प्रमाण के उन्हें मूल संस्थापक घोषित कर दिया जाए।

एडजेब्रा की उपलब्धियों का वास्तविक मूल्यांकन उसकी तकनीकी क्षमताओं, प्रकाशक नेटवर्क, विज्ञापनदाताओं के भरोसे, वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य में बदलते बाजार के अनुरूप ढलने की क्षमता से होगा।

युवा उद्यमी स्तंभ के लिए इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अवसर पहचानना पहली सीढ़ी है, लेकिन उस अवसर को टिकाऊ कारोबार में बदलने के लिए तकनीक, बाजार की समझ, अनुशासन और लगातार सीखते रहने की जरूरत होती है। भारतीय भाषाओं और विविध डिजिटल दर्शकों वाले देश में ऐसी उद्यमशील कोशिशें डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

आलेख एवं प्रस्तुति — अनिल अनूप

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