16 अक्टूबर 2026 6:35 अपराह्न

चित्रकूट के रामनगर में विकास कार्यों पर उठे सवाल, अंत्येष्टि स्थल और आंगनबाड़ी केंद्र की गुणवत्ता पर जांच की मांग

चित्रकूट के रामनगर की नादिन कुर्मियान ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल और आंगनबाड़ी केंद्र की खराब निर्माण स्थिति, दरारें और टूटे गेट के साथ रिपोर्टर संजय सिंह राणा

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संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट जिले के आकांक्षी ब्लॉक रामनगर की ग्राम पंचायत नादिन कुर्मियान में कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों की ओर से आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद कई निर्माण कार्य अपेक्षित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं दिखाई दे रहे हैं। खासतौर पर अंत्येष्टि स्थल निर्माण और आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण की मौजूदा स्थिति को लेकर जांच की मांग उठाई गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए निर्माण कार्यों में समय बीतने के साथ ही दरारें दिखाई देने लगी हैं। कहीं दीवारों में दरारें हैं तो कहीं निर्माण की स्थिति सवाल खड़े कर रही है। अंत्येष्टि स्थल का मुख्य गेट टूटकर जमीन पर पड़ा दिखाई देने की बात भी सामने आई है। वहीं मनरेगा योजना से बनाए गए आंगनबाड़ी केंद्र की दीवारों में दरारें और शौचालय की खराब स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों के लिए सरकारी योजनाओं के माध्यम से धन उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं होते हैं तो उसकी गुणवत्ता, निगरानी और भुगतान प्रक्रिया की जांच होना जरूरी हो जाता है।

अंत्येष्टि स्थल की दीवारों में दरार, गेट भी टूटा

ग्राम पंचायत नादिन कुर्मियान में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए अंत्येष्टि स्थल की स्थिति को लेकर सबसे अधिक सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक अंत्येष्टि स्थल की दीवारों और छत में दरारें दिखाई दे रही हैं। परिसर का मुख्य गेट भी टूटकर जमीन पर पड़ा नजर आने की बात कही गई है।

किसी भी सार्वजनिक निर्माण की उपयोगिता केवल उसके निर्माण तक सीमित नहीं होती। निर्माण के बाद उसकी मजबूती और लंबे समय तक उपयोग योग्य बने रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि निर्माण के कुछ समय बाद ही दीवारों और छत में दरारें आने लगें तथा मुख्य गेट क्षतिग्रस्त हो जाए तो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अंत्येष्टि स्थल जैसी सार्वजनिक सुविधा का निर्माण ग्रामीणों की जरूरत को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसलिए इसमें इस्तेमाल हुई सामग्री, निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता, स्वीकृत लागत और वास्तविक खर्च की जांच की जानी चाहिए।

आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण पर भी सवाल

अंत्येष्टि स्थल के साथ ही ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना से बनाए गए आंगनबाड़ी केंद्र को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। बताया गया है कि करीब 12 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए इस आंगनबाड़ी केंद्र की दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं।

इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र में बने शौचालय की स्थिति भी खराब होने की बात कही जा रही है। यदि सार्वजनिक धन से तैयार भवन में निर्माण के बाद ही इस तरह की कमियां दिखाई देने लगती हैं तो यह निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।

आंगनबाड़ी केंद्र केवल एक भवन नहीं होता। यहां छोटे बच्चों की देखभाल, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां संचालित होती हैं। इसलिए ऐसे केंद्र का सुरक्षित, मजबूत और उपयोग के योग्य होना बेहद जरूरी है। भवन की दीवारों में दरारें और शौचालय की खराब स्थिति बच्चों तथा केंद्र से जुड़े लोगों के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है।

ग्राम प्रधान और सचिव की भूमिका पर उठे सवाल

स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों में ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि दोनों की देखरेख में कराए गए विकास कार्यों में गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के माध्यम से होना बाकी है। यही वजह है कि शिकायतकर्ताओं की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और निर्माण कार्यों से संबंधित अभिलेखों, स्वीकृत लागत, भुगतान, तकनीकी स्वीकृति तथा मौके पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान कराया जाए।

यदि जांच में निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों की अनदेखी, वित्तीय अनियमितता या किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप जांच में सही नहीं पाए जाते हैं तो प्रशासन को वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति पर बेवजह आरोप न लगे।

सरकारी धन और निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल

ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च होने वाला पैसा जनता से जुड़े सरकारी संसाधनों का हिस्सा होता है। सड़क, नाली, भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, अंत्येष्टि स्थल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण पर होने वाला प्रत्येक खर्च इस उम्मीद के साथ किया जाता है कि उसका लाभ लंबे समय तक ग्रामीणों को मिलेगा।

लेकिन यदि लाखों रुपये की लागत से तैयार किसी भवन में जल्द ही दरारें पड़ने लगें या उसका कोई महत्वपूर्ण हिस्सा टूट जाए तो सवाल केवल निर्माण की गुणवत्ता का नहीं रह जाता, बल्कि निगरानी व्यवस्था पर भी उठता है।

नादिन कुर्मियान में सामने आई स्थिति में यह जानना जरूरी है कि निर्माण के दौरान कौन-कौन से तकनीकी मानक अपनाए गए थे। सामग्री की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई? कार्य पूर्ण होने के बाद किस अधिकारी या तकनीकी कर्मचारी ने उसका सत्यापन किया? भुगतान से पहले कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया था या नहीं? यदि निर्माण में कोई कमी थी तो उसे भुगतान से पहले क्यों नहीं रोका गया?

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

‘चलो गांव की ओर’ जागरूकता अभियान से उठी जांच की मांग

ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर युवा समाजसेवी सर्वेश कुमार ने जांच की मांग की है। उनका कहना है कि गांवों में विकास कार्य केवल कागजों पर पूरे दिखाए जाने के बजाय जमीन पर भी गुणवत्तापूर्ण दिखाई देने चाहिए।

उन्होंने नादिन कुर्मियान ग्राम पंचायत में कराए गए अंत्येष्टि स्थल और आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने ‘चलो गांव की ओर’ जागरूकता अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति की निगरानी और लोगों को जागरूक किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

उनकी मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर जाकर निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करे और उपलब्ध अभिलेखों से उसका मिलान कराया जाए।

जांच में सामने आ सकता है असली सच

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आखिर सरकारी धन से कराए गए निर्माण कार्यों की मौजूदा स्थिति ऐसी क्यों है? क्या निर्माण के समय तकनीकी गुणवत्ता की अनदेखी हुई या फिर निर्माण के बाद किसी कारण से भवन क्षतिग्रस्त हुए? क्या कार्य की निगरानी पर्याप्त थी? क्या भुगतान से पहले मानकों के अनुरूप सत्यापन किया गया?

इन सभी सवालों का जवाब किसी आरोप-प्रत्यारोप से नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है।

जिला प्रशासन यदि मामले को गंभीरता से लेकर संबंधित अधिकारियों की टीम से मौके का निरीक्षण कराए और निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। अंत्येष्टि स्थल और आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण से संबंधित स्वीकृत धनराशि, कार्यादेश, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण और पूर्णता प्रमाणपत्र की भी जांच की जा सकती है।

जिला प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार

अब निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विकास विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की अपेक्षा है कि मामले को केवल सामान्य शिकायत मानकर फाइलों में सीमित न किया जाए, बल्कि मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखी जाए।

यदि जांच में निर्माण कार्यों में अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही यदि निर्माण कार्य में तकनीकी खामी पाई जाती है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दुरुस्त कराया जाना भी जरूरी होगा।

दूसरी ओर, यदि जांच में निर्माण कार्य नियमानुसार पाया जाता है और सामने आई क्षति किसी अन्य कारण से हुई है तो प्रशासन को उसकी स्पष्ट जानकारी भी सार्वजनिक करनी चाहिए।

बड़ा सवाल

क्या नादिन कुर्मियान ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल और आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण की निष्पक्ष जांच होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में हुए इन कार्यों की गुणवत्ता का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा? या फिर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उठते सवाल इसी तरह फाइलों में दबे रहेंगे?

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को संज्ञान में लेकर अंत्येष्टि स्थल निर्माण और आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण की जांच कराता है या नहीं। जांच ही यह तय करेगी कि मामला केवल निर्माण की गुणवत्ता में कमी का है या इसके पीछे किसी स्तर पर वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता भी हुई है।

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