16 अक्टूबर 2026 5:24 अपराह्न

मॉनसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर जारी, पहाड़ों में बर्फबारी से बढ़ी ठंड ; कई राज्यों में अलर्ट

मॉनसून की विदाई के बाद देश के कई हिस्सों में बारिश और हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का मौसम

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कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

मॉनसून की विदाई का दौर भले ही शुरू हो चुका है, लेकिन देश के कई हिस्सों में बारिश अभी थमने का नाम नहीं ले रही है। पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और अलग-अलग हिस्सों में बनी ट्रफ लाइनों के प्रभाव से अगले कई दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्रों में बारिश के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है, जबकि मैदानी राज्यों में कहीं हल्की बारिश तो कहीं गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण ठंड की शुरुआत महसूस की जा रही है। वहीं पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश की संभावना बनी हुई है। पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी मौसम पूरी तरह साफ होने के आसार फिलहाल कम हैं।

हिमालयी राज्यों में बारिश के साथ बर्फबारी

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर और आसपास के पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 8 अक्टूबर के आसपास तथा इसके बाद 10 अक्टूबर को भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

राजौरी, पुंछ और ऊधमसिंह नगर जैसे इलाकों में बारिश की संभावना है। वहीं अनंतनाग, पुलवामा और डोडा सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हो सकती है। लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी शुरू होने से तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी 10 अक्टूबर तक रुक-रुककर हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। शिमला, मनाली, कुल्लू, चंबा और मंडी सहित हिमाचल के कई इलाकों में मौसम बदल सकता है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़, देहरादून, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे जिलों में भी बारिश के साथ तेज हवाएं और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खराब होने की स्थिति को देखते हुए पर्वतीय इलाकों में जाने वाले पर्यटकों और यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी बारिश

हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ का असर मैदानी इलाकों में भी दिखाई दे सकता है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 अक्टूबर के आसपास तक छिटपुट बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है।

उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी बारिश का दौर बना रह सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम में अचानक बदलाव के कारण दिन के तापमान में भी कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है।

राज्य के कई शहरों और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई गई है। इनमें अलीगढ़, कानपुर, लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और गोरखपुर जैसे इलाके शामिल हैं। पूर्वांचल के कुछ हिस्सों में आंधी, गरज-चमक और बिजली गिरने की स्थिति भी बन सकती है।

मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई है। ऐसे में खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखने की जरूरत है।

बिहार और झारखंड में बिजली गिरने का खतरा

बिहार और झारखंड में भी बारिश का सिलसिला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 7 अक्टूबर को दोनों राज्यों के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।

पश्चिम बंगाल से लेकर बिहार और झारखंड तक मौसम में नमी बनी हुई है। इसके चलते अगले कुछ दिनों तक बादल छाने और स्थानीय स्तर पर बारिश होने की संभावना बनी रह सकती है। किसानों के लिए भी यह मौसम महत्वपूर्ण है, क्योंकि बारिश का असर खेतों में खड़ी फसलों और कटाई के काम पर पड़ सकता है।

पूर्वोत्तर भारत में असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी बारिश

मध्य भारत में भी मौसम पूरी तरह साफ नहीं होगा। मध्य प्रदेश में 9 अक्टूबर तक बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि छत्तीसगढ़ में 10 अक्टूबर तक बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भी 8 अक्टूबर तक बारिश होने का अनुमान है। स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश होने से मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।

मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश के कारण तापमान में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है। सुबह और रात के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की संभावना है।

चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन का असर

मौसम में हो रहे बदलाव के पीछे कई मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं। सिक्किम के आसपास चक्रवाती परिसंचरण का क्षेत्र बना हुआ है। निचले क्षोभमंडल में उत्तर-पूर्वी बिहार से लेकर उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी तक एक ट्रफ लाइन बनी हुई है। इसके कारण पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

दक्षिण भारत की ओर भी मौसमी गतिविधियां सक्रिय हैं। मन्नार की खाड़ी और दक्षिणी तटीय तमिलनाडु के आसपास चक्रवाती गतिविधियों का असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा मन्नार की खाड़ी से पूर्व-मध्य अरब सागर तक एक अन्य ट्रफ लाइन का प्रभाव भी मौसम में बदलाव का कारण बन रहा है।

इन मौसमी प्रणालियों के कारण अगले चार से पांच दिनों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

मॉनसून की वापसी जारी, लेकिन बारिश अभी बाकी

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब धीरे-धीरे देश के बाकी हिस्सों से विदाई की ओर बढ़ रहा है। बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों से भी इसकी वापसी का दौर चल रहा है।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के अधिकांश हिस्सों से मॉनसून की वापसी हो चुकी है। अगले 48 घंटों के दौरान महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों से भी मॉनसून की पूरी तरह विदाई होने की संभावना है।

हालांकि मॉनसून की वापसी का मतलब यह नहीं है कि बारिश तुरंत समाप्त हो जाएगी। पश्चिमी विक्षोभ, स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ जैसी मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से मॉनसून की विदाई के बाद भी कई क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।

दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी

दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का असर और ज्यादा दिखाई दे सकता है। केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

कर्नाटक में बेंगलुरु समेत कुछ इलाकों में भी बारिश हो सकती है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर भारी बारिश की स्थिति बनने पर जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

पहाड़ों से मैदान तक बदला मौसम का मिजाज

मौसम विभाग के अनुसार 6 से 9 अक्टूबर के बीच लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और आसपास के इलाकों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। रामबन, बारामूला, शोपियां, कुलगाम, बांदीपोरा, कुपवाड़ा और अनंतनाग जैसे इलाकों में बारिश और तेज हवाओं से मौसम बदल सकता है।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू होने से सर्दी का असर बढ़ने लगा है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी 6 से 11 अक्टूबर के बीच बारिश के आसार हैं। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर यात्रा करने की सलाह दी गई है।

केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित ऊंचाई वाले धार्मिक स्थलों पर मौसम अचानक खराब हो सकता है। देहरादून, हल्द्वानी और पौड़ी जैसे क्षेत्रों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

अगले कुछ दिनों में कैसा रहेगा मौसम?

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 6 से 11 अक्टूबर के बीच बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी इस दौरान बारिश के आसार हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 6 से 10 अक्टूबर के बीच बारिश होने की संभावना है।

11 अक्टूबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में इस अवधि के दौरान गरज-चमक, तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं का खतरा बना रह सकता है।

कुल मिलाकर मॉनसून की विदाई के बावजूद देश के कई हिस्सों में मौसम अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। पहाड़ों में जहां बारिश के साथ बर्फबारी ठंड की दस्तक दे रही है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में बादल, बूंदाबांदी और गरज-चमक का दौर जारी है। अगले कुछ दिनों तक लोगों को मौसम विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान पर नजर रखते हुए यात्रा और दैनिक गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए।

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