16 अक्टूबर 2026 5:59 अपराह्न

मुख्य चुनाव आयुक्त पर प्रदर्शन को लेकर बृजभूषण का बड़ा हमला, बोले- ‘इस्तीफे की मांग चलती रही तो देश में कोई पद नहीं बचेगा’

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और बृजभूषण शरण सिंह के बयान को दर्शाती खबर की फीचर इमेज, साथ में रिपोर्टर दुर्गा प्रसाद शुक्ला

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रिपोर्ट—दुर्गा प्रसाद शुक्ला

गोंडा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन ने सियासी गर्मी बढ़ा दी है। दिल्ली में विपक्षी दलों के नेताओं के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उठ रही आवाजों के बीच भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद एवं पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने प्रदर्शनकारियों पर तीखा हमला बोला है। गोंडा में एक कार्यक्रम में पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह ने विपक्षी राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी के कहने मात्र से संवैधानिक और महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों से इस्तीफा मांगने का सिलसिला चलता रहा तो देश में कोई भी पद सुरक्षित नहीं रहेगा।

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयान में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का जिक्र करते हुए आंदोलन की राजनीतिक मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक बार बच्चों की आड़ में तीर निशाने पर लग गया तो अब उसी फार्मूले को आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका इशारा हालिया राजनीतिक आंदोलनों और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की ओर था।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन ने बढ़ाई सियासी तपिश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहा प्रदर्शन अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है। इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। दिल्ली में विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। कांग्रेस की ओर से भी चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लगातार उठाया जा रहा है।

इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच गोंडा में बृजभूषण शरण सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने प्रदर्शन को लेकर विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए इसे नकारात्मक राजनीति का हिस्सा बताया।

‘एक बार तीर निशाने पर लगा तो अब वही फार्मूला’

पत्रकारों से बातचीत के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जिस तरह से एक बार उनका तीर निशाने पर लगा, अब उसी तरीके को बार-बार अपनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सब बच्चों की आड़ में किया गया और अब उसी फार्मूले को आगे बढ़ाया जा रहा है।

पूर्व सांसद ने इस दौरान कथित तौर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कहकर विरोधी राजनीतिक समूह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति का कोई ठोस आधार नहीं है। उनके मुताबिक न तो इन लोगों की कोई राजनीतिक पार्टी है, न संगठन और न ही कोई राजनीतिक इतिहास।

बृजभूषण शरण सिंह के इस बयान ने पहले से गरम राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। उनके बयान के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी टकराव और बढ़ेगा।

‘नकारात्मक राजनीति’ पर भी साधा निशाना

बृजभूषण शरण सिंह ने प्रदर्शनकारियों की राजनीतिक शैली को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ये लोग हमेशा नकारात्मक राजनीति की बात करते हैं और सकारात्मक राजनीति के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।

पूर्व सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि यदि किसी के कहने पर लगातार इस्तीफे होते रहे तो देश में आखिर कौन-सा पद बच जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की मांगों का सिलसिला चलता रहा तो हर पद पर बैठे व्यक्ति के इस्तीफे की मांग उठने लगेगी।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से लगातार राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में बृजभूषण शरण सिंह की टिप्पणी को भाजपा की ओर से विपक्षी आंदोलन पर एक आक्रामक राजनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

एसआईआर प्रक्रिया पर विपक्ष के सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध की एक प्रमुख वजह चुनाव आयोग की ओर से चलायी गई एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों पर सवाल खड़े किए हैं।

विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए गए हैं। राजनीतिक मंचों पर ‘वोट चोरी’ जैसे आरोपों के जरिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग की ओर से अपनी स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है और आयोग की ओर से विभिन्न मुद्दों पर सर्वसम्मति से निर्णय लिए जाने की बात कही गई है। यही वजह है कि चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक तथा सार्वजनिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।

राहुल से अखिलेश तक प्रदर्शन में दिखे विपक्षी नेता

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में विपक्ष के कई बड़े चेहरे दिखाई दिए हैं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में प्रदर्शन में हिस्सा लिया। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

दूसरी ओर भाजपा और उसके नेताओं की ओर से विपक्ष के आंदोलन को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया जा रहा है। बृजभूषण शरण सिंह का बयान इसी सियासी टकराव की अगली कड़ी माना जा रहा है।

गोंडा से उठा बयान, प्रदेश की राजनीति में हलचल

गोंडा में बृजभूषण शरण सिंह का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे आंदोलन पर सीधे तौर पर विपक्षी राजनीति को निशाने पर लिया है। उनका बयान सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

बृजभूषण शरण सिंह ने जिस आक्रामक अंदाज में प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा, उससे साफ है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है। एक तरफ विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर को लेकर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा नेता विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रहा यह राजनीतिक संघर्ष आगे किस दिशा में जाता है। फिलहाल इतना जरूर है कि दिल्ली की सड़कों से शुरू हुआ विरोध अब उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मैदान तक पहुंच चुका है और गोंडा से बृजभूषण शरण सिंह के बयान ने इस सियासी टकराव में नया मसाला जोड़ दिया है।

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