हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
कामां। समाज की असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुजुर्गों के अनुभव, त्याग और योगदान को कितना महत्व देता है। उम्र के जिस पड़ाव पर व्यक्ति को सबसे अधिक स्नेह, सम्मान और सहारे की जरूरत होती है, उस समय उसका साथ देना ही सच्ची मानव सेवा है। इसी भावना को साकार करते हुए अपनाघर सेवा समिति की कामां इकाई की ओर से वयोवृद्ध सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के 50 से अधिक बुजुर्ग महिला-पुरुषों को सम्मानित किया गया। समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब सौ वर्ष की आयु पूरी कर चुकीं मंगली देवी का सम्मान किया गया। उन्हें देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और कई लोगों ने उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने बुजुर्गों के प्रति सम्मान, सामाजिक एकता और सेवा भावना का संदेश दिया। समारोह में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों, समाजसेवियों और विभिन्न समुदायों के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बुजुर्गों के योगदान को सम्मान देना और नई पीढ़ी को उनके प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराना रहा।
सेवा, सम्मान और संवेदना के साथ हुआ समारोह का शुभारंभ
मां माधुरी ब्रज वारिस सेवा सदन अपनाघर आश्रम, बझेरा के निर्देशानुसार आयोजित यह समारोह कामां स्थित खंडेलवाल धर्मशाला में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने और दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने गांधीजी के विचारों को याद करते हुए सेवा, करुणा, समानता और मानवता के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
समारोह में बुजुर्गों के सम्मान को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उनके अनुभवों और समाज के प्रति योगदान को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि परिवार और समाज के निर्माण में वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उनके जीवन में संचित अनुभव, संघर्ष से मिली सीख और पारिवारिक संस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक का काम करते हैं।
कार्यक्रम में पंकज प्रखर, कमल सिंह कमल और गोविंद सैनी ने बुजुर्गों के सम्मान में कविताएं प्रस्तुत कीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के प्रति आदर, पारिवारिक संबंधों की आत्मीयता और जीवन के अनुभवों के महत्व को अभिव्यक्त किया गया।
जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की रही भागीदारी
वयोवृद्ध सम्मान समारोह में नवनिर्वाचित नगरपालिका अध्यक्ष सत्यदेव शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विष्णु छत्ता वाले ने की। नगरपालिका उपाध्यक्ष शिवराम सैनी, पंचायत समिति प्रधान प्रतिनिधि केशरी सिंह और जायंट्स ग्रुप कामां के अध्यक्ष खेमराज खंडेलवाल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।
अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सामाजिक महत्व प्रदान किया। आयोजन में यह संदेश सामने आया कि वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किसी एक परिवार, समुदाय या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का साझा दायित्व है।
बुजुर्गों के प्रति सम्मान का वास्तविक अर्थ उनके अनुभवों को सुनना, उनकी जरूरतों को समझना और उन्हें सामाजिक जीवन से जोड़कर रखना भी है। उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों को अकेलेपन, आर्थिक कठिनाइयों और दैनिक गतिविधियों में सहयोग की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रियता उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर : संजय जैन बड़जात्या
कार्यक्रम का संचालन करते हुए अपनाघर के क्षेत्रीय अध्यक्ष संजय जैन बड़जात्या ने बुजुर्गों को समाज की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के जीवन का अनुभव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण स्रोत है। उनके अनुभवों में परिवार, सामाजिक संबंधों, परंपराओं और जीवन के उतार-चढ़ाव से जुड़ी ऐसी सीख होती है, जिसका महत्व समय के साथ और अधिक बढ़ जाता है।
उनके विचारों का मूल संदेश यही रहा कि बुजुर्गों को केवल उनकी उम्र के कारण नहीं, बल्कि उनके जीवन भर के योगदान के लिए भी सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने जिस पीढ़ी ने परिवारों को संभाला, बच्चों का पालन-पोषण किया और समाज के विकास में अपनी भूमिका निभाई, उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हर व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपनाघर संस्था के सेवा कार्यों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि संस्था निराश्रित, असहाय और मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रभुजनों की देखभाल तथा सेवा के माध्यम से मानवता का संदेश दे रही है। ऐसे प्रयास उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें जीवन के कठिन दौर में सहारे और देखभाल की आवश्यकता होती है।
सौ वर्षीय मंगली देवी के सम्मान ने सभी को किया भावुक
समारोह का सबसे भावनात्मक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब सौ वर्ष की आयु पूरी कर चुकीं मंगली देवी को सम्मानित किया गया। इतनी लंबी उम्र का पड़ाव पार करने वाली मंगली देवी को सम्मानित होते देखकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे। लोगों ने उनके प्रति आदर व्यक्त किया और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।
सौ वर्ष की आयु तक पहुंचना जीवन के लंबे सफर का प्रतीक है। इस सफर में अनेक पीढ़ियों के बदलाव, सामाजिक परिस्थितियों के परिवर्तन और जीवन के अनगिनत अनुभव शामिल होते हैं। मंगली देवी का सम्मान इसी जीवन यात्रा के प्रति सामूहिक आदर की अभिव्यक्ति बना।
ऐसे अवसर नई पीढ़ी को यह समझने का मौका देते हैं कि बुजुर्ग परिवार की जिम्मेदारी भर नहीं, बल्कि अनुभव और स्मृतियों से समृद्ध वह पीढ़ी हैं, जिनसे समाज अपने अतीत को समझ सकता है। उनका स्नेह और आशीर्वाद परिवारों में भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है।
50 से अधिक बुजुर्गों को किया गया सम्मानित
अपनाघर कामां के अध्यक्ष प्रमोद पुजारी, हरप्रसाद नाटाणी और सचिव सुरेश सोनी ने बताया कि समारोह में विभिन्न समाजों के 50 से अधिक बुजुर्ग महिला-पुरुषों को सम्मान प्रदान किया गया। सम्मानित होने वालों में गौड़ सनाढ्य, हरियाणा ब्राह्मण, जैन, अग्रवाल, खंडेलवाल, पेंशनर, जांगिड़, पंजाबी, राजपूत, सैनी, यादव, लोधा, प्रजापति, जाट, सैन, मुस्लिम, जाटव, कोली, खटीक, कश्यप, गुर्जर, स्वर्णकार और हरिजन समाज सहित अनेक समुदायों के वरिष्ठ नागरिक शामिल रहे।
सभी सम्मानित बुजुर्गों को दुपट्टा ओढ़ाकर, माला पहनाकर और प्रमाण-पत्र, प्रतीक चिह्न तथा उपहार भेंट करके सम्मानित किया गया। इस प्रक्रिया के माध्यम से अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों को एक मंच पर लाकर समान आदर देने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों की भागीदारी ने सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। बुजुर्गों का सम्मान किसी जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं होना चाहिए। हर वरिष्ठ नागरिक अपने जीवन के अनुभवों और सामाजिक योगदान के कारण सम्मान का अधिकारी है। इस तरह के आयोजन समुदायों के बीच संवाद और परस्पर सहयोग को भी बढ़ावा दे सकते हैं।
संस्था के पदाधिकारियों और महिला इकाई ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
समारोह को सफल बनाने में अपनाघर सेवा समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर हरि कुम्हेरिया, महेंद्र अरोड़ा, डॉ. संजय शर्मा, राधाशरण पुजारी, गोविंद खंडेलवाल, मनोज गोयल, राजू फौजी, उमाशंकर शर्मा, गोविंद गुर्जर और सुनील तमोलिया सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अपनाघर महिला इकाई की ओर से सुधा, ललिता, लता तमोलिया और राजवती पुजारी सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यकर्ताओं ने बुजुर्गों का सम्मान किया और आयोजन की गतिविधियों में सहयोग दिया।
समारोह के दौरान विभिन्न समाजों के अध्यक्षों, पदाधिकारियों, मीडिया कर्मियों और समाजसेवियों का भी अभिनंदन किया गया। उनकी सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि सामाजिक सेवा से जुड़े प्रयासों को सफल बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों का सहयोग महत्वपूर्ण होता है।
बुजुर्गों का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित न रहे
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस और गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित यह समारोह समाज के सामने एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ गया। बुजुर्गों को सम्मानित करना अच्छी पहल है, लेकिन उनके प्रति जिम्मेदारी केवल किसी विशेष दिवस पर कार्यक्रम आयोजित करने से पूरी नहीं होती। वास्तविक सम्मान तब दिखाई देता है, जब परिवार के सदस्य उनकी बात ध्यान से सुनें, उनकी जरूरतों का ख्याल रखें और उन्हें अकेलेपन का अनुभव न होने दें।
बुजुर्गों के लिए सम्मानजनक वातावरण तैयार करने में परिवार, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन की अपनी-अपनी भूमिकाएं हैं। जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों तक सहायता पहुंचाना, उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान देना तथा उन्हें सामुदायिक गतिविधियों से जोड़ना ऐसे कदम हैं, जिनसे उनके जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
कामां में आयोजित अपनाघर का वयोवृद्ध सम्मान समारोह इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला प्रयास रहा। 50 से अधिक बुजुर्गों का सम्मान और सौ वर्षीय मंगली देवी के प्रति लोगों की आत्मीयता ने यह संदेश दिया कि उम्र के इस पड़ाव पर सम्मान, अपनापन और संवेदना का महत्व सबसे अधिक होता है। समाज यदि अपने वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों को महत्व दे और उनके प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करे, तो पीढ़ियों के बीच संबंध अधिक मजबूत बन सकते हैं।
समारोह ने सेवा और मानवीय संवेदना को सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। बुजुर्गों का आशीर्वाद, उनका अनुभव और उनके जीवन से मिलने वाली सीख समाज की ऐसी पूंजी है, जिसका संरक्षण और सम्मान करना सभी की साझा जिम्मेदारी है।













