प्रतिष्ठित रंग सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि भारतीय रंग परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और सृजनात्मक प्रतिबद्धता की सार्वजनिक स्वीकृति का प्रतीक है। वर्ष 2026 में यह सम्मान रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले एक समर्पित रंगकर्मी दंपति को प्रदान किया गया। शास्त्रीय, लोक और नाट्य कला के संरक्षण तथा संवर्धन में उनकी दीर्घकालिक भूमिका को देखते हुए यह सम्मान उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता माना जा रहा है। कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को मंच के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने वाले उनके प्रयासों ने रंगकर्म की दुनिया में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। यही कारण है कि प्रतिष्ठित रंग सम्मान की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय रंगमंच और सांस्कृतिक चेतना के लिए भी गौरव का विषय बन गई है।
जगदम्बा उपाध्याय की रिपोर्ट
रंगमंच केवल अभिनय का माध्यम नहीं होता, बल्कि वह समाज, संस्कृति, लोकस्मृतियों और मानवीय संवेदनाओं को जीवंत बनाए रखने का एक सशक्त सांस्कृतिक उपक्रम भी है। जब किसी रंगकर्मी को उसके दीर्घकालिक योगदान, कलात्मक प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक सरोकारों के लिए सम्मानित किया जाता है, तो वह सम्मान केवल किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं रह जाता, बल्कि संपूर्ण रंग-जगत और सांस्कृतिक समाज की उपलब्धि बन जाता है। इसी क्रम में रंगकर्म के क्षेत्र में सक्रिय एक दंपति को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘भवानी शंकर स्मृति सम्मान’ से अलंकृत किया गया है, जिसे रंगमंच और लोककलाओं के क्षेत्र में अत्यंत सम्मानजनक उपलब्धि माना जाता है।
यह सम्मान उन्हें रंगकला, नाट्य परंपरा और सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण तथा संवर्धन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। सम्मान समारोह में उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों, रंगकर्मियों और संस्कृति प्रेमियों ने इस अवसर को भारतीय रंग परंपरा के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।
रंगकर्म के प्रति समर्पण का मिला राष्ट्रीय सम्मान
भवानी शंकर स्मृति संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान देशभर के उन कलाकारों को समर्पित होता है जिन्होंने शास्त्रीय, लोक एवं नाट्य कलाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय और दीर्घकालिक योगदान दिया हो। वर्ष 2026 के लिए गठित निर्णायक समिति ने सर्वसम्मति से यह सम्मान संयुक्त रूप से ममता पंडित और अभिषेक पंडित को प्रदान करने का निर्णय लिया।
समारोह के दौरान सम्मान स्वरूप ग्यारह हजार रुपये की सम्मान राशि, मानपत्र तथा अंगवस्त्र भेंट किए गए। सम्मान ग्रहण करते समय दोनों रंगकर्मियों ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय रंगमंच से जुड़े समस्त कलाकारों और सहयोगियों के सामूहिक प्रयास का सम्मान बताया।
रंगमंच को जनसरोकारों से जोड़ने का सतत प्रयास
रंगकर्म की दुनिया में सक्रिय यह दंपति लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय विषयों को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता रहा है। इनके नाट्य कार्यों में केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, लोकजीवन, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों की गहरी अभिव्यक्ति भी दिखाई देती है।
रंगमंच के माध्यम से समाज के विविध प्रश्नों को उठाने और नई पीढ़ी को कला एवं संस्कृति से जोड़ने का उनका प्रयास लगातार चर्चा में रहा है। यही कारण है कि उनके कार्यों को विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर सराहा जाता रहा है और अब यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके रचनात्मक सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है।
‘भवानी शंकर स्मृति सम्मान’ की विशिष्ट पहचान
साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय भवानी शंकर स्मृति संस्थान लंबे समय से कला साधकों को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहा है। संस्थान द्वारा दिया जाने वाला यह सम्मान देश के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक सम्मानों में गिना जाता है। विशेष रूप से शास्त्रीय, लोक और नाट्य कलाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को यह सम्मान प्रदान किया जाता है।
सम्मान की चयन प्रक्रिया भी अत्यंत गंभीर और पारदर्शी मानी जाती है। विशेषज्ञों की समिति विभिन्न कलाकारों के कार्यों का मूल्यांकन करने के बाद निर्णय लेती है। ऐसे में किसी कलाकार का इस सम्मान के लिए चयन होना उसकी कला-यात्रा की महत्वपूर्ण स्वीकृति माना जाता है।
समारोह में कलाकारों और साहित्यकारों ने दी शुभकामनाएँ
सम्मान समारोह में उपस्थित साहित्यकारों, नाटककारों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने सम्मानित दंपति को बधाई देते हुए कहा कि रंगमंच के क्षेत्र में उनका योगदान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब डिजिटल माध्यमों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, तब भी रंगमंच अपनी जीवंतता और सामाजिक उपयोगिता के कारण लोगों को आकर्षित कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे सम्मान कलाकारों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं और सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कला और संस्कृति के क्षेत्र में निरंतर कार्य करने वाले लोगों को समाज द्वारा सम्मानित किया जाना आवश्यक है, ताकि सृजनात्मक परंपराएँ और अधिक मजबूत हो सकें।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना यह सम्मान
सांस्कृतिक जगत के जानकारों का मानना है कि रंगमंच जैसी गंभीर विधा में सक्रिय रहना आज के समय में चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके बावजूद कुछ कलाकार अपनी प्रतिबद्धता और जुनून के बल पर इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। यही कारण है कि ऐसे सम्मान केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि कला के प्रति समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की सार्वजनिक स्वीकृति भी होते हैं।
इस सम्मान ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि सच्ची कला समय और सीमाओं से परे जाकर अपनी पहचान बनाती है। रंगमंच के प्रति निष्ठा, निरंतर साधना और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का जो संदेश इस सम्मान के माध्यम से सामने आया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणादायक रहेगा।
भारतीय रंग परंपरा की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने वाले कलाकारों का सम्मान वास्तव में उस सांस्कृतिक चेतना का सम्मान है जो समाज को संवेदनशील, जागरूक और मानवीय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्ष 2026 का यह प्रतिष्ठित रंग सम्मान इसी सांस्कृतिक निरंतरता और सृजनशीलता का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया है।













