16 अक्टूबर 2026 7:11 अपराह्न

पीएम आवास योजना पर सवाल : अपात्रों को लाभ देने के आरोप, सरकारी जमीन पर बने मकानों की जांच की मांग

बंथरा पीएम आवास योजना पर सवाल के साथ रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी, नगर पंचायत कार्यालय और प्रधानमंत्री आवास योजना की तस्वीर

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कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

बंथरा/लखनऊ। नगर पंचायत बंथरा में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की वर्ष 2025-26 की लाभार्थी सूची को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। योजना के तहत पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य पर सवाल तब खड़े हुए हैं, जब स्थानीय स्तर पर सूची में कथित अनियमितताओं, पहले से पक्के मकान वाले परिवारों को लाभ दिए जाने और सरकारी भूमि पर कब्जे से जुड़े मामलों में भी योजना का लाभ पहुंचाए जाने के आरोप सामने आए हैं।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि नगर पंचायत बंथरा के वार्ड नंबर 12 में प्रधानमंत्री आवास योजना की लाभार्थी सूची तैयार करने और लाभ देने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। आरोप है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को योजना का लाभ मिला है, जिनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर और आवास की जरूरत वाले कई परिवार अब भी योजना के लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर करीब 840 लाभार्थियों के खातों में प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त भेजे जाने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि इस संख्या और लाभार्थियों की पात्रता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरी सूची सार्वजनिक होने और संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

पात्रता पर सवाल, पहले से पक्के मकान वालों को लाभ देने का आरोप

प्रधानमंत्री आवास योजना का मूल उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और आवास की जरूरत वाले पात्र परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि किसी लाभार्थी के पास पहले से ही पर्याप्त और पक्का आवास मौजूद है तथा इसके बावजूद उसे योजना का लाभ मिला है, तो लाभार्थी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बंथरा में कुछ ऐसे परिवारों के नाम भी योजना की सूची में शामिल किए गए हैं, जिनके पास पहले से पक्के और यहां तक कि दो मंजिला मकान तक मौजूद हैं। दूसरी ओर जरूरतमंद परिवारों के नाम सूची में नहीं होने का दावा किया जा रहा है।

यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लाभार्थियों का चयन करते समय उनके आवास, भूमि, परिवार की आर्थिक स्थिति और अन्य पात्रता मानकों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया। यदि सत्यापन हुआ था तो पहले से बने पक्के मकानों वाले लाभार्थियों के नाम सूची में कैसे पहुंचे और यदि सत्यापन में कोई कमी रही तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभागीय अभिलेखों और मौके की जांच से ही मिल सकता है।

सरकारी खलिहान की जमीन पर कब्जे का पुराना न्यायालयीन आदेश चर्चा में

मामले को और गंभीर बनाने वाला एक पुराना न्यायालयीन आदेश भी शिकायत के साथ सामने आने की बात कही गई है। दस्तावेज के अनुसार असिस्टेंट कलेक्टर प्रथम श्रेणी/तहसीलदार सरोजनी नगर, लखनऊ की अदालत में वाद संख्या 5/130, धारा 122बी के तहत मामला दर्ज था।

दस्तावेज में ग्राम औरावा, परगना बिजनौर, तहसील सरोजनी नगर की गाटा संख्या 633, रकबा 0.088 हेक्टेयर भूमि को खलिहान की भूमि बताया गया है। आदेश में विजय कुमार सिंह पुत्र स्वर्गीय अरविंद सिंह द्वारा उक्त भूमि पर अवैध कब्जा कर पक्का मकान बनाए जाने का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

दस्तावेज में कब्जे के कारण ग्रामसभा की संपत्ति को क्षति पहुंचने की बात दर्ज होने तथा बेदखली की कार्रवाई के साथ ₹9,875 प्रतिपूर्ति और ₹2,000 निष्पादन व्यय लगाए जाने और नोटिस जारी किए जाने का उल्लेख है। आदेश पर 20 दिसंबर 2017 की तारीख अंकित होने की बात कही गई है।

अब शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस भूमि पर कब्जे को लेकर उक्त न्यायालयीन आदेश सामने आया था, उसी कब्जे वाली भूमि पर बने मकान को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला और उसके बाद भी निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

यदि यह दावा दस्तावेजी जांच में सही पाया जाता है तो यह केवल लाभार्थी चयन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह सवाल भी उठेगा कि योजना के तहत सहायता देने से पहले संबंधित भूमि और भवन की स्थिति का सत्यापन किस प्रकार किया गया था।

गाटा संख्या 375, 376, 377, 443 और 445 भी जांच के घेरे में

शिकायत में वार्ड नंबर 12 की कई अन्य गाटा संख्याओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने गाटा संख्या 375, 376, 377, 443 और 445 की भूमि को सरकारी भूमि बताते हुए वहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कराए जाने के आरोप लगाए हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन गाटा संख्याओं की वास्तविक प्रकृति, स्वामित्व और वर्तमान उपयोग की स्थिति राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांचना आवश्यक है।

यदि संबंधित भूमि सरकारी अथवा ग्रामसभा की संपत्ति पाई जाती है तो यह भी जांच का विषय होगा कि उस पर बने भवनों के संबंध में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता का निर्धारण कैसे किया गया। इसके साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि लाभार्थियों के दस्तावेजों में भूमि और भवन का क्या विवरण दर्ज किया गया था।

सूची सार्वजनिक न होने से बढ़ी नाराजगी

स्थानीय लोगों में सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर बताई जा रही है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की पूरी सूची सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने से सवालों का समाधान नहीं हो पा रहा है।

शिकायतकर्ताओं की मांग है कि नगर पंचायत बंथरा की वर्ष 2025-26 की प्रधानमंत्री आवास योजना की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए। सूची में लाभार्थी का नाम, वार्ड, भूमि का विवरण, भवन की स्थिति, पात्रता सत्यापन, स्वीकृति की स्थिति, किस्त भुगतान और निर्माण से संबंधित जियो-टैगिंग जैसी सूचनाओं की जांच की जाए।

पारदर्शिता के लिए यह भी जरूरी बताया जा रहा है कि लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया और सत्यापन से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट की जाए।

सूची में नाम के लिए धन लेने के आरोप भी सामने आए

शिकायत में कुछ लोगों से प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में नाम शामिल कराने के लिए धनराशि लिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे गंभीर आरोपों की सत्यता केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकती है। यदि जांच में धन उगाही या किसी प्रकार के अवैध लेन-देन के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और जिम्मेदारी निर्धारित करना भी आवश्यक होगा।

वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो शिकायतों के आधारहीन हिस्से को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा पर बिना आधार के प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

7 फरवरी 2026 की शिकायत के बाद कार्रवाई पर सवाल

शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले में 7 फरवरी 2026 को आईजीआरएस/संपूर्ण समाधान दिवस के माध्यम से शिकायत की गई थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद प्रभावी और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई।

यही वजह है कि अब शिकायतकर्ता उच्च स्तर से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मामले में केवल कागजी रिपोर्ट लगाने के बजाय मौके पर जाकर लाभार्थियों के मकानों, भूमि और निर्माण की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जनकल्याणकारी योजना में लाभार्थी चयन की प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, उतना ही पात्र परिवारों का विश्वास मजबूत होगा। इसके विपरीत यदि पात्रता के विपरीत लाभ देने या सरकारी भूमि पर बने भवनों को योजना से जोड़ने के आरोपों की अनदेखी होती है तो योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

राजस्व और नगर पंचायत अभिलेखों का मिलान जरूरी

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राजस्व विभाग और नगर पंचायत के अभिलेखों का आपस में मिलान करना महत्वपूर्ण होगा। प्रत्येक विवादित लाभार्थी की भूमि का खसरा-खतौनी विवरण, भूमि की श्रेणी, भवन की स्थिति और योजना में दर्ज विवरण का मिलान कराया जा सकता है।

इसके साथ ही योजना की स्वीकृति से पहले किए गए सर्वेक्षण, पात्रता सत्यापन, जियो-टैगिंग, निर्माण की तस्वीरों और किस्त जारी करने से संबंधित रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

यदि किसी लाभार्थी के नाम पर पहले से पक्का मकान दर्ज था तो यह पता लगाना होगा कि सर्वेक्षण के समय उसे कैसे दर्ज किया गया। इसी तरह सरकारी भूमि पर निर्माण के आरोप वाले मामलों में राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालयीन आदेशों की स्थिति का परीक्षण जरूरी होगा।

अब पारदर्शी जांच की मांग

बंथरा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर उठे सवालों का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि दस्तावेजी और मौके की निष्पक्ष जांच से ही संभव है। इसलिए मांग की जा रही है कि वर्ष 2025-26 की पूरी लाभार्थी सूची सार्वजनिक की जाए और संदिग्ध मामलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

खास तौर पर गाटा संख्या 633 समेत शिकायत में उल्लिखित अन्य गाटा संख्याओं की राजस्व स्थिति, लाभार्थियों की पात्रता, भवनों की वास्तविक स्थिति और योजना के तहत जारी धनराशि की जांच आवश्यक है।

मामले में भ्रष्टाचार, धन उगाही, अपात्रों को लाभ देने अथवा संरक्षण देने के आरोप अभी आरोप मात्र हैं। इनकी पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकती है। इसी तरह नगर पंचायत बंथरा और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना जरूरी है। उनका आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।

फिलहाल बंथरा में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तव में उन परिवारों तक पहुंचा, जिन्हें इसकी जरूरत और पात्रता थी, या फिर लाभार्थी चयन और सत्यापन की प्रक्रिया में कहीं गंभीर चूक हुई? इस सवाल का जवाब सार्वजनिक लाभार्थी सूची, राजस्व अभिलेखों और योजना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा।

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