18 अक्टूबर 2026 1:38 पूर्वाह्न

बारिश के मौसम में शब्दों की महफ़िल, ‘नवसृजन काव्य संध्या’ ने रचा साहित्यिक जादू

मुंबई में चित्रनगरी संवाद मंच की नवसृजन काव्य संध्या में गीत, ग़ज़ल और कविताओं की प्रस्तुतियों के दौरान साहित्यकारों एवं रचनाकारों का समूह

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कविता किरण की ग़ज़लों ने मोहा श्रोताओं का मन, युवा रचनाकारों की विविधरंगी प्रस्तुतियों से साहित्यिक शाम हुई यादगार

मुम्बई से शामी एम. इरफ़ान की रिपोर्ट

मुंबई। मायानगरी मुंबई की पहचान केवल सिनेमा, समुद्र और चमकती रोशनियों से नहीं है, बल्कि यह शहर साहित्य, कला, संगीत और सृजन की उन अनगिनत धाराओं का भी संगम है, जो लगातार अपनी नई पहचान गढ़ती रहती हैं। इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए चित्रनगरी संवाद मंच, मुंबई की ओर से रविवार, 16 अगस्त 2026 को गोरेगांव स्थित केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट के मृणालताई हॉल में ‘नवसृजन काव्य संध्या’ का आयोजन किया गया। गीत, ग़ज़ल, कविता, हास्य-व्यंग्य और मधुर गायन से सजी इस साहित्यिक शाम में शब्दों ने भावनाओं का रूप लिया और सुरों ने संवेदनाओं को आवाज़ दी।

बरसात के सुहाने मौसम के बीच आयोजित इस काव्य संध्या में मुंबई और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, कलारसिक, कवि, शायर, पत्रकार, गायक तथा फिल्म और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोग पहुंचे। आयोजन स्थल पर साहित्य और कला के प्रति अनुराग का ऐसा वातावरण बना कि मौसम की बारिश भी श्रोताओं के उत्साह को रोक नहीं सकी। मंच पर प्रस्तुत रचनाओं में कहीं जीवन के संघर्षों की आहट सुनाई दी तो कहीं प्रेम, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं की कोमल अनुभूतियां शब्दों में ढलती दिखाई दीं।

कविता किरण की ग़ज़लों ने बांधा भावनाओं का समां

‘नवसृजन काव्य संध्या’ का विशेष आकर्षण हिंदी और राजस्थानी की प्रख्यात शायरा कविता किरण की उपस्थिति रही। विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं कविता किरण ने अपनी चुनिंदा ग़ज़लों का पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनकी रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता सहज और सादगीभरी भाषा के माध्यम से गहरी संवेदनाओं को अभिव्यक्त करना रही।

कविता किरण ने जब अपनी ग़ज़लों को दिलकश तरन्नुम में प्रस्तुत किया तो सभागार का वातावरण पूरी तरह काव्यमय हो उठा। उनके शब्दों में प्रेम की नर्मी भी थी, जीवन के अनुभवों की परिपक्वता भी और समय के बदलते मिजाज को समझने वाली संवेदनशील दृष्टि भी। उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं की लगातार मिलती दाद ने यह साबित किया कि अच्छी कविता और सच्ची शायरी के लिए किसी कृत्रिम आडंबर की आवश्यकता नहीं होती; भाव और अभिव्यक्ति की सच्चाई ही उसे सीधे दिल तक पहुंचाती है।

कविता किरण की ग़ज़लों का आनंद लेने के लिए साहित्य और कला जगत की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं। प्रतिष्ठित गायक ओम व्यास, फिल्मकार सतीश दत्त, कवि-पत्रकार अमर त्रिपाठी, शायर एवं सिनेगीतकार मनजीत सिंह कोहली तथा पत्रकार शामी एम. इरफ़ान सहित अनेक साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

युवा रचनाकारों ने दिखाई सृजन की नई रंगत

‘नवसृजन काव्य संध्या’ की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इसमें नई पीढ़ी के रचनाकारों को अपनी रचनात्मक आवाज़ सामने रखने का अवसर मिला। युवा कवियों और शायरों ने अपनी-अपनी विशिष्ट शैली में रचनाएं प्रस्तुत कर यह संकेत दिया कि हिंदी कविता और शायरी का संसार निरंतर नए अनुभवों और नए मुहावरों से समृद्ध हो रहा है।

मंच पर खुशबू सोनी नायर, मंजू शर्मा, मंज़ूर इस्लाम, इरफ़ान शेख़, जामी अंसारी, विराट, के. डी. सैफ़ी, नीरज नीर, सैफ़ देहलवी और संजय गुप्ता ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। किसी की कविता में सामाजिक सरोकार मुखर हुए तो किसी की रचना ने निजी अनुभवों और रिश्तों की दुनिया को स्पर्श किया। कई प्रस्तुतियों में प्रेम और जीवन की खूबसूरत अनुभूतियां थीं, वहीं कुछ रचनाओं ने समकालीन समय की विसंगतियों पर गंभीर सवाल भी उठाए।

इन विविध प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को एकरंगी होने से बचाया। गंभीर कविता के बीच हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने वातावरण को हल्का और जीवंत बनाया। व्यंग्य की चुटीली पंक्तियों और हास्य के सहज प्रसंगों पर सभागार में ठहाके गूंजते रहे। इस तरह काव्य संध्या में संवेदना और मनोरंजन का सुंदर संतुलन दिखाई दिया।

हेमंत शर्मा के संचालन ने जोड़ी लय

युवा शायर हेमंत शर्मा ने कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए एक प्रस्तुति को दूसरी प्रस्तुति से इस तरह जोड़ा कि पूरी काव्य संध्या में प्रवाह बना रहा। मंच संचालन में साहित्यिक गरिमा के साथ सहज संवाद का मेल दिखाई दिया। उन्होंने रचनाकारों का परिचय कराने के साथ श्रोताओं को उनकी प्रस्तुतियों के भावलोक से भी जोड़ा।

एक अच्छे काव्य आयोजन की सफलता केवल रचनाओं में नहीं, बल्कि मंच और श्रोता के बीच बनने वाले संवाद में भी निहित होती है। ‘नवसृजन काव्य संध्या’ में यह संवाद पूरे समय महसूस किया गया। कवि अपनी रचना पढ़ते रहे और श्रोता कभी तालियों से, कभी वाह-वाह से और कभी मुस्कान व ठहाकों के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते रहे।

‘धरोहर’ में याद आए ज़फ़र गोरखपुरी

कार्यक्रम का विशेष खंड ‘धरोहर’ साहित्यिक दृष्टि से खासा उल्लेखनीय रहा। इस खंड में दिल्ली की कवयित्री सोनाली बोस ने मशहूर शायर ज़फ़र गोरखपुरी की ग़ज़ल प्रस्तुत कर हिंदी-उर्दू काव्य परंपरा की समृद्ध विरासत को याद किया।

‘धरोहर’ जैसे खंड का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि नवसृजन के साथ साहित्य की पूर्ववर्ती पीढ़ियों की रचनात्मक विरासत को याद रखना आवश्यक है। नई पीढ़ी के रचनाकार जब पुरानी पीढ़ी के सृजन से संवाद करते हैं तो साहित्य की परंपरा टूटती नहीं, बल्कि नए अर्थों के साथ आगे बढ़ती है। सोनाली बोस की प्रस्तुति ने इसी साहित्यिक निरंतरता का सुंदर अहसास कराया।

ओम व्यास के गायन ने बढ़ाई संगीत की मिठास

काव्य संध्या में शब्दों के साथ सुरों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बना दिया। प्रतिष्ठित गायक ओम व्यास ने अपने सुमधुर गायन से वातावरण में संगीत की मिठास घोल दी। उनकी प्रस्तुति ने कविता, ग़ज़ल और गीत के बीच मौजूद उस स्वाभाविक रिश्ते को सामने रखा, जिसमें शब्द जब सुरों से मिलते हैं तो उनकी संवेदना और गहराई दोनों बढ़ जाती हैं।

ओम व्यास के गायन ने सभागार में मौजूद श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ा और काव्य संध्या को एक सांगीतिक ऊंचाई प्रदान की। इस तरह आयोजन केवल कविता पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साहित्य और संगीत के सुंदर समन्वय में बदल गया।

देवमणि पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजन

शायर देवमणि पांडेय के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का संयोजन राजेश ऋतुपर्ण और हेमंत शर्मा ने किया। आयोजन के पीछे साहित्य के प्रति प्रतिबद्धता और नई रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच देने की भावना स्पष्ट दिखाई दी।

मुंबई जैसे महानगर में, जहां भागती-दौड़ती जिंदगी के बीच लोगों के पास ठहरकर कविता सुनने और साहित्य से संवाद करने का समय कम होता जा रहा है, ऐसे आयोजन सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। वे लोगों को कुछ समय के लिए रोजमर्रा की आपाधापी से बाहर निकालकर शब्दों, सुरों और संवेदनाओं की दुनिया में ले जाते हैं।

साहित्यिक संस्कृति को जीवंत रखने की पहल

‘नवसृजन काव्य संध्या’ केवल एक कवि सम्मेलन या मनोरंजनपरक कार्यक्रम नहीं था। इसके भीतर साहित्य की नई पीढ़ी को मंच देने, वरिष्ठ रचनात्मक परंपराओं को सम्मानित करने और कविता को आम श्रोताओं के बीच जीवंत बनाए रखने की कोशिश दिखाई दी। युवा रचनाकारों की सहभागिता और वरिष्ठ साहित्यिक हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को पीढ़ियों के बीच रचनात्मक संवाद का रूप दिया।

आज के डिजिटल दौर में कविता और शायरी सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से लोगों तक पहुंच रही है, लेकिन आमने-सामने बैठकर कविता सुनने का अनुभव अब भी अपनी अलग गरिमा रखता है। कवि की आवाज़, उसकी प्रस्तुति, श्रोताओं की तत्काल प्रतिक्रिया और सभागार में निर्मित सामूहिक भावभूमि किसी भी साहित्यिक आयोजन को विशिष्ट बना देती है। मुंबई की इस काव्य संध्या में यही जीवंतता दिखाई दी।

शब्दों की रोशनी में यादगार हुई शाम

कुल मिलाकर, चित्रनगरी संवाद मंच, मुंबई की ‘नवसृजन काव्य संध्या’ ऐसी साहित्यिक शाम बनकर सामने आई, जिसमें गीत की मधुरता, ग़ज़ल की रवानी, कविता की संवेदना, व्यंग्य की चुटीली धार और संगीत की मिठास एक साथ उपस्थित रही। कविता किरण की प्रभावशाली ग़ज़लों ने जहां श्रोताओं को भावनाओं के गहरे संसार में पहुंचाया, वहीं युवा रचनाकारों ने अपनी रचनात्मक ऊर्जा से मंच को नई रंगत दी।

बरसात की शाम में मृणालताई हॉल में जुटे साहित्यप्रेमियों के लिए यह आयोजन महज कुछ घंटों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शब्दों और संवेदनाओं के साथ बिताया गया एक यादगार अनुभव रहा। ऐसी काव्य संध्याएं साहित्य को पुस्तकों के पन्नों से निकालकर समाज के बीच लाती हैं और यह भरोसा जगाती हैं कि कविता आज भी मनुष्य के भीतर मौजूद संवेदना को जगाने की ताकत रखती है।

‘नवसृजन काव्य संध्या’ ने मुंबई के साहित्यिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में इसी विश्वास को एक बार फिर स्वर दिया—शब्द बदलते समय के साथ अपना रूप बदल सकते हैं, लेकिन मनुष्य के भीतर कविता की जरूरत कभी समाप्त नहीं होती।

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